विकासशील देशों के मार्गों में आम आदमी के फुटपाथ की बहुत बुरी व्यवस्था है ?

विकासशील देशों में शहरी नियोजन (Urban Planning) की प्राथमिकता शुरू से ही **'वाहन-केंद्रित' (Vehicle-centric)** रही है, न कि **'पैदल यात्री-केंद्रित' (Pedestrian-centric)**। इसी वजह से बड़े शहरों में भी फुटपाथ या तो गायब हैं या आम आदमी के चलने लायक नहीं बचे हैं। यह केवल बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की कमी नहीं है, बल्कि प्रशासनिक और सामाजिक प्रबंधन की भी एक बड़ी चुनौती है। ### फुटपाथ की बदहाली के मुख्य कारण * **अतिक्रमण (Encroachments):** फुटपाथों का इस्तेमाल अक्सर रेहड़ी-पटरी वालों (Hawkers), दुकानों के सामान को बाहर फैलाने, और निजी वाहनों की अनधिकृत पार्किंग के लिए होता है। * **इंजीनियरिंग और डिजाइन में कमियां:** फुटपाथ अक्सर टूटे-फूटे होते हैं, बीच में बिजली के खंभे, पेड़ या कचरे के डिब्बे आ जाते हैं। कई जगह इनकी ऊंचाई इतनी अधिक होती है कि बुजुर्गों और बच्चों के लिए चढ़ना मुश्किल होता है। * **सड़कों का चौड़ीकरण (Road Widening):** बढ़ते ट्रैफिक को संभालने के लिए सरकारें अक्सर फुटपाथ की चौड़ाई काटकर गाड़ियों के लिए अतिरिक्त लेन बना देती हैं। * **अवैध पार्किंग:** ट्रैफिक पुलिस और नागरिक निकायों की ढिलाई के कारण दोपहिया और चार पहिया वाहन बेझिझक फुटपाथ पर खड़े कर दिए जाते हैं। ### इसके गंभीर प्रभाव | क्षेत्र | प्रभाव | |---|---| | **सुरक्षा (Safety)** | पैदल यात्रियों को व्यस्त सड़कों पर चलने को मजबूर होना पड़ता है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं और मौतों का खतरा बढ़ जाता है। | | **सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health)** | पैदल चलने के लिए सुरक्षित जगह न होने से लोग छोटी दूरी के लिए भी गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे शारीरिक निष्क्रियता बढ़ती है। | | **पर्यावरण (Environment)** | पैदल और साइकिल से चलने का विकल्प न होने के कारण निजी वाहनों का प्रयोग बढ़ता है, जिससे वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि होती है। | | **आर्थिक व सामाजिक असमानता** | जो लोग गाड़ी का खर्च नहीं उठा सकते (गरीब और मध्यम वर्ग), उनके बुनियादी अधिकार—'सुरक्षित आवाजाही'—का हनन होता है। | ### संभावित समाधान और सुधार की दिशा * **नेशनल अर्बन ट्रांसपोर्ट पॉलिसी (NUTP) का सख्ती से पालन:** 'पेडेस्ट्रियन-फर्स्ट' (पहले पैदल यात्री) की नीति अपनाना, जैसा कि कई विकसित यूरोपीय शहरों (जैसे एम्स्टर्डम या कोपेनहेगन) में है। * **स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट का पारदर्शी क्रियान्वयन:** रेहड़ी-पटरी वालों के लिए अलग से **'वेंडिंग ज़ोन'** बनाए जाएं ताकि वे अपनी आजीविका भी कमा सकें और फुटपाथ भी खाली रहें। * **सतत इंफ्रास्ट्रक्चर (Walkable Infrastructure):** निरंतर (continuous), समतल और रैंप-युक्त फुटपाथ का निर्माण, जिससे दिव्यांगों और बुजुर्गों को भी सुविधा हो। * **सख्त दंड और निगरानी:** फुटपाथ पर वाहन चलाने या पार्क करने वालों पर भारी जुर्माना और सीसीटीवी/एनफोर्समेंट टीमों द्वारा लगातार निगरानी। जब तक शहरों को केवल "गाड़ियों के दौड़ने की जगह" के बजाय "लोगों के रहने और चलने की जगह" के रूप में नहीं देखा जाएगा, तब तक आम आदमी का फुटपाथ पर अधिकार सुरक्षित होना मुश्किल है।

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