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महर्षि जमदग्नि हिंदू धर्म के सात महान ऋषियों (सप्तऋषियों) में से एक हैं। वे भृगु वंश के वंशज और भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम के पिता थे।
उनके बारे में मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:
1. जन्म और परिवार
* वंश: वे भृगु ऋषि के वंशज और महर्षि ऋचीक एवं माता सत्यवती के पुत्र थे।
* पत्नी: उनका विवाह राजा प्रसेनजित की पुत्री रेणुका से हुआ था।
* संतान: उनके पांच पुत्र थे—रुमण्वान्, सुषेण, वसु, विश्वावसु और सबसे छोटे परशुराम।
2. स्वभाव और विशेषताएँ
* जमदग्नि अपनी कठोर तपस्या और ज्ञान के लिए जाने जाते थे। उन्हें वेदों और शास्त्र-विद्या (शस्त्र चलाने की कला) दोनों का असाधारण ज्ञान था।
* उनके पास कामधेनु नामक दिव्य गाय थी, जो किसी भी इच्छा को पूरा करने की शक्ति रखती थी।
3. प्रमुख पौराणिक घटनाएँ
* माता रेणुका का वध: एक बार जब रेणुका से मानसिक विचलन का अपराध हुआ, तो जमदग्नि ने क्रोध में आकर अपने पुत्रों को उनका वध करने का आदेश दिया। चार बड़े पुत्रों ने मना कर दिया, लेकिन परशुराम ने पिता की आज्ञा का पालन किया। जमदग्नि ने खुश होकर परशुराम को वरदान मांगने को कहा, जिससे परशुराम ने अपनी माता और भाइयों को पुनर्जीवित करवा लिया।
* कार्तवीर्य अर्जुन से संघर्ष: हैहय वंश के राजा सहस्त्रबाहु (कार्तवीर्य अर्जुन) ने जमदग्नि की कामधेनु गाय को जबरदस्ती छीनने का प्रयास किया। संघर्ष के दौरान सहस्त्रबाहु के पुत्रों ने महर्षि जमदग्नि की हत्या कर दी। इसी प्रतिशोध में परशुराम ने पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन करने की शपथ ली थी।
4. धार्मिक महत्व
* सप्तऋषि: उन्हें वर्तमान (वैवस्वत मन्वंतर) के सप्तऋषियों में गिना जाता है।
* पूजा: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के मलाणा गाँव में उन्हें 'जमलू देवता' के रूप में पूजा जाता है।
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