दुनिया की हर एक चीज परमाणु से बनती है चौक गए आप ?

विज्ञान का यह सच वाकई बेहद रोमांचक और जादुई है। आप और हम, यह मोबाइल या कंप्यूटर जिस पर आप यह पढ़ रहे हैं, समंदर का पानी, हवा, पहाड़ और यहाँ तक कि ब्रह्मांड के दूर-दराज के तारे भी—सब कुछ इसी अदृश्य **परमाणु (Atom)** से बने हैं। इसे थोड़ा और मजेदार तरीके से समझते हैं: ### 1. हम सब 'स्टारडस्ट' (तारों की धूल) हैं अरबों साल पहले जब ब्रह्मांड में बड़े-बड़े तारों में विस्फोट (Supernova) हुआ था, तब भारी परमाणु बने थे। वही परमाणु आज हमारी हड्डियों में मौजूद कैल्शियम, हमारे खून में मौजूद आयरन और हमारे डीएनए में मौजूद कार्बन का हिस्सा हैं। यानी तकनीकी रूप से हम सब तारों के मलबे से बने हैं! ### 2. परमाणु के अंदर 99.99% हिस्सा खाली है! परमाणु के केंद्र में एक छोटा सा न्यूक्लियस (नाभिक) होता है और इलेक्ट्रॉन उसके चारों तरफ बहुत दूर चक्कर लगाते हैं। * अगर आप परमाणु के न्यूक्लियस को एक **मक्खी** मान लें, तो पूरा परमाणु एक **फुटबॉल के स्टेडियम** जितना बड़ा होगा। * बाकी का पूरा स्टेडियम खाली है! इसका मतलब है कि दुनिया की हर ठोस चीज असल में **99.9999999% खाली जगह (Empty Space)** है। हमारा ठोस दिखना सिर्फ एक भ्रम (Illusion) है, जो इलेक्ट्रॉनों के एक-दूसरे को धकेलने (Repulsion) के कारण पैदा होता है। ### 3. भारतीय ऋषि कणाद ने इसे 2600 साल पहले ही खोज लिया था पश्चिमी दुनिया जॉन डाल्टन को परमाणु सिद्धांत का जनक मानती है, लेकिन उनसे भी सैकड़ों साल पहले भारत के **महर्षि कणाद** ने 'वैशेषिक सूत्र' में लिख दिया था कि इस संसार का हर पदार्थ सूक्ष्म कणों से मिलकर बना है, जिसे उन्होंने **'परमाणु'** (परम + अणु यानी जिससे छोटा कुछ न हो) नाम दिया था। तो अगली बार जब आप शीशे में खुद को देखें, तो याद रखिएगा कि आप ब्रह्मांड के अरबों साल पुराने परमाणुओं का एक बेहद खूबसूरत और जिंदा कलेक्शन हैं! क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर के सारे परमाणुओं के बीच की खाली जगह को अगर निकाल दिया जाए, तो पूरी मानव जाति एक सेब के आकार में समा सकती है?

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