विश्व में कच्चा तेल कब-कब बड़ा 2026 तक हुआ ?

विश्व में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल या 'प्राइस स्पाइक्स' का इतिहास बहुत उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1970 के दशक से लेकर वर्तमान वर्ष 2026 तक, जब-जब कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हुई, उसके पीछे युद्ध, भू-राजनीति या मांग-आपूर्ति का असंतुलन मुख्य कारण रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में आए प्रमुख उछालों का समय और कारण नीचे दिए गए हैं: 1. 1973: पहला तेल झटका (First Oil Shock) * कीमत: $3 से बढ़कर लगभग $12 प्रति बैरल। * कारण: अरब-इज़राइल युद्ध के दौरान अरब देशों (OPEC) द्वारा तेल निर्यात पर प्रतिबंध (Embargo)। 2. 1979-1980: दूसरा तेल झटका (Second Oil Shock) * कीमत: लगभग $40 प्रति बैरल तक (जो उस समय के हिसाब से बहुत अधिक था)। * कारण: ईरान में हुई इस्लामी क्रांति और उसके बाद शुरू हुआ ईरान-इराक युद्ध। 3. 2008: ऐतिहासिक उच्चतम स्तर (The Great Spike) * कीमत: कच्चा तेल अपने अब तक के सबसे उच्चतम स्तर $147.27 प्रति बैरल पर पहुँच गया। * कारण: चीन और भारत जैसे देशों में तेल की भारी मांग, कमजोर डॉलर और बाजार में सट्टेबाजी (Speculation)। 4. 2022: रूस-यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine Crisis) * कीमत: कीमतें $130 प्रति बैरल के करीब पहुँच गईं। * कारण: रूस पर लगे प्रतिबंधों के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा आने का डर। 5. 2026: वर्तमान तेल संकट (Current Crisis - March 2026) * ताज़ा स्थिति: मार्च 2026 में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर $100 का स्तर पार कर लिया है। * 9 मार्च 2026: ब्रेंट क्रूड एक ही दिन में 29% उछलकर $119.50 के इंट्राडे हाई पर पहुँच गया। * कारण: मध्य-पूर्व में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच युद्ध (Iran-Israel War 2026)। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया की 20% तेल आपूर्ति ठप हो गई है, जिससे यह 1973 के बाद का सबसे बड़ा आपूर्ति संकट बन गया है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव (एक नज़र में): | वर्ष | औसत/उच्चतम कीमत | मुख्य घटना | |---|---|---| | 1973 | $12 | अरब तेल प्रतिबंध | | 1980 | $40 | ईरान-इराक युद्ध | | 2008 | $147 | अत्यधिक वैश्विक मांग | | 2020 | $20 | कोविड-19 (कीमतें सबसे कम हुईं) | | 2022 | $130 | रूस-यूक्रेन युद्ध | | 2026 | $120 | ईरान-इज़राइल युद्ध | > विशेष जानकारी: 2026 के इस संकट को देखते हुए भारत सरकार ने देश में ईंधन की कमी को रोकने के लिए 'अनिवार्य वस्तु अधिनियम' (Essential Commodities Act) लागू किया है और घरेलू रसोई गैस (LPG) के उत्पादन को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।

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