- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
कभी शुद्ध हवा, ताजे पानी, जैविक खान-पान और कड़ी शारीरिक मेहनत के लिए जाने जाने वाले **पहाड़ अब लाइफस्टाइल (गैर-संचारी) बीमारियों—जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, थायराइड, मोटापा और दिल की बीमारियों (Cardiovascular Diseases)** की चपेट में तेजी से आ रहे हैं।
उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी राज्यों से आ रहे हालिया स्वास्थ्य आंकड़े (जैसे NFHS-6 की रिपोर्ट) यह साफ दर्शाते हैं कि पहाड़ों पर अब ये बीमारियां 'साइलेंट किलर' बन चुकी हैं।
### पहाड़ों पर लाइफस्टाइल बीमारियां फैलने के मुख्य कारण
#### 1. खान-पान में 'पैकेट बंद' और 'फास्ट फूड' का आक्रमण
* **पारंपरिक भोजन का छूटना:** पहाड़ों का पारंपरिक पौष्टिक आहार—जैसे कोदा/मडुआ (रागी), झंगोरा, गहत की दाल और स्थानीय हरी सब्जियां—अब थाली से गायब हो रही हैं।
* **मैगी और मोमो कल्चर:** सुदूर पहाड़ी गांवों तक अब ताजी सब्जियों की जगह मैगी, मोमो, चाउमीन, चिप्स और कोल्ड ड्रिंक्स ने ले ली है। रिफाइंड तेल, अत्यधिक नमक और चीनी का सेवन पहाड़ों में तेजी से बढ़ा है।
#### 2. शारीरिक श्रम में भारी कमी (Physical Inactivity)
* **सड़कों का जाल और वाहनों पर निर्भरता:** पहले पहाड़ी लोगों को पानी लाने, लकड़ी काटने या बाजार जाने के लिए कई किलोमीटर पैदल चढ़ाई चढ़नी पड़ती थी, जो अनजाने में ही उनका बेहतरीन वर्कआउट (व्यायाम) हो जाता था।
* **मशीनीकरण:** अब गांव-गांव तक सड़कें पहुंचने और दोपहिया वाहनों/गाड़ियों के आने से पैदल चलना बहुत कम हो गया है। खेती-बाड़ी कम होने से भी शारीरिक सक्रियता घटी है।
#### 3. बढ़ता मानसिक तनाव और पलायन का दर्द
* **आर्थिक अनिश्चितता:** पहाड़ों में रोजगार की कमी और कृषि पर संकट के कारण युवा मानसिक तनाव से जूझ रहे हैं।
* **अकेलापन:** युवाओं के पलायन के बाद गांवों में केवल बुजुर्ग रह गए हैं। अकेलेपन और अपनों से दूर होने का अवसाद (Depression) उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य (विशेषकर ब्लड प्रेशर) को बिगाड़ रहा है।
#### 4. शराब और तंबाकू का बढ़ता सेवन
* अत्यधिक ठंड के बहाने या बदलते सामाजिक परिवेश के कारण पहाड़ों में शराब और बीड़ी/सिगरेट का चलन बढ़ा है, जो सीधे तौर पर लिवर की बीमारियों, कैंसर और हार्ट अटैक को बुलावा दे रहा है।
### स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने नई चुनौती
पहाड़ों पर पहले से ही बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। ऐसे में इन पुरानी और लंबे समय तक चलने वाली (Chronic) बीमारियों का बढ़ना संकट को दोगुना कर देता है:
* **जांच सुविधाओं का अभाव:** गांवों में शुगर या बीपी की नियमित जांच की सुविधा न होने से लोगों को बीमारी का पता तब चलता है जब स्थिति गंभीर (जैसे लकवा मारना या हार्ट अटैक आना) हो जाती है।
* **महंगा इलाज:** इन बीमारियों की दवाइयां जीवनभर खानी पड़ती हैं, जिससे गरीब पहाड़ी परिवारों पर आर्थिक बोझ बहुत बढ़ गया है।
> **समाधान की राह:** पहाड़ों को इस संकट से बचाने के लिए **"बैक टू रूट्स" (जड़ों की ओर लौटना)** अभियान की जरूरत है। स्थानीय मोटे अनाजों (Millets) को बढ़ावा देना, पैकेज्ड फूड पर निर्भरता कम करना और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) पर ही वेलनेस सेंटर खोलकर बीपी-शुगर की मुफ्त जांच और दवाइयां उपलब्ध कराना अब बेहद जरूरी हो गया है।
>
क्या आपके आस-पास या परिवार में भी पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसी बीमारियों के मामले बढ़ते हुए देखे गए हैं?
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
टिप्पणियाँ