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ब्रह्मर्षि का अर्थ ही है वह व्यक्ति जो 'ब्रह्म' के साथ एकाकार हो चुका हो। पौराणिक ग्रंथों में ऐसी कई घटनाएँ हैं जहाँ इन ऋषियों ने लोक कल्याण (जनहित) के लिए प्रकृति के नियमों, ग्रहों की चाल और यहाँ तक कि समय के प्रवाह को भी चुनौती दी या रोक दिया।
यहाँ कुछ प्रमुख उदाहरण दिए गए हैं:
1. ऋषि अगस्त्य: जब उन्होंने पूरे समुद्र को पी लिया
यह प्रकृति की एक विशाल घटना को पूरी तरह बदल देने का सबसे बड़ा उदाहरण है।
* संकट: 'कालेय' नाम के असुर समुद्र में छिपकर रात में ऋषियों का वध करते थे और दिन में समुद्र की गहराइयों में छिप जाते थे। देवताओं के लिए उन्हें वहाँ ढूंढना असंभव था।
* हस्तक्षेप: लोकहित में, ऋषि अगस्त्य ने अपनी तपस्या के बल पर संपूर्ण समुद्र का आचमन कर लिया (उसे पी गए)।
* परिणाम: समुद्र सूख गया, असुर पकड़े गए और संसार को उनके भय से मुक्ति मिली। बाद में भगीरथ के प्रयासों से गंगा के आगमन पर समुद्र फिर भरा गया।
2. ऋषि अगस्त्य और विंध्याचल पर्वत का बढ़ना
एक बार विंध्याचल पर्वत के अहंकार के कारण वह इतना ऊँचा उठने लगा कि उसने सूर्य के मार्ग को रोक दिया, जिससे पृथ्वी के आधे हिस्से में अंधेरा हो गया और समय का चक्र (दिन-रात) बिगड़ने लगा।
* हस्तक्षेप: अगस्त्य मुनि जब दक्षिण की ओर जा रहे थे, तो उनके सम्मान में विंध्याचल झुक गया। ऋषि ने उसे आज्ञा दी कि "जब तक मैं वापस न आ जाऊं, तुम ऐसे ही झुके रहना।"
* परिणाम: ऋषि अगस्त्य कभी वापस नहीं लौटे और विंध्याचल आज भी वैसा ही है। इस तरह उन्होंने प्रकृति की एक भौगोलिक घटना को रोककर ब्रह्मांडीय व्यवस्था (सूर्य की गति) को बहाल किया।
3. विश्वामित्र: त्रिशंकु को बीच आकाश में रोकना
राजा त्रिशंकु को जब इंद्र ने स्वर्ग से धक्का दे दिया, तो वे सिर के बल पृथ्वी की ओर गिरने लगे।
* हस्तक्षेप: विश्वामित्र ने अपनी शक्ति से उन्हें बीच हवा में ही "तिष्ठ" (रुक जाओ) कहकर रोक दिया। उन्होंने गुरुत्वाकर्षण और प्रकृति के नियम को चुनौती देते हुए त्रिशंकु को वहीं स्थिर कर दिया।
* परिणाम: उन्होंने वहीं एक नई गैलेक्सी (सप्तर्षि मंडल की तरह एक नया नक्षत्र मंडल) बनाना शुरू कर दिया, जिसे देवताओं को बाद में स्वीकार करना पड़ा।
4. ब्रह्मर्षि वशिष्ठ और 'ब्रह्मदण्ड'
जब विश्वामित्र (तब वे राजा थे) ने अपनी पूरी सेना और दिव्य अस्त्रों के साथ वशिष्ठ पर हमला किया, तो वशिष्ठ ने केवल अपने 'ब्रह्मदण्ड' (लकड़ी का डंडा) को सामने रख दिया।
* हस्तक्षेप: उस डंडे ने ब्रह्मास्त्र जैसे विनाशकारी अस्त्रों को भी अपने अंदर सोख लिया।
* लोकहित: उन्होंने विनाशकारी शक्तियों को ब्रह्मांड में फैलने से रोक दिया, जिससे पूरी सृष्टि को महाविनाश से बचाया जा सका।
5. ऋषि मार्कण्डेय और काल (समय) का रुकना
यद्यपि मार्कण्डेय को महामुनि कहा जाता है, लेकिन उनकी तपस्या ब्रह्मर्षि के समान ही थी।
* घटना: जब यमराज मार्कण्डेय के प्राण लेने आए, तो उन्होंने भगवान शिव की शरण ली। उस क्षण के लिए मृत्यु और समय का चक्र रुक गया। * परिणाम: उन्होंने समय (महाकाल) पर विजय प्राप्त की और वे आज भी 'चिरंजीवी' माने जाते हैं।
एक संक्षिप्त तुलना:
| ऋषि | क्या रोका / बदला? | उद्देश्य |
|---|---|---|
| अगस्त्य | समुद्र का अस्तित्व / पर्वत की ऊंचाई | असुरों का विनाश और सूर्य का मार्ग खोलना |
| विश्वामित्र | गुरुत्वाकर्षण / नक्षत्रों की स्थिति | अपने वचन की रक्षा और नई सृष्टि |
| वशिष्ठ | अस्त्रों की विनाशकारी ऊर्जा | विश्व शांति और मर्यादा की रक्षा |
> मजे की बात: आज के समय में अगर कोई ट्रैफिक जाम रोक दे तो उसे जादूगर कहते हैं, लेकिन इन ऋषियों ने तो पूरे ब्रह्मांड का 'ट्रैफिक' (ग्रह-नक्षत्र) रोक दिया था!
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इन घटनाओं से पता चलता है कि ब्रह्मर्षि की शक्ति उनकी मांसपेशियों में नहीं, बल्कि उनके 'संकल्प' में होती है। अगर आप ब्रह्म ऋषि के बारे में जानना चाहते हैं तो हमारे अन्य ब्लॉग जरूर पढ़ें!
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