इंद्र का पद और बृहस्पति की चाल इंद्र ने रजी के पुत्र से पराजित होने के बाद ?

यह प्रसंग पौराणिक इतिहास (विशेषकर **विष्णु पुराण**, **मत्स्य पुराण** और **महाभारत**) की एक बेहद अनूठी और रोचक कथा से जुड़ा है। जब राजा रजी के पुत्रों ने इंद्र को पराजित कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था, तब देवगुरु बृहस्पति ने एक बहुत ही चतुर और सूक्ष्म 'चाल' चली थी। आइए समझते हैं कि इंद्र के पराजित होने के बाद देवगुरु बृहस्पति की वह चाल क्या थी और उसने कैसे पासा पलट दिया: ### पृष्ठभूमि: राजा रजी और उनके पुत्रों का स्वर्ग पर राज देवासुर संग्राम में राजा रजी ने देवताओं की मदद की थी और असुरों को पराजित किया था। ब्रह्मा जी के वरदान और अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार, राजा रजी को स्वर्ग का राजा (इंद्र का पद) मिला। जब तक राजा रजी जीवित रहे, इंद्र उनके सेवक बनकर रहे। रजी की मृत्यु के बाद, उनके **सौ पराक्रमी पुत्रों** ने इंद्र से उनका पद और स्वर्ग का राज्य वापस मांगने पर मना कर दिया और इंद्र को युद्ध में हरा कर भगा दिया। इंद्र पूरी तरह शक्तिहीन होकर भटकने लगे। ### बृहस्पति की 'चाल': बुद्धि और अधर्म का जाल जब इंद्र अत्यंत निराश होकर अपने गुरु बृहस्पति के पास पहुंचे, तो बृहस्पति ने सीधे युद्ध करने के बजाय **नीति और बुद्धि (Psychological Warfare)** का उपयोग करने का निर्णय लिया। उन्होंने इंद्र से कहा, *"चिंता मत करो, मैं रजी के पुत्रों की बुद्धि भ्रष्ट कर दूंगा, जिससे उनकी शक्ति आधी रह जाएगी।"* बृहस्पति ने निम्नलिखित चाल चली: * **भ्रमित करने वाले दर्शन (Heresy) की शुरुआत:** बृहस्पति भेष बदलकर रजी के पुत्रों के पास गए। उन्होंने उनके सामने एक ऐसे नए और लुभावने शास्त्र (धर्म) की रचना की, जो वेदों के विरुद्ध था। (कुछ पुराणों में इसे जिन धर्म या नास्तिक दर्शन की शुरुआत माना गया है)। * **बुद्धि और आचरण का भ्रष्ट होना:** बृहस्पति ने उन्हें उपदेश दिया कि यज्ञ, तप और देवताओं की पूजा करने की कोई आवश्यकता नहीं है। भोग-विलास ही सब कुछ है। रजी के पुत्र देवगुरु के इस मायावी उपदेश के जाल में फंस गए। * **धर्म से विमुख होना:** इसके परिणामस्वरूप, रजी के पुत्रों ने वेदों का मार्ग छोड़ दिया, ब्राह्मणों का अपमान करने लगे और अधर्म के रास्ते पर चल पड़े। ### परिणाम: इंद्र की वापसी जैसे ही रजी के पुत्रों ने धर्म का मार्ग छोड़ा, उनकी आत्मिक शक्ति, तेज और सुरक्षा कवच नष्ट हो गया। जो मनुष्य या राजा अधर्म पर चल पड़ता है, उसका पतन निश्चित हो जाता है। जब बृहस्पति ने देखा कि वे पूरी तरह शक्तिहीन और विवेकहीन हो चुके हैं, तब उन्होंने इंद्र को उन पर आक्रमण करने को कहा। इस बार **इंद्र ने आसानी से रजी के पुत्रों को पराजित कर दिया** और अपना खोया हुआ इंद्र पद और स्वर्ग का राजपाठ वापस पा लिया। > **निष्कर्ष:** यह कथा सीधे तौर पर आपके पिछले विचार से जुड़ती है। रजी के पुत्र शक्तिशाली थे, लेकिन जैसे ही बृहस्पति की चाल के कारण वे **'धर्म'** से विमुख हुए, उनका दीर्घकालिक राजपाठ, समृद्धि और सुरक्षा सब कुछ नष्ट हो गया। >

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