मध्य एशिया (Central Asia) की जिन जातियों को प्राचीन ग्रंथों में **'बर्बर'(Barbaric) या 'यायावर' (Nomadic Tribes)** कहा गया है, मानवशास्त्र और इतिहास की दृष्टि से वे मूलतः कबीलाई/आदिवासी समाज ही थे।
वे किसी संगठित राज्य व्यवस्था से नहीं आए थे, बल्कि चारागाहों और संसाधनों की तलाश में घूमते-घूमते भारत पहुँचे और कालांतर में यहीं के समाज और धर्म (बौद्ध व हिंदू धर्म) में पूरी तरह रच-बस गए।
### भारत पर शासन करने वाली प्रमुख सेंट्रल एशियन (बर्बर/कबीलाई) जातियाँ
1. **शक (Sakas / Scythians):** मध्य एशिया के स्टेपीज क्षेत्र के खानाबदोश कबीले। इन्होंने 1ली शताब्दी ईसा पूर्व से उत्तर-पश्चिम, गुजरात, मालवा और पंजाब पर शासन किया। (प्रसिद्ध शासक: रुद्रदामन प्रथम)।
2. **कुषाण (Kushanas):** मध्य एशिया और चीन के सीमावर्ती क्षेत्र के **'यू-ची' (Yuezhi)** कबीले से संबंधित थे। इन्होंने उत्तर भारत से लेकर गांधार तक एक विशाल साम्राज्य स्थापित किया। (प्रसिद्ध शासक: कनिष्क)।
3. **हूण (Hunas):** मध्य एशिया के उग्र यायावर कबीले थे। 5वीं-6ठी शताब्दी ईस्वी में इन्होंने भारत पर आक्रमण कर पंजाब, राजस्थान और मध्य भारत पर अधिकार किया। (प्रसिद्ध शासक: तोरमाण और मिहिरकुल)।
4. **गुर्जर-प्रतिहार:** कई इतिहासकारों के अनुसार, हूणों के साथ भारत आए मध्य एशियाई कबीलों का समूह था, जो बाद में भारतीय सामाजिक व्यवस्था का हिस्सा बने।
### क्या 'खस' जाति भी इनमें ही मानी जाती है?
**हाँ, खस (Khasas) भी इसी मध्य एशियाई कबीलाई प्रवास का हिस्सा माने जाते हैं।**
* **उत्पत्ति व प्रवास:** इतिहासकार और भाषाविद (जैसे डॉ. डी. डी. शर्मा और सी. ए. एटकिंसन) खसों का मूल संबंध कॉकेसस पर्वत (Caucasus Mountain Range) और मध्य एशिया से मानते हैं। कैस्पियन सागर के नाम की उत्पत्ति भी इसी कबीले (कस्सी/खश) से जुड़ी बताई जाती है।
* **भारत में प्रवेश:** वैदिक आर्यों के प्रवास के आसपास या उनसे थोड़ा पहले/बाद खस कबीले मध्य एशिया से अफगानिस्तान, कश्मीर होते हुए पूरे हिमालयी क्षेत्र (हिमाचल, उत्तराखंड, नेपाल) में फैले।
* **शासनकाल:** प्राचीन महाभारत काल से लेकर मध्यकाल तक पूरे मध्य हिमालय पर खसों का मजबूत शासन रहा। नेपाल के मध्यकालीन 'खस-मल्ल राज्य' (Khasa Kingdom) और उत्तराखंड-हिमाचल के स्थानीय शासन में खसों की प्रमुख भूमिका थी।
* **सामाजिक स्थिति:** प्राचीन संस्कृत साहित्य में खसों को भी शकों और हूणों की तरह 'म्लेच्छ' या क्षत्रिय धर्म से च्युत (ब्रात्य क्षत्रिय) वर्ग में रखा गया था, क्योंकि वे वैदिक कर्मकांडों से दूर अपनी कबीलाई संस्कृति (जैसे महासू देवता की पूजा, नाग पूजा) का पालन करते थे। वर्तमान में जौनसार-बाबर, हिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों तथा नेपाल की एक बड़ी आबादी (राजपूत व अन्य जातियाँ) इन्हीं खस जनजातियों के वंशज माने जाते हैं।
सार यह है कि शक, कुषाण, हूण और खस—ये सभी मध्य एशियाई यायावर जनजातियों (Tribes) का ही हिस्सा थे, जिन्होंने अलग-अलग समय में भारत में प्रवेश कर अपने राज्य स्थापित किए।
यह वीडियो आपको मध्य एशियाई कबीलों से निकले खस समुदाय के समृद्ध इतिहास और उनके हिमालय में बसने की पूरी कहानी को विस्तार से समझने में मदद करेगा: हिमालय के खस - ऐतिहासिक वृत्तचित्र
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