भारत में एनडीए के लिए मानसून सत्र में महिला आरक्षण,परिसीमन विधेयक के लिये नए समीकरण बन रहे हैं ?

भारत में इस समय **महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill 2026)** को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां बेहद तेज हैं। सरकार आगामी मानसून सत्र में इसे दोबारा लाने की तैयारी कर रही है, क्योंकि अप्रैल 2026 में यह विधेयक लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई (2/3) बहुमत न मिलने के कारण पारित नहीं हो पाया था (NDA को 278 वोट मिले थे, जबकि विरोध में 211 वोट पड़े थे)। इस बीच विपक्षी खेमे (INDIA गठबंधन) में आ रहे बदलावों और कुछ क्षेत्रीय पार्टियों के भीतर आंतरिक असंतोष के कारण लोकसभा में नए समीकरण बनते दिख रहे हैं। आइए समझते हैं कि यह पूरा मामला क्या है और विपक्षी सांसदों के रुख को लेकर क्या कयास लगाए जा रहे हैं: ## 1. क्या है यह पूरा मामला? (विधेयक के मुख्य बिंदु) केंद्र सरकार ने **131वां संविधान संशोधन विधेयक, 2026** और **परिसीमन विधेयक, 2026** पेश किया है, जिसके तहत दो बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं: * **लोकसभा सीटों का विस्तार:** लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर **850** करने का प्रस्ताव है। * **महिला आरक्षण को तुरंत लागू करना:** 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (33% महिला आरक्षण) को 2029 के लोकसभा चुनावों से ही लागू करने के लिए सरकार ने इसे 2011 की जनगणना के आधार पर होने वाले नए परिसीमन से जोड़ दिया है। पहले के नियम के मुताबिक इसके लिए 2027 की जनगणना के नतीजों का इंतजार करना पड़ता, जिससे महिला आरक्षण 2030 के दशक के मध्य तक टल जाता। ## 2. विपक्ष क्यों कर रहा है इसका विरोध? मुख्य विपक्षी दल और विशेषकर दक्षिण भारत की पार्टियां इसके दो मुख्य कारणों से खिलाफ हैं: * **उत्तर बनाम दक्षिण का विवाद:** 2011 की जनगणना के आधार पर सीटें बढ़ने से उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे अधिक आबादी वाले राज्यों की लोकसभा सीटें बहुत ज्यादा बढ़ जाएंगी। वहीं, तमिलनाडु, केरल जैसे दक्षिणी राज्यों (जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण बेहतरीन तरीके से किया) का प्रतिनिधित्व अनुपात में कम हो जाएगा। * **राजनीतिक चिंताएं:** विपक्ष का आरोप है कि सरकार यह कदम 2029 के चुनावों में चुनावी बढ़त हासिल करने के लिए उठा रही है। ## 3. क्या TMC, AAP, शरद पवार गुट और DMK के सांसद NDA को समर्थन दे सकते हैं? राजनीतिक गलियारों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विपक्षी दलों के भीतर टूट, गठबंधन से अलगाव और सांसदों के असंतोष की वजह से कुछ नए समीकरण बन रहे हैं: ### * द्रमुक (DMK - तमिलनाडु) तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद DMK ने INDIA गठबंधन से दूरी बना ली है। हालांकि, DMK के सांसदों द्वारा इस विधेयक पर NDA को सीधे समर्थन देने की संभावना बेहद कम है। DMK नेता ए. राजा ने साफ किया है कि पार्टी **"सिद्धांत तौर पर इस परिसीमन विधेयक के मौजूदा स्वरूप के खिलाफ है"** क्योंकि यह जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को सजा देने जैसा है। लेकिन गठबंधन से बाहर होने के कारण विपक्षी एकता कमजोर जरूर हुई है। ### * आम आदमी पार्टी (AAP) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) सूत्रों और मीडिया कयासों के मुताबिक, इन पार्टियों के कुछ सांसद अपनी केंद्रीय लीडरशिप या कांग्रेस के साथ गठबंधन की राजनीति से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। महिला आरक्षण एक ऐसा संवेदनशील और लोकप्रिय मुद्दा है जिसका सीधे विरोध करना किसी भी सांसद के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है। चर्चाएं हैं कि इन पार्टियों के असंतुष्ट सांसद या तो गुप्त रूप से सरकार के पक्ष में मतदान कर सकते हैं, या फिर वोटिंग के समय सदन से अनुपस्थित (Abstain) रहकर परोक्ष रूप से NDA की राह आसान कर सकते हैं। ### * राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) महाराष्ट्र की राजनीति में लगातार उठापटक जारी है। ऐसी भी अटकलें सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चली हैं कि शरद पवार गुट के कुछ सांसद पाला बदलकर अजित पवार गुट या NDA के पाले में जा सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो सरकार को संसद में दो-तिहाई बहुमत जुटाने में बड़ी मदद मिलेगी। ## निष्कर्ष चूंकि इस संविधान संशोधन को पास कराने के लिए सरकार को **दो-तिहाई विशेष बहुमत** की जरूरत है, इसलिए सरकार विपक्ष में सेंध लगाने या असंतुष्ट सांसदों को साधने की पूरी कोशिश कर रही है। मानसून सत्र में यदि इन क्षेत्रीय दलों के असंतुष्ट सांसद क्रॉस-वोटिंग करते हैं या वॉकआउट कर जाते हैं, तो मोदी सरकार इस ऐतिहासिक विधेयक को पारित कराने में सफल हो सकती है।

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