व्यवसायिक ड्रोन वाहन रिक्शा/ चार्टर्ड नियम के अनुरूप स्थानीय और आसमान पर कैसे चलाएं जा सकते हैं ?

यह एक बहुत ही रोमांचक और भविष्यवादी (futuristic) सोच है! भारत में 'ड्रोन टैक्सी' या 'ई-वीटीओएल' (e-VTOL) वाहनों के लिए नियम अब धीरे-धीरे जमीन पर उतर रहे हैं। भारत सरकार ने 'ड्रोन रूल्स 2021' और 'नेशनल अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम (UAS) ट्रैफिक मैनेजमेंट' के जरिए इसके लिए रास्ता साफ किया है। यदि आप एक व्यवसायिक ड्रोन रिक्शा या चार्टर्ड सेवा शुरू करना चाहते हैं, तो आपको इन नियमों का पालन करना होगा: 1. कानूनी पंजीकरण और लाइसेंस (Legal & Licensing) आसमान में उड़ने के लिए आपको सड़क से कहीं ज्यादा सख्त कागजी कार्रवाई की जरूरत होगी: * UIN (Unique Identification Number): जैसे गाड़ी का नंबर होता है, वैसे ही हर ड्रोन टैक्सी का एक डिजिटल नंबर होगा। * UAOP (Unmanned Aircraft Operator Permit): व्यवसायिक संचालन (Commercial Operations) के लिए आपको नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से ऑपरेटर परमिट लेना होगा। * रिमोट पायलट लाइसेंस: ड्रोन रिक्शा चलाने वाले पायलट के पास DGCA द्वारा प्रमाणित संस्थान से लाइसेंस होना अनिवार्य है। 2. 'डिजिटल स्काई' और एयरस्पेस नियम भारत के आसमान को तीन ज़ोन में बांटा गया है, जिनका पालन करना अनिवार्य है: * ग्रीन ज़ोन (Green Zone): यहाँ आपको उड़ने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती (400 फीट तक)। * येलो ज़ोन (Yellow Zone): एयरपोर्ट के पास का इलाका। यहाँ उड़ने के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) की अनुमति अनिवार्य है। * रेड ज़ोन (Red Zone): सैन्य इलाके या राष्ट्रपति भवन जैसे क्षेत्र। यहाँ उड़ना पूरी तरह प्रतिबंधित है। 3. स्थानीय और आसमान पर संचालन (Operations) स्थानीय (Vertical Take-off & Landing - VTOL): ड्रोन रिक्शा को रनवे की जरूरत नहीं होती, वे सीधे ऊपर उड़ सकते हैं। * वर्टीपोर्ट्स (Vertiports): जैसे बस स्टैंड होते हैं, वैसे ही शहरों में ऊंची इमारतों या खाली मैदानों में 'वर्टीपोर्ट्स' बनाने होंगे जहाँ से यात्री चढ़ और उतर सकें। * ध्वनि प्रदूषण: स्थानीय स्तर पर संचालन के लिए ड्रोन के शोर (Noise levels) को निर्धारित मानकों के भीतर रखना होगा। आसमान पर (In the Air): * कोरिडोर (Air Corridors): ड्रोन टैक्सियों के लिए शहरों के ऊपर खास 'हवाई रास्ते' (Corridors) बनाए जाएंगे ताकि वे सामान्य विमानों या पक्षियों से न टकराएं। * Sense and Avoid: आपके ड्रोन वाहन में 'सेंस एंड अवॉइड' तकनीक होनी चाहिए जो रास्ते में आने वाली बाधाओं (जैसे बिजली के तार या अन्य ड्रोन) को खुद पहचान कर रास्ता बदल ले। 4. सुरक्षा और बीमा (Safety & Insurance) * थर्ड पार्टी इंश्योरेंस: किसी भी दुर्घटना की स्थिति में नुकसान की भरपाई के लिए भारी बीमा कवर जरूरी है। * इमरजेंसी पैराशूट: यात्री ले जाने वाले ड्रोन्स में 'बैलिस्टिक पैराशूट' सिस्टम होना चाहिए जो इंजन फेल होने पर पूरे वाहन को सुरक्षित जमीन पर उतार सके। मुख्य चुनौतियां और भविष्य | चुनौती | समाधान | |---|---| | बैटरी लाइफ | फास्ट चार्जिंग और स्वैपेबल बैटरी तकनीक। | | मौसम | तेज हवा और बारिश में संचालन के लिए विशेष सेंसर। | | किराया | शुरुआत में महंगा होगा, लेकिन मास-प्रोडक्शन से ऑटो-रिक्शा के बराबर आ सकता है। | > विट की बात: कल्पना कीजिए, आप ट्रैफिक जाम में फंसे लोगों के ऊपर से हाथ हिलाते हुए निकल रहे हैं! बस ध्यान रहे, ऊपर ट्रैफिक पुलिस नहीं होगी लेकिन 'डिजिटल रडार' आप पर हमेशा नजर रखेंगे।

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