वर्तमान समय (मार्च 2026) में फारस की खाड़ी और एलपीजी (LPG) के बीच का संबंध बहुत ही नाजुक और चुनौतीपूर्ण हो गया है। हाल ही में शुरू हुए अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध (फरवरी-मार्च 2026) ने भारत सहित पूरी दुनिया की रसोई तक अपनी तपिश पहुँचा दी है।
इसे समझने के लिए निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं को देखें:
1. होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी
यह फारस की खाड़ी का एकमात्र समुद्री रास्ता है। वर्तमान युद्ध के कारण ईरान ने इस रास्ते को व्यावसायिक जहाजों के लिए लगभग बंद कर दिया है।
* भारत की निर्भरता: भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60-65% आयात करता है।
* इस आयात का 90% हिस्सा इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता है। इस रास्ते के बंद होने से गैस के टैंकर खाड़ी देशों (कतर, सऊदी अरब, यूएई) से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
2. घरेलू कीमतों और सप्लाई पर असर
युद्ध की वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं:
* कीमतों में वृद्धि: मार्च 2026 में भारत में घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 kg) की कीमतों में ₹60 और कमर्शियल सिलेंडर में ₹115 तक की रातों-रात वृद्धि देखी गई है।
* किल्लत और वेटिंग: कई शहरों (जैसे भोपाल, बेंगलुरु, मुंबई) में गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और कमर्शियल सिलेंडर की बुकिंग के लिए 25 दिनों तक का समय लग रहा है।
3. सरकार के आपातकालीन कदम
इस संकट से निपटने के लिए भारत सरकार ने मार्च 2026 में कई बड़े फैसले लिए हैं:
* अनिवार्य उत्पादन: रिफाइनरियों को आदेश दिया गया है कि वे अन्य पेट्रोकेमिकल उत्पादों (प्रोपेन, ब्यूटेन) के बजाय एलपीजी बनाने को प्राथमिकता दें ताकि घरेलू उत्पादन 25-28% तक बढ़ाया जा सके।
* प्राथमिकता तय करना: फिलहाल गैस की सप्लाई घरेलू रसोई, अस्पतालों और स्कूलों के लिए सुरक्षित रखी जा रही है, जबकि होटलों और इंडस्ट्रीज (कमर्शियल इस्तेमाल) के लिए सप्लाई में कटौती की गई है।
* आपूर्ति के नए स्रोत: सरकार अब अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका जैसे वैकल्पिक देशों से एलपीजी मंगवाने की कोशिश कर रही है, हालांकि वहां से जहाज आने में 5-6 हफ्ते का समय लगता है (जबकि खाड़ी से केवल 1 हफ्ता लगता था)।
> विशेष नोट: वर्तमान स्थिति में सरकार ने जनता से 'पैनिक बुकिंग' न करने की अपील की है और दावा किया है कि देश के पास अगले 12 से 16 हफ्तों का स्टॉक सुरक्षित है।
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