भारत में SHANTI अधिनियम 2025 के आने के बाद विदेशी निवेश और परमाणु कचरे को लेकर नियमों में काफी स्पष्टता आई है। सरकार का लक्ष्य परमाणु ऊर्जा को "पूंजी-गहन" (Capital Intensive) क्षेत्र से हटाकर एक "निवेश-अनुकूल" क्षेत्र बनाना है।
यहाँ इन दोनों विषयों की विस्तृत जानकारी दी गई है:
1. परमाणु ऊर्जा में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI)
पुराने नियमों के अनुसार, परमाणु ऊर्जा उन गिने-चुने क्षेत्रों में से था जहाँ FDI पूरी तरह प्रतिबंधित था। नए नियमों ने इस दीवार को गिरा दिया है:
* निवेश की सीमा: परमाणु बिजली उत्पादन (Nuclear Power Generation) में अब 49% तक FDI की अनुमति दी गई है। यह निवेश मुख्य रूप से अत्याधुनिक तकनीकों और SMR (Small Modular Reactors) के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।
* प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Tech Transfer): विदेशी कंपनियों (जैसे अमेरिका की Westinghouse या फ्रांस की EDF) को निवेश की अनुमति तभी मिलती है जब वे भारत में 'मेक इन इंडिया' के तहत पुर्जे बनाने और तकनीक साझा करने पर सहमत हों।
* सुरक्षा जांच: विदेशी निवेश के लिए 'स्वचालित मार्ग' (Automatic Route) नहीं है। हर निवेश प्रस्ताव की जांच राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) द्वारा की जाती है ताकि सामरिक सुरक्षा से समझौता न हो।
2. परमाणु कचरा प्रबंधन (Nuclear Waste Management)
परमाणु ऊर्जा का सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इसके रेडियोधर्मी कचरे का क्या किया जाए? भारत इसके लिए 'Closed Fuel Cycle' (बंद ईंधन चक्र) नीति अपनाता है।
कचरे के प्रकार और उनका समाधान:
* निम्न-स्तरीय कचरा (Low-level Waste): इसमें इस्तेमाल किए गए दस्ताने, कपड़े और उपकरण आते हैं। इन्हें कंक्रीट के गड्ढों में सुरक्षित रूप से दबा दिया जाता है।
* मध्यम-स्तरीय कचरा (Intermediate-level Waste): इन्हें राल (Resin) या कंक्रीट के साथ मिलाकर सीलबंद कंटेनरों में रखा जाता है।
* उच्च-स्तरीय कचरा (High-level Waste): यह सबसे खतरनाक होता है। भारत इसके लिए "विट्रिफिकेशन" (Vitrification) तकनीक का उपयोग करता है, जिसमें कचरे को पिघले हुए कांच के साथ मिलाकर एक ठोस पत्थर जैसा बना दिया जाता है, जिससे इसके लीक होने का खतरा खत्म हो जाता है।
"कचरे से कंचन" (Recycling):
भारत दुनिया के उन कुछ देशों में से है जो इस्तेमाल किए गए परमाणु ईंधन को फेंकने के बजाय उसे रीप्रोसेस (Reprocess) करता है। इससे हम 'प्लूटोनियम' निकालते हैं, जिसे हमारे थ्री-स्टेज परमाणु कार्यक्रम के अगले चरण में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जाता है।
3. SHANTI अधिनियम 2025 के तहत नई कचरा नीति
नए कानून ने कचरा प्रबंधन के लिए कुछ कड़े प्रावधान किए हैं:
* निजी जिम्मेदारी: यदि कोई निजी कंपनी परमाणु संयंत्र चलाती है, तो कचरा प्रबंधन का खर्च उसी कंपनी को उठाना होगा (Polluter Pays Principle)।
* Deep Geological Repository (DGR): सरकार ने कचरे को हजारों साल तक जमीन के बहुत नीचे सुरक्षित रखने के लिए 'डीप जियोलॉजिकल रिपोजिटरी' बनाने की योजना को मंजूरी दी है।
तुलनात्मक चार्ट: FDI और कचरा प्रबंधन
| पहलू | FDI नियम (2025 के बाद) | कचरा प्रबंधन नीति |
|---|---|---|
| अनुमति | 49% तक (सरकारी मंजूरी के साथ) | सख्त सरकारी नियंत्रण और निगरानी |
| मुख्य फोकस | पूंजी और आधुनिक तकनीक लाना | पर्यावरण सुरक्षा और ईंधन रिसाइकलिंग |
| निजी क्षेत्र की भूमिका | विदेशी कंपनियों के साथ JV (Joint Venture) | केवल डिस्पोजल फीस देना, प्रबंधन सरकार करेगी |
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