विश्व में तेल संकट कब-कब 2026 तक हुआ ?

विश्व में तेल संकट (Oil Crisis) के इतिहास को देखें तो 1973 से लेकर वर्तमान 2026 तक कई बड़े झटके आए हैं, जिन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। इन संकटों का मुख्य कारण अक्सर भू-राजनीतिक (geopolitical) तनाव और युद्ध रहे हैं। यहाँ 2026 तक के प्रमुख तेल संकटों का विवरण दिया गया है: 1. 1973 का पहला तेल संकट (Arab Oil Embargo) * कारण: 'योम किप्पुर' युद्ध (इज़राइल-अरब युद्ध) के दौरान अरब देशों ने इज़राइल का समर्थन करने वाले देशों (जैसे अमेरिका और ब्रिटेन) को तेल की आपूर्ति बंद कर दी थी। * प्रभाव: तेल की कीमतें रातों-रात $3 से बढ़कर $12 प्रति बैरल हो गईं। दुनिया भर में पेट्रोल के लिए लंबी लाइनें लगीं और ऊर्जा संरक्षण के नए नियम बनाए गए। 2. 1979 का दूसरा तेल संकट (Iranian Revolution) * कारण: ईरान में हुई इस्लामी क्रांति के कारण वहां तेल का उत्पादन ठप हो गया। इसके तुरंत बाद 1980 में ईरान-इराक युद्ध शुरू होने से स्थिति और बिगड़ गई। * प्रभाव: तेल की कीमतें लगभग $40 प्रति बैरल तक पहुँच गईं, जिससे वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति (inflation) बढ़ गई। 3. 1990 का तेल संकट (Gulf War) * कारण: इराक द्वारा कुवैत पर आक्रमण के बाद वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा आई। * प्रभाव: आपूर्ति में कमी के डर से कीमतें $20 से बढ़कर $40 हो गईं, हालांकि सऊदी अरब के अतिरिक्त उत्पादन से स्थिति जल्द ही संभल गई थी। 4. 2008 का मूल्य झटका (Oil Price Spike) * कारण: यह संकट आपूर्ति की कमी से अधिक मांग (विशेषकर चीन और भारत से) और बाजार में सट्टेबाजी के कारण था। * प्रभाव: तेल की कीमतें अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर $147.27 प्रति बैरल पर पहुँच गईं। इसके बाद आए वैश्विक वित्तीय संकट के कारण कीमतें फिर से गिर गईं। 5. 2022 का रूस-यूक्रेन संकट * कारण: रूस द्वारा यूक्रेन पर हमले के बाद पश्चिमी देशों ने रूसी तेल पर प्रतिबंध लगा दिए। * प्रभाव: तेल की कीमतें फिर से $100 के पार चली गईं, जिससे यूरोप में ऊर्जा का बड़ा संकट पैदा हो गया। 6. 2026 का वर्तमान संकट (Middle East Crisis) * मार्च 2026: वर्तमान में मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण दुनिया इतिहास के सबसे बड़े तेल आपूर्ति संकट का सामना कर रही है। * ताज़ा स्थिति: * होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से वैश्विक आपूर्ति में रोजाना लगभग 20 मिलियन बैरल की कमी आई है। * कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर $100 प्रति बैरल को पार कर गई हैं। * संकट से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के 32 देशों ने अपने आपातकालीन भंडार से 40 करोड़ बैरल तेल छोड़ने का ऐतिहासिक फैसला लिया है।

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