आबादी होते हुए भी आदिवासी जौनसार क्षेत्र और पश्चिम देहरादून क्षेत्र में विशेषज्ञ चिकित्सकों का हे आकाल ?

विकासनगर, सहसपुर, कालसी, चकराता और त्यूणी जैसे आदिवासी बहुल जौनसार-बाबर और पश्चिमी देहरादून के इलाकों में बढ़ती आबादी के बावजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों (Specialist Doctors) की भारी कमी एक गंभीर और पुरानी समस्या बनी हुई है। इस भौगोलिक और सीमांत क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और डॉक्टरों की कमी के मुख्य कारण तथा इसके प्रभाव निम्नलिखित हैं: ### विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के मुख्य कारण * **पहाड़ी व दूरस्थ क्षेत्रों में तैनाती से हिचकिचाहट:** कई विशेषज्ञ डॉक्टर (जैसे स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, सर्जन, और ऑर्थोपेडिक) दुर्गम या अर्ध-पहाड़ी क्षेत्रों में पोस्टिंग लेने से कतराते हैं। * **उपकरणों और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी:** कालसी, चकराता या उप-जिला अस्पताल विकासनगर में कई बार आधुनिक चिकित्सा उपकरण (जैसे वेंटिलेटर, आईसीयू, या सीटी स्कैन) या तो उपलब्ध नहीं होते या उन्हें चलाने वाले तकनीशियन (Technicians) नहीं होते। * **संविदा व डॉक्टरों का पलायन:** सरकारी अस्पतालों में तैनात डॉक्टर अक्सर बेहतर सुविधाओं और उच्च वेतन के लिए निजी क्षेत्र या बड़े शहरों (देहरादून/ऋषिकेश) का रुख कर लेते हैं। ### स्थानीय आबादी पर इसका असर * **देहरादून या पीजीआई पर निर्भरता:** सामान्य प्रसव (Delivery) में जटिलता, सड़क हादसे (जैसे शक्ति नहर या पहाड़ी रास्तों के हादसे) या दिल का दौरा पड़ने पर मरीजों को 50 से 100 किमी दूर **दून मेडिकल कॉलेज** या **AIIMS ऋषिकेश** रेफर करना पड़ता है। * **गोल्डन आवर (Golden Hour) का नुकसान:** गंभीर हादसों या आपातकालीन स्थितियों में समय पर इलाज न मिलने के कारण मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। * **निजी अस्पतालों का आर्थिक बोझ:** ग्रामीण और आदिवासी आबादी को मजबूरी में महंगे निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है, जिससे उन पर भारी वित्तीय दबाव पड़ता है। ### संभावित और आवश्यक समाधान * **अनिवार्य पर्वतीय सेवा नीति का कड़ाई से पालन:** मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों के लिए बॉन्ड नीति के तहत दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएं देना अनिवार्य किया जाए। * **इंसेंटिव और आवासीय सुविधा:** दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में तैनात विशेषज्ञ डॉक्टरों को विशेष वित्तीय प्रोत्साहन (Special Hill Allowance) और बेहतर आवासीय सुविधाएं दी जाएं। * **टेली-मेडिसिन और मोबाइल मेडिकल यूनिट:** जब तक स्थायी डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं होती, तब तक एम्स या दून अस्पताल के विशेषज्ञों के साथ **Tele-Consultation** और अत्याधुनिक एम्बुलेंस सेवाओं को मजबूत किया जाए। जौनसार-बाबर और पश्चिमी देहरादून की विशाल जनजातीय आबादी को उनके द्वार पर बुनियादी और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सुविधाएं मिलना उनका अधिकार है, जिस पर राज्य स्वास्थ्य विभाग को प्राथमिकता से ध्यान देने की आवश्यकता है।

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