ट्रैफिक चालान यदि पेंडिंग है तो हो सकता है बिजली के बिल में जोड़ दें ?


सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की एक टिप्पणी के कारण यह चर्चा शुरू हुई है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ देश भर में लगभग ₹45,000 करोड़ के लंबित ई-चालान की वसूली से जुड़े मामले पर सुनवाई कर रही थी।

मुख्य बातें:

  • कोर्ट की मौखिक टिप्पणी: सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अधिकारियों को बकाया जुर्माना वसूलने के नए और कड़े रास्ते ढूंढने की बात कही। कोर्ट ने मौखिक रूप से एक विचार (Suggestion) रखते हुए कहा कि यदि लोग चालान नहीं भर रहे हैं, तो इसे बिजली के बिल से जोड़ने पर विचार किया जा सकता है, क्योंकि बिजली बिल न भरने पर कनेक्शन कटने का डर रहता है।
  • यह कोई कानून या आदेश नहीं है: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल सुनवाई के दौरान दिया गया एक सुझाव (Remark/Suggestion) था, न कि कोई अंतिम आदेश या नियम। फिलहाल किसी भी राज्य में ऐसा कोई नियम लागू नहीं किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अन्य क्या कड़े कदम उठाने के सुझाव दिए?

पेंडिंग चालान की वसूली के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कई अन्य प्रशासनिक कदम उठाने के निर्देश और सुझाव दिए हैं:

  1. परिवहन पोर्टल पर ब्लैकलिस्ट: जब तक बकाया चालान क्लियर न हो, वाहन को ब्लैकलिस्ट में डाला जा सकता है।
  2. RC और ट्रांसफर पर रोक: वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC) रिन्यू न होना, मालिकाना हक (Ownership) ट्रांसफर न होना।
  3. ड्राइविंग लाइसेंस (DL) और PUC: पेंडिंग चालान होने पर DL रिन्यू न करना, लाइसेंस निलंबित करना और गाड़ियों के लिए PUC (प्रदूषण प्रमाणपत्र) न जारी करना।
  4. गाड़ी जब्त होना: सड़कों पर रैंडम चेकिंग के दौरान यदि पुराना भारी चालान बकाया मिलता है, तो वाहन को सीधे जब्त (Impound) किया जा सकता है।

बिजली बिल में चालान जुड़कर आना अभी लागू नहीं हुआ है। हालांकि, भविष्य में RC, DL रिन्यूअल या गाड़ी बेचने में आने वाली कानूनी अड़चनों से बचने के लिए पेंडिंग चालान को समय पर जमा कर देना बेहतर होता है।

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