शंख हड्डी का बना होता है इसलिए उसे मंदिर के गर्भ ग्रह में बजाने के बजाय बार परिसर में बजाया जाता है ?
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शंख किसी जानवर या जीव की हड्डी (Bone) का बना नहीं होता है, बल्कि यह एक समुद्री जीव (Mollusk / Marine Snail) का बाहरी खोल या कवच (Exoskeleton/Shell) होता है।
1. शंख हड्डी क्यों नहीं है? (वैज्ञानिक कारण)
- कैल्शियम कार्बोनेट: शंख मुख्य रूप से कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO_3) और शेल प्रोटीन से बना होता है, ठीक वैसे ही जैसे घोंघे (Snail) या सीप (Oyster) का बाहरी आवरण होता है। इसमें हड्डी की तरह अस्थि-मज्जा (Bone Marrow), जीवित कोशिकाएं या रक्त धमनियां नहीं होतीं।
- प्राकृतिक रूप से शुद्ध: धार्मिक और आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से शंख को प्राकृतिक और पवित्र माना गया है।
2. मंदिर के गर्भगृह और बाहर शंख बजाने के नियम व परंपरा
यदि शंख हड्डी नहीं है, तो फिर इसे बजाने या गर्भगृह में रखने के नियम क्या हैं?
- गर्भगृह के भीतर शंख का प्रयोग:
- अभिषेक और आरती: गर्भगृह के अंदर मुख्य मूर्ति के जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और आरती के समय शंख का प्रयोग अनिवार्य और अत्यंत पवित्र माना जाता है। विशेष रूप से 'दक्षिणावर्ती शंख' को देवी लक्ष्मी का रूप मानकर गर्भगृह में स्थापित भी किया जाता है।
- देव-ध्वनि: पूजा के दौरान गर्भगृह के भीतर शंख बजाकर जो ध्वनि उत्पन्न की जाती है, उसे सकारात्मक ऊर्जा और 'ॐ' की ध्वनि का प्रतीक माना जाता है।
- गर्भगृह के बाहर क्यों बजाया जाता है?
- शारीरिक स्पर्श और स्वच्छता (उच्छिष्ट/जूठा होना): शंख को जब मुंह से लगाकर फूंक मारकर बजाया जाता है, तो मुंह की लाड़ (सलाइवा) और उच्छिष्ट (जूठन) शंख के अंदर और आसपास लगती है। सनातन परंपरा में पूजा और गर्भगृह की पवित्रता बनाए रखने के लिए उच्छिष्ट या मुंह से छुई गई किसी भी वस्तु को गर्भगृह के मुख्य पूजा स्थल से थोड़ा दूर रखा जाता है।
- ध्वनि का विस्तार: गर्भगृह एक बंद और सीमित स्थान होता है। शंख की तीव्र ध्वनि तरंगें (Acoustic Waves) पूरे मंदिर परिसर और आसपास के वातावरण में फैलकर नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट कर सकें, इसलिए इसे गर्भगृह के मुख्य द्वार या बाहरी परिसर में खड़े होकर बजाने की परंपरा है।
निष्कर्ष
शंख को हड्डी समझकर अशुद्ध मानना वैज्ञानिक और पौराणिक दोनों दृष्टिकोण से गलत है। शंख समुद्र मंथन से निकले 14 रत्नों में से एक है और इसे भगवान विष्णु तथा देवी लक्ष्मी का अत्यंत प्रिय आभूषण माना गया है। इसे बाहर बजाने का कारण हड्डी होना नहीं, बल्कि मुंह से बजाते समय होने वाली जूठन (शुद्धता के नियम) और ध्वनि के प्रसार की व्यवस्था है।
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