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परमाणु ऊर्जा में निजी क्षेत्र की भागीदारी से जुड़े नए नियमों या SMR (Small Modular Reactors) के बारे में ?
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भारत में परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों में ऐतिहासिक बदलाव हुए हैं। दिसंबर 2025 में संसद द्वारा SHANTI अधिनियम (Sustainable Harnessing and Advancement of Nuclear Energy for Transforming India Act, 2025) पारित किया गया है, जिसने पुराने नियमों को पूरी तरह बदल दिया है।
यहाँ नए नियमों और SMR के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है:
1. निजी क्षेत्र की भागीदारी के नए नियम (SHANTI Act 2025)
यह कानून 1962 के परमाणु ऊर्जा अधिनियम और 2010 के नागरिक दायित्व अधिनियम की जगह लेता है। इसके मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
* निजी कंपनियों का प्रवेश: पहली बार, पात्र निजी कंपनियों और संयुक्त उद्यमों (Joint Ventures) को परमाणु संयंत्र बनाने, उनके मालिक होने और उन्हें संचालित (Build, Own, Operate) करने के लिए लाइसेंस मिल सकेगा।
* निवेश की सीमा: परमाणु परियोजनाओं में निजी कंपनियों को 49% तक इक्विटी (हिस्सेदारी) की अनुमति दी गई है। विदेशी निवेश (FDI) के लिए संप्रभु धन कोषों (Sovereign Wealth Funds) का मार्ग भी खोला गया है।
* सीमित सरकारी नियंत्रण: ईंधन चक्र (Fuel Cycle) की संवेदनशील गतिविधियां और यूरेनियम खनन अभी भी सरकार के नियंत्रण में रहेगा, लेकिन उपकरण निर्माण और बिजली उत्पादन में निजी क्षेत्र की बड़ी भूमिका होगी।
* मुआवजा और दायित्व (Liability): 2010 के कानून में 'आपूर्तिकर्ता' (Supplier) पर असीमित जिम्मेदारी थी, जिसे अब स्पष्ट किया गया है। नए कानून में रिएक्टर की क्षमता के आधार पर ₹100 करोड़ से ₹3,000 करोड़ तक की एक स्तरीय (Tiered) सीमा तय की गई है, जिससे विदेशी कंपनियों का डर कम होगा।
2. स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) क्या हैं?
SMR आधुनिक परमाणु रिएक्टर हैं जिनकी क्षमता आमतौर पर 300 मेगावाट (MW) से कम होती है। इन्हें 'मॉड्यूलर' इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनके हिस्सों को कारखाने में बनाकर साइट पर असेंबल किया जा सकता है।
* भारत का लक्ष्य: सरकार ने बजट 2025-26 में ₹20,000 करोड़ के "परमाणु ऊर्जा मिशन" की घोषणा की है। लक्ष्य है कि 2033 तक कम से कम 5 स्वदेशी SMR चालू कर दिए जाएं।
* प्रमुख मॉडल: भारत अपने 'भारत स्मॉल रिएक्टर' (BSR) विकसित कर रहा है। इनमें BSMR-200 (200 MW) और SMR-55 (55 MW) शामिल हैं।
* उपयोगिता: ये रिएक्टर छोटे होते हैं, इसलिए इन्हें स्टील या एल्युमीनियम जैसे बड़े उद्योगों के पास बिजली की जरूरतों के लिए लगाया जा सकता है।
3. ये बदलाव क्यों किए गए?
* ऊर्जा लक्ष्य: भारत 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 GW तक पहुँचाना चाहता है (अभी यह लगभग 8.18 GW है)। इसके लिए भारी निवेश (लगभग ₹15 लाख करोड़) की जरूरत है, जो केवल सरकारी फंड से संभव नहीं है।
* Net Zero 2070: जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए कोयले की जगह परमाणु ऊर्जा एक 'क्लीन' और 'बेसलोड' (लगातार मिलने वाली) बिजली का स्रोत है।
* सुरक्षा: नए कानून ने Atomic Energy Regulatory Board (AERB) को अधिक कानूनी शक्तियां दी हैं ताकि निजी भागीदारी के बावजूद सुरक्षा मानकों से समझौता न हो।
> महत्वपूर्ण: हालाँकि निजी कंपनियां संयंत्र चला सकती हैं, लेकिन उनका संचालन NPCIL (Nuclear Power Corporation of India) की निगरानी में होगा और सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य होगी।
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