भारत में 1950 से 2026 तक करीब 93,000 तालाब सुख चुके हे और कैसे तालाब या भूमि जलस्तर अछा बनाया जा सके?

भारत जैसे कृषि-प्रधान देश में तालाबों का सूखना और भूजल स्तर (Groundwater Level) का लगातार गिरना हमारे भविष्य के जल संकट की ओर इशारा करता है। 1950 से अब तक इतने बड़े पैमाने पर तालाबों का लुप्त होना शहरीकरण, अतिक्रमण (Encroachment) और देखरेख की कमी का नतीजा है। भूमि के जलस्तर को सुधारने और तालाबों को पुनर्जीवित करने के लिए **सरकारी, सामाजिक और व्यक्तिगत स्तर** पर निम्नलिखित प्रयास किए जा सकते हैं: ## 1. तालाबों का जीर्णोद्धार (Restoration of Ponds) * **गाद निकालना (Desilting):** सालों से तालाबों में जमा हुई मिट्टी और गाद के कारण उनकी पानी सोखने की क्षमता खत्म हो जाती है। गर्मियों के मौसम में तालाबों की खुदाई करके गाद निकालने से उनकी जल भंडारण क्षमता कई गुना बढ़ जाती है। * **अतिक्रमण हटाना:** बहुत से पारंपरिक तालाबों पर अवैध निर्माण या खेती कर ली गई है। इन्हें कानूनी रूप से मुक्त कराना सबसे पहला कदम होना चाहिए। * **इनलेट और आउटलेट की सफाई:** तालाबों में बारिश का पानी लाने वाले रास्तों (Inlets) को साफ रखना जरूरी है ताकि बारिश का पानी सीधे तालाब में पहुंचे, न कि नालियों में बह जाए। ## 2. भूजल स्तर (Groundwater) बढ़ाने के उपाय भूजल को रिचार्ज करने के लिए प्रकृति पर निर्भर रहने के साथ-साथ कृत्रिम तरीकों (Artificial Recharge) को अपनाना होगा: * **रेनवाटर हार्वेस्टिंग (Rainwater Harvesting):** शहरों और गांवों में हर घर की छत पर वर्षा जल संचयन प्रणाली अनिवार्य होनी चाहिए। छत के पानी को पाइप के जरिए सीधे जमीन के अंदर (Recharge Pit में) उतारा जाता है, जिससे भूजल का स्तर तुरंत सुधरता है। * **चेक डैम और बोरी-बंधान:** छोटे नालों और बरसाती नदियों पर पत्थरों या बोरियों की मदद से छोटे-छोटे बांध (Check Dams) बनाए जाने चाहिए। इससे पानी का बहाव धीमा होता है और पानी को जमीन में रिसने का समय मिलता है। * **सोख्ता गड्ढे (Soak Pits):** गांवों में हैंडपंप या कुओं के पास सोख्ता गड्ढे बनाए जाने चाहिए ताकि व्यर्थ बहने वाला पानी वापस जमीन के अंदर जा सके। ## 3. कृषि पद्धतियों में बदलाव भारत में लगभग **80-85% भूजल का उपयोग खेती में** होता है। इसलिए सिंचाई के तरीकों को बदलना सबसे प्रभावी उपाय है: * **टपकन सिंचाई (Drip Irrigation) और फव्वारा (Sprinkler) प्रणाली:** इन तकनीकों से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचता है, जिससे 50% तक पानी की बचत होती है। * **कम पानी वाली फसलें:** जिन इलाकों में जलस्तर बहुत नीचे चला गया है, वहां धान (चावल) और गन्ने जैसी ज्यादा पानी सोखने वाली फसलों की जगह बाजरा, रागी, दालें और तिलहन उगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। ## 4. वनस्पति और वृक्षारोपण (Afforestation) * **तालाबों के किनारे पेड़ लगाना:** तालाब के चारों तरफ पीपल, बरगद, नीम और जामुन जैसे स्थानीय पेड़ लगाने चाहिए। पेड़ों की जड़ें मिट्टी को बांधकर रखती हैं, जिससे तालाब में मिट्टी नहीं भरती, और वे पानी को जमीन के अंदर सोखने में मदद करती हैं। * **यूकेलिप्टस (सफेदा) के पेड़ों पर रोक:** यह पेड़ जमीन का बहुत अधिक पानी सोखता है, इसलिए जलाशयों के आसपास इसे लगाने से बचना चाहिए। ## 5. जनभागीदारी और आधुनिक तकनीक * **'जल मित्र' या ग्राम जल समितियां:** जब तक स्थानीय लोग तालाबों को अपनी संपत्ति नहीं मानेंगे, तब तक उनका संरक्षण मुश्किल है। ग्रामीणों की समितियां बनाकर तालाबों की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। * **जियो-टैगिंग (Geo-tagging):** सरकार द्वारा सभी मौजूदा और सूखे हुए तालाबों की सैटेलाइट मैपिंग (Geo-tagging) की जानी चाहिए ताकि कोई उन पर कब्जा न कर सके। > **एक अच्छी पहल:** भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही **"अमृत सरोवर योजना"** के तहत देश के हर जिले में कम से कम 75 तालाबों को पुनर्जीवित या नए सिरे से विकसित किया जा रहा है। ऐसी योजनाओं में स्थानीय नागरिकों को बढ़-चढ़कर श्रमदान करना चाहिए। > क्या आपके आस-पास भी कोई ऐसा पारंपरिक तालाब या कुआं है जिसे बचाने या साफ करने की जरूरत है?

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