भारत के 'क्रिटिकल मिनरल्स' (जैसे लिथियम या कोबाल्ट) के खनन से जुड़े विशेष नियमों के बारे में ?

भारत के लिए लिथियम और कोबाल्ट जैसे 'क्रिटिकल मिनरल्स' (Critical Minerals) अब केवल खनिज नहीं, बल्कि "रणनीतिक संपदा" हैं। सरकार ने 2025-26 के दौरान इनके खनन और प्रसंस्करण (Processing) के लिए नियमों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। इन खनिजों से जुड़े विशेष नियम और रणनीतियाँ निम्नलिखित हैं: 1. नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) 2025 भारत सरकार ने जनवरी 2025 में इस मिशन की शुरुआत की है, जिसका लक्ष्य भारत को इन खनिजों में आत्मनिर्भर बनाना है। * बजट: इसके लिए ₹16,300 करोड़ का आवंटन किया गया है। * उद्देश्य: घरेलू स्तर पर खनन को बढ़ावा देना, विदेशों में खदानों का अधिग्रहण करना और खनिजों के रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहित करना। 2. केंद्र सरकार का विशेष अधिकार (MMDR संशोधन 2023/2025) पहले इन खनिजों की नीलामी राज्य सरकारों के अधीन थी, लेकिन अब नियमों में बदलाव किया गया है: * एक्सक्लूसिव नीलामी: लिथियम, कोबाल्ट और निकल जैसे 24 महत्वपूर्ण खनिजों की नीलामी का अधिकार अब केंद्र सरकार के पास है। हालाँकि, इनसे मिलने वाला राजस्व (Revenue) संबंधित राज्य सरकार को ही मिलता है। * परमाणु सूची से बाहर: लिथियम को 'परमाणु खनिजों' (Atomic Minerals) की सूची से हटा दिया गया है, जिससे अब निजी क्षेत्र की कंपनियां भी इसका खनन कर सकती हैं। 3. 'एक्सप्लोरेशन लाइसेंस' (EL) - नया नियम गहरे और महत्वपूर्ण खनिजों की खोज के लिए सरकार ने एक्सप्लोरेशन लाइसेंस (EL) की शुरुआत की है। * यह लाइसेंस निजी क्षेत्र को 1,000 वर्ग किमी तक के क्षेत्र में खोज करने की अनुमति देता है। * यदि वहां खनिज मिलता है, तो खोज करने वाली कंपनी को नीलामी की राशि का एक हिस्सा 50 वर्षों तक मिलता रहेगा। 4. बजट 2026-27 के तहत नए प्रोत्साहन हालिया बजट में इन खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं: * कस्टम ड्यूटी में छूट: लिथियम, कोबाल्ट और अन्य 12 महत्वपूर्ण खनिजों के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को शून्य (Zero) कर दिया गया है। * रेयर अर्थ कॉरिडोर्स (Rare Earth Corridors): ओडिशा, केरल और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में विशेष गलियारे बनाए जा रहे हैं जहाँ खनन से लेकर बैटरी बनाने तक की पूरी प्रक्रिया एक ही जगह होगी। राजस्व और संरक्षण के बीच संतुलन | श्रेणी | नियम/प्रावधान | |---|---| | राजस्व (Revenue) | पारदर्शी ई-नीलामी और 'क्रिटिकल मिनरल एक्सचेंज' के जरिए खनिजों की बाजार दर पर बिक्री। | | रीसाइक्लिंग (Urban Mining) | ₹1,500 करोड़ की योजना के तहत पुरानी बैटरियों से लिथियम और कोबाल्ट निकालने (Recycling) को बढ़ावा। | | पर्यावरण | टेलिंग्स पॉलिसी (Tailings Policy): खनन के बाद बचे कचरे से भी खनिज निकालने का अनिवार्य नियम, ताकि कचरा कम हो। | भविष्य की राह: 'सोशल लाइसेंस' चूंकि लिथियम की बड़ी खदानें अक्सर संवेदनशील क्षेत्रों (जैसे जम्मू-कश्मीर का रियासी ब्लॉक) में होती हैं, इसलिए सरकार ने नए सुरक्षा और विस्थापन नियम बनाए हैं ताकि स्थानीय समुदायों के अधिकारों की रक्षा हो और खनन पर्यावरण के अनुकूल (Green Mining) हो। > महत्वपूर्ण तथ्य: भारत का लक्ष्य 2030 तक अपनी 50% ऊर्जा जरूरतों को गैर-जीवाश्म ईंधन (EV और रिन्यूएबल) से पूरा करना है, और इन नियमों के बिना यह संभव नहीं है।

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