विशेष क्षेत्र (जैसे ड्रोन ऑपरेटरों के लिए नियम) के बारे में विस्तार से चर्चा ?

ड्रोन ऑपरेटरों के लिए नियम और कानून अब पहले से कहीं अधिक सख्त और व्यवस्थित हो गए हैं। भारत में ड्रोन नियम, 2021 और हालिया 2025-26 के अपडेट्स के अनुसार, यदि आप एक पेशेवर या शौकिया ड्रोन ऑपरेटर हैं, तो आपको निम्नलिखित नियमों का पालन करना अनिवार्य है: 1. ड्रोन का वर्गीकरण (Classification) भारत में वजन के आधार पर ड्रोन्स को 5 श्रेणियों में बांटा गया है: * Nano (नैनो): 250 ग्राम से कम। * Micro (माइक्रो): 250 ग्राम से 2 किलो तक। * Small (स्मॉल): 2 किलो से 25 किलो तक। * Medium (मीडियम): 25 किलो से 150 किलो तक। * Large (लार्ज): 150 किलो से अधिक (500 किलो तक)। 2. अनिवार्य पंजीकरण और UIN * Digital Sky Platform: हर ड्रोन (नैनो को छोड़कर, यदि वह गैर-व्यावसायिक है) को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के डिजिटल स्काई पोर्टल पर पंजीकृत होना चाहिए। * UIN (Unique Identification Number): पंजीकरण के बाद आपको एक विशिष्ट पहचान संख्या मिलेगी, जिसे ड्रोन पर चिपकाना अनिवार्य है। यह आपकी कार की नंबर प्लेट जैसा है। 3. लाइसेंस और प्रमाणन (Remote Pilot Certificate) * अब 'लाइसेंस' के बजाय रिमोट पायलट सर्टिफिकेट (RPC) दिया जाता है। * पात्रता: आपकी आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और आपने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं कक्षा पास की हो। * प्रशिक्षण: आपको DGCA द्वारा अनुमोदित RPTO (Remote Pilot Training Organization) से ट्रेनिंग लेनी होगी और परीक्षा पास करनी होगी। * छूट: नैनो ड्रोन और गैर-व्यावसायिक माइक्रो ड्रोन उड़ाने के लिए RPC की आवश्यकता नहीं होती। 4. एयरस्पेस ज़ोनिंग (कहाँ उड़ा सकते हैं?) सरकार ने पूरे भारत के आसमान को तीन रंगों में बांटा है: * Green Zone (ग्रीन ज़ोन): यहाँ 400 फीट तक ड्रोन उड़ाने के लिए किसी अनुमति की आवश्यकता नहीं है। * Yellow Zone (येलो ज़ोन): हवाई अड्डे के पास का क्षेत्र। यहाँ उड़ाने के लिए एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से अनुमति लेनी होगी। * Red Zone (रेड ज़ोन): पूरी तरह प्रतिबंधित क्षेत्र (जैसे सैन्य क्षेत्र, वीआईपी इलाके)। यहाँ ड्रोन उड़ाना सख्त मना है। 5. "No Permission, No Takeoff" (NPNT) यह एक सॉफ्टवेयर आधारित नियम है। ड्रोन में ऐसा हार्डवेयर/सॉफ्टवेयर होना चाहिए जो डिजिटल स्काई पोर्टल से अनुमति न मिलने पर ड्रोन को उड़ने ही न दे। भविष्य में एसोसिएशन/यूनियन की भूमिका यहाँ क्या होगी? जैसा कि आपने पहले पूछा था, इस जटिल नियम प्रणाली में यूनियनें ऑपरेटरों की निम्नलिखित मदद करेंगी: * बीमा वकालत (Insurance Advocacy): नियमों के अनुसार ड्रोन के लिए 'थर्ड पार्टी इंश्योरेंस' जरूरी है। एसोसिएशनें बीमा कंपनियों से बात करके सस्ते और व्यापक 'ड्रोन इंश्योरेंस' प्लान दिलवा सकती हैं। * कानूनी सहायता: अगर कोई ऑपरेटर गलती से 'येलो ज़ोन' में चला जाता है और पुलिस कार्रवाई होती है, तो एसोसिएशन कानूनी बचाव और मार्गदर्शन प्रदान करती है। * लाइसेंसिंग सुगमता: व्यक्तिगत तौर पर RPC लेना कठिन हो सकता है। एसोसिएशनें 'बल्क ट्रेनिंग' आयोजित करवाकर लागत कम करवा सकती हैं। * डेटा सुरक्षा मानक: ड्रोन अक्सर संवेदनशील डेटा (मैपिंग, फोटोग्राफी) एकत्र करते हैं। यूनियनें यह सुनिश्चित करने में मदद करेंगी कि ऑपरेटर डेटा चोरी के आरोपों से बचे रहें। > चेतावनी: बिना पंजीकरण या बिना लाइसेंस के व्यावसायिक ड्रोन उड़ाने पर भारी जुर्माना (1 लाख रुपये तक) और कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

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