किया भारत में मुस्लिम भी आदिवासी होते हे ?

भारत में कुछ मुस्लिम भी आदिवासी (Scheduled Tribes या ST) समुदाय के अंतर्गत आते हैं।** यह समझना ज़रूरी है कि "आदिवासी" पहचान मूल रूप से एक सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान है, न कि कोई धार्मिक पहचान। जब देश में आदिवासियों की सूची बनाई गई, तो उसका आधार उनकी विशिष्ट संस्कृति, भौगोलिक अलगाव और पिछड़ापन था, न कि धर्म। इसलिए भारत में हिंदू, ईसाई, मुस्लिम और बौद्ध—सभी धर्मों को मानने वाले आदिवासी मौजूद हैं। इनकी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को हम कुछ मुख्य बिंदुओं में समझ सकते हैं: ### 1. भारत के प्रमुख मुस्लिम आदिवासी समुदाय भारत में ऐसे कई अधिसूचित आदिवासी (ST) समूह हैं जो मुख्य रूप से इस्लाम धर्म का पालन करते हैं। जैसे: * **लक्षद्वीप के आदिवासी:** लक्षद्वीप की लगभग पूरी मूल आबादी (जैसे कि कोया, मल्पमी, मेलाचेरी आदि) कानूनन अनुसूचित जनजाति (ST) में आती है और यह पूरी तरह से मुस्लिम आबादी है। * **जम्मू-कश्मीर के गुज्जर और बकरवाल:** ये हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले खानाबदोश (Nomadic) समुदाय हैं, जो मुख्य रूप से इस्लाम को मानते हैं और इन्हें ST का दर्जा प्राप्त है। * **कारगिल (लद्दाख) के पुरिगपा और बलती:** ये समुदाय भी मुस्लिम हैं और अनुसूचित जनजाति के अंतर्गत आते हैं। * **गुजरात के सिद्दी (Siddi):** मूल रूप से अफ्रीकी मूल के ये लोग सदियों पहले भारत आए थे। गुजरात में रहने वाले सिद्दी समुदाय के अधिकांश लोग मुस्लिम हैं और वे आदिवासी सूची में शामिल हैं। ### 2. ये किस धार्मिक परंपरा को मानते हैं? (क्या यह मिक्स है?) इन समुदायों की धार्मिक परंपराएँ अक्सर **इस्लाम और उनकी पारंपरिक आदिवासी संस्कृति का एक खूबसूरत मिश्रण (मिक्स रूप)** होती हैं। इसे आप इस तरह समझ सकते हैं: * **इस्लामिक पहचान:** ये समुदाय मुख्य रूप से इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों (जैसे नमाज़, रोज़ा, ईद मनाना) का पालन करते हैं। * **पारंपरिक और आदिवासी रीतियाँ (सिंक्रीटिज़्म/मिक्स परंपरा):** इस्लाम अपनाने के बावजूद, इन समुदायों ने अपनी सदियों पुरानी आदिवासी पहचान, लोकगीत, नृत्य, पहनावा और कबीलाई कानूनों (Tribal Customary Laws) को नहीं छोड़ा है। > **उदाहरण के लिए:** > * **सिद्दी समुदाय** मुस्लिम होने के साथ-साथ अपना पारंपरिक अफ्रीकी मूल का नृत्य **'धमाल'** करते हैं और अपने स्थानीय सूफी संतों (जैसे बाबागोर) की पूजा करते हैं, जिसमें उनकी पुरानी कबीलाई परंपराओं की झलक मिलती है। > * **गुज्जर-बकरवाल** समुदाय के लोग शादियों और सामाजिक फैसलों में आज भी अपने कबीलाई रीति-रिवाजों और 'जिरगा' (कबीलाई पंचायत) को तरजीह देते हैं, जो कि पारंपरिक शरिया से थोड़ी अलग हो सकती है। > * **लक्षद्वीप के मुस्लिम** आज भी अपनी पुरानी मातृसत्तात्मक (Matrilineal) व्यवस्था का पालन करते हैं, जहाँ संपत्ति और परिवार का नाम माँ की तरफ से चलता है, जो कि पारंपरिक इस्लामिक समाजों में आमतौर पर नहीं देखा जाता। > संक्षेप में कहें तो, ये पूरी तरह से मुस्लिम भी हैं और गर्व से अपनी आदिवासी विरासत और परंपराओं को भी जीते हैं। क्या आप भारत के किसी खास राज्य या विशिष्ट आदिवासी समुदाय के बारे में और विस्तार से जानना चाहते हैं?

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