भारत में किसानों,अन्य का 1 रुपया भी माफ नहीं जबकि कंपनियों का ₹3.53 लाख करोड़ 43 भारतीय कंपनियों का लोन माफ कर दिया गया ?

यह भारतीय अर्थव्यवस्था में अक्सर बहस का एक बड़ा मुद्दा रहता है। बड़ी कंपनियों के हजारों करोड़ के लोन और एक आम आदमी या किसान के लोन को देखने के नजरिए में जो अंतर दिखाई देता है, वह निराशाजनक लग सकता है। हालांकि, यह कंपनियों के लोन को लेकर एक बहुत बड़ी तकनीकी गलतफहमी है, जिसे बैंकिंग की भाषा में **'लोन राइट-ऑफ' (Write-off)** और **'कर्ज माफी' (Waive-off)** का अंतर कहते हैं। **1. राइट-ऑफ (Write-off) बनाम कर्ज माफी (Waive-off)** * **कंपनियों का राइट-ऑफ (बट्टे खाते में डालना):** जिन 43 कंपनियों या ₹3.53 लाख करोड़ के लोन की आप बात कर रहे हैं, उसे बैंकों ने **'माफ' (Waive-off)** नहीं किया है, बल्कि **'राइट-ऑफ' (Write-off)** किया है। राइट-ऑफ केवल एक अकाउंटिंग प्रक्रिया है। जब बैंक को लगता है कि लोन आसानी से वापस नहीं आ रहा है, तो वे अपनी बैलेंस शीट को साफ दिखाने के लिए उसे हटा देते हैं। **लेकिन**, कर्जदार कंपनी पर कानूनी जिम्मेदारी बनी रहती है। बैंक उनकी संपत्ति कुर्क करने और दिवालिया कानून (IBC) के तहत कंपनी बेचकर पैसा वसूलने की कानूनी प्रक्रिया जारी रखते हैं। * **किसानों या आम आदमी की कर्ज माफी (Waive-off):** कर्ज माफी में सरकार या बैंक आधिकारिक तौर पर लोन को पूरी तरह से माफ कर देते हैं। इसमें कर्ज लेने वाले को कानूनी रूप से कोई पैसा नहीं चुकाना पड़ता और बैंक रिकवरी रोक देते हैं। **2. क्या किसानों का एक भी रुपया माफ नहीं होता?** यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में, कई राज्य सरकारों (जैसे महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, कर्नाटक) ने हजारों करोड़ रुपये की 'किसान कर्ज माफी' योजनाएं लागू की हैं। इन योजनाओं में किसानों का लोन सच में (Waive-off) माफ किया गया है, और इसका पैसा सरकारों ने अपने खजाने (टैक्सपेयर्स के पैसे) से बैंकों को चुकाया है। **3. बड़ी कंपनियों को 'फ्री पास' नहीं मिलता** जब कंपनियों का लोन डिफॉल्ट होता है, तो इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत कंपनियों को नीलाम किया जाता है और प्रमोटर्स (मालिकों) को अपनी कंपनी से हाथ धोना पड़ता है। हालांकि, यह सच है कि कई बार बैंकों को कंपनियों की नीलामी से उनका पूरा पैसा वापस नहीं मिल पाता (रिकवरी रेट 15% से 35% के बीच रहता है)। यही नुकसान आम जनता को अनुचित लगता है, लेकिन इसे तकनीकी रूप से "माफी" नहीं कहा जा सकता। **4. क्या आम नागरिकों को भी कर्ज माफी मिलनी चाहिए?** आपका यह सुझाव बहुत सकारात्मक है कि आम नागरिकों को भी बड़े व्यापारी बनने का मौका मिलना चाहिए। लेकिन सीधे तौर पर 'कर्ज माफी' अर्थव्यवस्था के लिए एक स्थायी उपाय नहीं है। बैंक आम जनता की जमा पूंजी (Deposits) से ही लोन देते हैं। अगर छोटे और रिटेल लोन भी माफ होने लगे, तो बैंकिंग सिस्टम चरमरा जाएगा और लोगों का पैसा डूब सकता है। कर्ज माफ करने के बजाय, सरकारें आम लोगों को एंटरप्राइज बनाने के लिए अन्य तरीकों से मदद करती हैं: * **गारंटी-मुक्त लोन:** मुद्रा योजना (MUDRA), पीएमईजीपी (PMEGP), और स्टैंड-अप इंडिया के तहत बिना गारंटी के बिजनेस लोन दिए जाते हैं। * **सब्सिडी:** सरकार इनमें से कई योजनाओं पर ब्याज में छूट या मूलधन पर सब्सिडी देती है ताकि आम नागरिक अपना काम शुरू कर सकें। बड़ी कंपनियों के डिफॉल्ट बैंकिंग सिस्टम की कमियां जरूर दिखाते हैं, लेकिन उनका कर्ज कानूनी रूप से माफ नहीं होता। क्या आप किसी विशेष सरकारी योजना (जैसे मुद्रा लोन या PMEGP) के बारे में जानना चाहेंगे जो आम नागरिकों को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक मदद देती है?

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