केंद्र और राज्य बजट 2026-27 में महिलाओं के लिए 30% बजट के प्रावधान के फायदे ?

बजट 2026-27 में महिलाओं के लिए जेंडर बजटिंग (Gender Budgeting) के तहत महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। जेंडर बजट के 'पार्ट B' में उन योजनाओं को रखा जाता है जिनमें महिलाओं के लिए कम से कम 30% बजट आवंटित होता है। केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा इस 30% के प्रावधान से होने वाले प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं: 1. आर्थिक सशक्तिकरण और वित्तीय आजादी * आसान ऋण (Easy Credit): बजट 2026-27 में जन धन खातों के माध्यम से महिलाओं के लिए विशेष क्रेडिट कार्ड और बिना गारंटी वाले छोटे लोन (Micro-loans) का प्रावधान है। इससे महिलाएं साहूकारों के चंगुल से बचकर खुद का व्यवसाय शुरू कर सकेंगी। * महिला उद्यमिता: सिलाई, डेयरी और छोटे स्टोर जैसे घरेलू व्यवसायों के लिए कम ब्याज दरों पर ऋण मिलने से 'लखपति दीदी' जैसी योजनाओं को बल मिलेगा। 2. सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य में सुधार * बीमा कवर: महिलाओं के लिए विशेष बीमा योजनाओं (जैसे मातृत्व लाभ और गंभीर बीमारी कवर) में निवेश बढ़ेगा। * स्वास्थ्य सेवाएं: ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए मासिक धर्म स्वच्छता (Menstrual Hygiene) और पोषण योजनाओं के लिए फंड का 30% हिस्सा आरक्षित होने से उनके स्वास्थ्य स्तर में सुधार होगा। 3. शिक्षा और कौशल विकास * STEM शिक्षा: विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में छात्राओं के लिए विशेष छात्रवृत्ति और उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे। * डिजिटल साक्षरता: 2026-27 के बजट में महिलाओं को डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन सुरक्षित लेन-देन सिखाने के लिए अलग से फंड दिया गया है, जो उन्हें आधुनिक अर्थव्यवस्था से जोड़ता है। 4. कार्यबल में भागीदारी (Labor Force Participation) * सुरक्षित बुनियादी ढांचा: वर्किंग विमेन हॉस्टल और बच्चों के लिए 'क्रेच' (Crèche) सुविधाओं के निर्माण में निवेश बढ़ने से अधिक महिलाएं नौकरी करने के लिए प्रेरित होंगी। * कौशल प्रशिक्षण: उद्योगों की मांग के अनुसार महिलाओं को स्किल ट्रेनिंग देने के लिए बजट का एक बड़ा हिस्सा उपयोग किया जाएगा। 5. निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि * जब बजट का एक निश्चित हिस्सा (30%) सीधे महिलाओं से जुड़ी योजनाओं पर खर्च होता है, तो परिवार और समाज में उनकी निर्णय लेने की भूमिका बढ़ती है। स्वामित्व वाले घरों (PMAY-G के तहत) और संपत्तियों में महिलाओं का नाम होने से उनकी सामाजिक स्थिति मजबूत होती है। > विशेष नोट: वित्त वर्ष 2025-26 में जेंडर बजट की हिस्सेदारी कुल बजट की 8.86% थी, जिसे 2026-27 में और अधिक प्रभावी बनाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि 'विकसित भारत @2047' के सपने को साकार किया जा सके।

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