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भारत में गिग वर्कर्स (Gig Workers)—जैसे जोमैटो/स्विगी के डिलीवरी पार्टनर्स, ओला/उबर के ड्राइवर्स और फ्रीलांसरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। चूंकि उनकी आय अस्थिर होती है,
इसलिए उन्हें "तुरंत" राहत देने के लिए बजट और सरकारी नीतियों में निम्नलिखित ठोस प्रावधान होने चाहिए:
1. सामाजिक सुरक्षा का कानूनी अधिकार (Social Security Cover)
गिग वर्कर्स को कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) और कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) के दायरे में लाना सबसे जरूरी है।
* पेंशन और जीवन बीमा: रिटायरमेंट के बाद सुरक्षा और दुर्घटना की स्थिति में परिवार को बीमा कवर मिलना चाहिए।
* स्वास्थ्य लाभ: उनके और उनके परिवार के लिए मुफ्त या रियायती स्वास्थ्य जांच और इलाज की सुविधा।
2. गिग वर्कर्स कल्याण कोष (Gig Workers Welfare Fund)
सरकार को एक समर्पित फंड बनाना चाहिए, जिसमें योगदान के दो स्रोत हों:
* प्लेटफॉर्म एग्रीगेटर फीस: हर ट्रांजेक्शन (जैसे हर डिलीवरी या राइड) पर कंपनियों से 1-2% का 'कल्याण उपकर' (Cess) लिया जाए।
* सरकारी योगदान: केंद्र और राज्य सरकारें अपनी ओर से इस फंड में हिस्सा डालें ताकि संकट के समय (जैसे बीमारी या एक्सीडेंट) वर्कर को तुरंत पैसा मिल सके।
3. न्यूनतम आय की गारंटी (Minimum Wage Policy)
गिग वर्क में 'काम के बदले पैसा' मिलता है, लेकिन कई बार घंटों इंतजार के बाद भी कमाई नहीं होती।
* एक न्यूनतम लॉग-इन पेमेंट तय होना चाहिए ताकि अगर वर्कर ऐप पर उपलब्ध है, तो उसे एक निश्चित आधारभूत आय मिले।
* पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए 'फ्यूल सरचार्ज' का सीधा फायदा वर्कर को मिलना चाहिए।
4. कार्य दशा और सुरक्षा (Work Conditions)
* काम के घंटों की सीमा: थकान के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए काम के घंटों पर कैप (Limit) होनी चाहिए।
* दुर्घटना बीमा: ऑन-ड्यूटी एक्सीडेंट होने पर तुरंत कैशलेस इलाज और मुआवजे का प्रावधान अनिवार्य हो।
5. शिकायत निवारण तंत्र (Redressal Mechanism)
वर्तमान में कई वर्कर शिकायत करते हैं कि कंपनियां बिना बताए उनकी आईडी 'ब्लॉक' कर देती हैं।
* कंपनियों के लिए 'आर्बिट्रेशन' (मध्यस्थता) अनिवार्य हो, जहाँ वर्कर अपनी बात रख सके।
* बिना किसी ठोस कारण के आईडी टर्मिनेट करने पर रोक लगे।
6. ई-श्रम पोर्टल का बेहतर उपयोग
सभी गिग वर्कर्स का डेटा ई-श्रम (e-Shram) पोर्टल पर अपडेट होना चाहिए ताकि सरकार सीधे उनके बैंक खाते में (DBT के जरिए) आपदा के समय आर्थिक मदद भेज सके।
गिग इकोनॉमी के फायदे और चुनौतियां
| श्रेणी | मुख्य प्रावधान की आवश्यकता |
|---|---|
| वित्तीय | कम ब्याज पर ई-व्हीकल (EV) लोन की सुविधा। |
| कानूनी | 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी' (2020) को तुरंत और सख्ती से लागू करना। |
| सुविधा | शहरों में उनके लिए 'रेस्ट पॉइंट्स' (विश्राम स्थल) और पीने के पानी/वॉशरूम की व्यवस्था। |
> निष्कर्ष: भारत को राजस्थान मॉडल (जिसने गिग वर्कर्स के लिए अलग कानून बनाया है) को राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने की जरूरत है, ताकि इन "अदृश्य वर्कफोर्स" को सम्मान और सुरक्षा मिल सके।
BY- www.facebook.com/pukarskilldevelopmentfoundation utrakhand
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