व्यवसायिक हाइड्रोजन वाहन रिक्शा / रिक्शा ऑटो नियम के अनुरूप स्थानीय और हाईवे पर कैसे चलाएं जा सकते हैं ?

हाइड्रोजन से चलने वाले ऑटो-रिक्शा (H2-ICE या Fuel Cell) भविष्य की एक बहुत बड़ी क्रांति हैं। भारत सरकार और परिवहन मंत्रालय (MoRTH) पहले ही 'ग्रीन हाइड्रोजन' को लेकर काफी सक्रिय हैं। अगर आप एक व्यावसायिक (Commercial) हाइड्रोजन रिक्शा चलाने की सोच रहे हैं, तो इसके लिए कुछ खास नियमों और संचालन के तरीकों को समझना जरूरी है। यहाँ इसका पूरा रोडमैप दिया गया है: 1. कानूनी और पंजीकरण नियम (Legal & RTO Rules) हाइड्रोजन वाहन को सड़क पर उतारने से पहले आपको इन कागजी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा: * AIS-157 सर्टिफिकेशन: भारत में हाइड्रोजन वाहनों के लिए सुरक्षा मानक (Safety Standards) अनिवार्य हैं। सुनिश्चित करें कि आपका रिक्शा इन मानकों के अनुरूप हो। * ग्रीन नंबर प्लेट: इलेक्ट्रिक वाहनों की तरह ही, हाइड्रोजन वाहनों को भी हरे रंग की नंबर प्लेट दी जाती है, जो इसे प्रदूषण मुक्त श्रेणी में रखती है। * कमर्शियल परमिट: स्थानीय नगर निगम और RTO से आपको 'पैसेंजर ट्रांसपोर्ट' के लिए कमर्शियल परमिट लेना होगा। 2. हाइड्रोजन ऑटो-रिक्शा कैसे काम करता है? इसे समझना इसलिए जरूरी है ताकि आप सुरक्षा का ध्यान रख सकें। आमतौर पर यह दो तरह के होते हैं: * H2-ICE: इसमें इंजन हाइड्रोजन को पेट्रोल की तरह ही जलाता है। * FCEV (Fuel Cell): इसमें हाइड्रोजन से बिजली बनती है और फिर मोटर चलती है। 3. स्थानीय और हाईवे पर संचालन (Local vs Highway) एक ऑटो-रिक्शा के लिए हाईवे और शहर की गलियों के नियम अलग-अलग होते हैं: स्थानीय (Local) संचालन के लिए: * स्पीड लिमिट: शहरों के अंदर आमतौर पर ऑटो-रिक्शा की गति सीमा 40-45 किमी/घंटा तय होती है। * रिफ्यूलिंग (Refueling): हाइड्रोजन स्टेशन अभी कम हैं। आपको अपने रूट की योजना इस तरह बनानी होगी कि आप पास के हाइड्रोजन हब से जुड़े रहें। * नो-एंट्री ज़ोन: कई शहरों में कुछ समय के लिए ऑटो-रिक्शा प्रतिबंधित होते हैं, हाइड्रोजन होने के बावजूद आपको इन ट्रैफिक नियमों का पालन करना होगा। हाईवे (Highway) पर संचालन के लिए: * लेन अनुशासन (Lane Discipline): हाईवे पर ऑटो-रिक्शा को सबसे बाईं (Left) लेन में चलना अनिवार्य है। * गति सीमा: नेशनल हाईवे पर ऑटो के लिए गति सीमा अक्सर 50 किमी/घंटा से अधिक नहीं होती। * सुरक्षा मानक: हाईवे पर हवा का दबाव और वाहनों की गति ज्यादा होती है। हाइड्रोजन सिलेंडर का लीकेज सेंसर हमेशा एक्टिव रहना चाहिए। 4. सुरक्षा और रखरखाव (Safety Protocols) चूंकि हाइड्रोजन एक उच्च ज्वलनशील गैस है, इसलिए ये सावधानियां सबसे महत्वपूर्ण हैं: * Cylinder Testing: हाइड्रोजन सिलेंडर को उच्च दबाव (350-700 bar) पर स्टोर किया जाता है। इसकी समय-समय पर हाइड्रो-टेस्टिंग (Hydro-testing) जरूरी है। * Sensors: आपके रिक्शा में हाइड्रोजन लीक डिटेक्टर होना चाहिए जो लीक होते ही फ्यूल सप्लाई काट दे। मुख्य चुनौतियां और समाधान | चुनौती | समाधान | |---|---| | ईंधन की कमी | सरकार 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' के तहत हाईवे पर हाइड्रोजन पंप लगा रही है। | | ऊंची कीमत | शुरुआत में लागत अधिक हो सकती है, लेकिन सब्सिडी और कम रनिंग कॉस्ट से भरपाई हो जाती है। | | रेंज (Range) | हाइड्रोजन ऑटो एक बार भरने पर 150-200 किमी तक चल सकते हैं, जो शहर के लिए पर्याप्त है। | > विट की बात: हाइड्रोजन रिक्शा चलाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि पीछे से धुआं नहीं, सिर्फ 'पानी की बूंदें' निकलती हैं। यानी आप सवारी भी ढो रहे हैं और पर्यावरण की प्यास भी बुझा रहे हैं!

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