बैंक में पैसो का स्रोत नहीं बताने पर लगेगा टैक्स व जुर्माना ?

नोटबंदी (November 2016) के दौरान गोवा में एक ग्राहक के साथ घटी यह घटना **आयकर कानून में हुए संशोधनों** और **बैंकों में बेनामी/अघोषित नकदी** जमा कराने पर सख्त कार्रवाई का एक प्रमुख उदाहरण बनी थी। ### गोवा की घटना क्या थी? नोटबंदी के समय गोवा में एक बैंक खाताधारक ने अपने खाते में अचानक बड़ी मात्रा में नकदी (पुराने 500 और 1000 रुपये के नोट) जमा कराए। * **बैंक द्वारा पूछताछ:** जब बैंक अधिकारियों और आयकर विभाग ने उस व्यक्ति से जमा पैसों के **वैध स्रोत (Source of Income)** के बारे में पूछा, तो वह व्यक्ति इसका कोई संतोषजनक सबूत, बिल, या आय का जरिया (जैसे आईटीआर या व्यापार का रिकॉर्ड) पेश नहीं कर सका। * **कार्रवाई:** आयकर विभाग ने इस राशि को **अघोषित आय (Unexplained Cash Credit / Undisclosed Income)** माना। इसके बाद उस खाते को फ्रीज कर दिया गया और जमा राशि पर भारी टैक्स, सरचार्ज और जुर्माना (Penalty) लगाया गया। ### कानून क्या कहता है? (आयकर कानून की धारा 115BBE) नोटबंदी के समय सरकार ने आयकर अधिनियम (Income Tax Act) की **धारा 115BBE** में संशोधन करके अघोषित आय पर टैक्स और जुर्माने की दरें अत्यधिक सख्त कर दी थीं। यदि आप बैंक खाते में ऐसा पैसा जमा करते हैं जिसका वैध स्रोत आप साबित नहीं कर पाते: 1. **फ्लैट टैक्स Rate:** अघोषित राशि पर सीधा **60% टैक्स** लगता है। 2. **सरचार्ज (Surcharge):** इस टैक्स पर **25% सरचार्ज** लगता है (जो कुल राशि का 15% बनता है)। 3. **सेस (Cess):** 4% स्वास्थ्य और शिक्षा उपकर। 4. **अतिरिक्त जुर्माना (Penalty):** यदि आयकर विभाग खुद ऐसी आय को पकड़ता है, तो धारा 271AAB के तहत **10% अतिरिक्त जुर्माना** भी लगाया जाता है। > **कुल प्रभावी दर (Total Tax & Penalty):** अघोषित राशि का **लगभग 78% से 84% तक** केवल टैक्स और जुर्माने के रूप में सरकार के पास चला जाता है, और व्यक्ति के पास मात्र 16% से 22% हिस्सा ही बचता है। > ### इस घटना से मुख्य सीख * **स्रोत का प्रमाण (Proof of Source):** बैंक या आयकर विभाग को कभी भी यह अधिकार है कि वह आपके खाते में जमा बड़ी रकम के स्रोत के बारे में पूछ सके। अगर पैसा आपकी खेती की कमाई, दुकान की बिक्री, या कोई संपत्ति बेचने से आया है, तो उसका बिल/कागजात होना जरूरी है। * **बैंकों की जिम्मेदारी:** यदि किसी खाते में सामान्य से अचानक बहुत अधिक लेनदेन होता है, तो बैंक आयकर विभाग को इसकी सूचना **STR (Suspicious Transaction Report)** या **SFT (Statement of Financial Transactions)** के जरिए देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं।

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