हर जिले में समिति गठित होगी और विभाग इसके लिए टेंडर जारी करेगा यह फैसला 7 जनवरी 2021 को आया है और इससे उत्तराखंड राज्य में करीब 35000 से अधिक स्वयं सहायता समूह पंजीकृत है और वही कोरोना काल में हथकरघा, हस्तशिल्प ,खादी सहित अन्य कई तरह के उत्पाद हैं इन सभी स्वयं सहायता समूह से कुछ ना कुछ बनाया जाता है और स्थानीय लोग यहां तक कि विदेशों में भी निर्यात करा जाता है लेकिन उत्तराखंड राज्य के ज्यादातर स्वयं सहायता समूह या एस. एच. जी की स्थिति ज्यादा सही नहीं है मतलब आर्थिक स्थिति ज्यादा समृद्ध नहीं है और सरकार का यह फैसला सभी स्वयं सहायता समूह के लिए एक अच्छी खबर है जिससे जिले के अच्छे स्वयं सहायता समूह को समृद्ध होने का मौका मिल सकता है और
आगे बढ़ने का भी क्योंकि अभी तक इन स्वयं सहायता समूह को अच्छा बाजार नहीं मिल सका था सचिव वित्त सौजन्य की ओर से जारी किए गए आदेश में जिला स्तर पर मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में बनी हुई कमेटी को स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को चिन्हित करने और सूचीबद्ध करने का जिम्मा सौंपा गया है यह कमेटी ही उत्पादों की जानकारी जी .एम पोर्टल पर भी ऑनलाइन करेगी और इसके साथ ही चिन्हित उत्पादों की खरीद के लिए निविदाएं आमंत्रित करने और निविदाओं में स्वयं सहायता समूह को शामिल करने को भी कहा गया है और उत्तराखंड राज्य के सचिव ने यह भी साफ कर दिया गया है कि सामग्री की खरीद में गुणवत्ता से किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया जाएगा जो कि ग्राहकों के लिए भी फायदेमंद होगा और
यह जिम्मेदारी खरीद करने वाले विभाग की होगी और वहां संबंधित प्रमाण पत्र भी हासिल करेगा और वही एक #स्वयंसहायता समूह के उत्पादों को दूसरे स्वयं सहायता समूह द्वारा बेचने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है और यह सरकार की पारदर्शिता भी दर्शाता है जिससे प्रतिस्पर्धा समूह में बढ़ेगी और जिसे अब सरकारी विभाग एक बार में स्वयं सहायता समूह से Rs. 500000 तक की खरीद कर सकेंगे ऑनलाइन टेंडर के माध्यम से!
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