भारत में स्वयं सहायता समूह बनाना महिला सशक्तिकरण के लिए बहुत लाभकारी हो रहा है जिसका अंदाजा आप इस तरीके से ही लगा सकते हैं कि करीब हर राज्यों में हजारों के हिसाब से स्वयं सहायता समूह बने हुए हैं जिसे अंग्रेजी में सेल्फ हेल्प ग्रुप भी कहते हैं मतलब एस एच जी आदि बहुत मात्रा में बने हुए और कुछ भी इसमें #अंतरराष्ट्रीय और #राष्ट्रीयस्तर पर सफलतम #स्वरोजगार कर रहे हैं और देशों के मुकाबले स्वयं सहायता समूह भारत में किस तरीके से बनाए जाते हैं यह भी एक काबिले तारीफ है और आखिर भारत सरकार के विभाग राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और एक राष्ट्रीय एनजीओ हेल्प एज इंडिया द्वारा भी भारत में बहुत पहले वृद्ध महिलाओं के लिए स्वरोजगार करने के लिए स्वयं सहायता समूह बनाने की शुरुआत हुई थी आई जाने भारत में स्वयं सहायता समूह की प्रक्रिया जो एन आर एल एम मतलब राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा चलाए जा रहे हैं हर राज्य के #ब्लॉकऑफिस के माध्यम के द्वारा इनकी प्रक्रिया निम्न प्रकार है!
भारत में स्वयं सहायता समूह बनाने के लिए एनआरएलएम विभाग द्वारा जो कि हर राज्य के जिले में ब्लाक ऑफिस के माध्यम के द्वारा रिप्रेजेंट करने वाले अधिकारी द्वारा संबंधित गांव में जाकर स्वयं सहायता समूह खोले जाते हैं!
ग्राम शहर की बेरोजगार महिला या ग्रहणी जिनके पति सरकारी नौकरी में कार्यरत ना हो और इसके साथ महिला का पहचान पत्र और अस्थाई स्थान पहचान पत्र होना अनिवार्य है और इसके साथ संबंधित महिला का फोटो भी अनिवार्य!
3- भारत के राज्यों में स्वयं सहायता समूह वृद्ध महिलाओं के लिए सबसे पहले हेल्प एज एनजीओ द्वारा बनाए गए थे जबकि पूरे भारत में अब जो नई प्रक्रिया महिला सशक्तिकरण के लिए चली है वहां स्वयं सहायता समूह एनआरएलएम के अधिकारियों के माध्यम से प्रत्येक जिले के ब्लॉकों में एन आर एल एम के अधिकारियों द्वारा संबंधित ग्रामों के महिलाओं के साथ मीटिंग करके प्रत्येक ग्रामों में कम से कम 8 स्वयं सहायता समूह बनाए जाते हैं और फिर स्वयं सहायता समूह के पहचान पत्र और स्थाई पता पहचान पत्र फोटो के साथ लिए जाते हैं और फिर अधिकारी के मीटिंग के साथ सब स्वयं सहायता समूह को बैंकों के लिए अधिकारिक नाम दिया जाता है जिसके माध्यम से स्वयं सहायता समूह अपने ग्राम में स्वरोजगार या व्यवसाय करेंगे!
4- राष्ट्रीय आजीविका मिशन मतलब एनआरएलएम के अधिकारियों द्वारा ग्राम में स्वयं सहायता समूह की मीटिंग के द्वारा ही सभी समूहों के प्रस्ताव बनाए जाते हैं बैंकों में उन समूहों के नाम से अकाउंट खोलने के लिए और इसके साथ उससे हम सदा समूह की मुहर भी बनाई जाती है जिसके माध्यम से वह धन निकासी और जमा करने के लिए सही प्रक्रिया बैंकों के माध्यम से हो सके और पारदर्शिता के माध्यम से स्वयं सहायता समूह चलाया जा सके और इस प्रक्रिया में एन आर एल एम के अधिकारी के साइन और स्वयं सहायता समूह के सभी के साइन प्रस्ताव में होते हैं और तब जाकर यह प्रस्ताव बैंक द्वारा स्वीकृत करके अकाउंट खोला जाता है स्वयं सहायता समूह का!
5- स्वच्छता समूह अधिकारी खुलने के बाद सभी स्वयं सहायता समूह की मीटिंग भी होती है प्रत्येक साप्ताहिक और जरूरत के अनुसार और अधिकारी द्वारा इसमें स्वयं सहायता समूह के जो पद होते हैं उसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, आदि पद सृजन करे जाते हैं समूह में चलाने के लिए!
6- राज्य सरकार या एन आर एल एम अधिकारियों द्वारा बैंक के माध्यम से सभी स्वयं सहायता समूह को 6 महीने पूरे होने के बाद करीब प्रत्येक स्वयं सहायता समूह को Rs.15000 की राशि एक समूह को देते हैं अगले 6 महीने तक उसे प्रॉफिट में चलाने के लिए मतलब यह स्वयं सहायता समूह वह धन किसी को ब्याज में दे सकते हैं या स्वरोजगार करने के लिए दे सकते हैं अपने ग्राम में या समूह में या किसी व्यक्ति महिला आदि को स्वरोजगार करने के लिए और 6 महीने बाद उसका ब्याज 1% स्वयं सहायता समूह पर लगता है और बाकी ब्याज जैसा जैसा समूह द्वारा उनका धन किसी व्यक्ति को निश्चित ब्याज पर दिया जाता है उसका पूरा पैसा लेकर के बैंक में जमा किया जाता है और वही पैसा बैंक उनको वापस भी देता है 6 महीने के बाद बैंक उनको डबल पैसा देता है समूह को यही प्रक्रिया आगे चलती रहती है और 1 साल के बाद एन आर एल एम विभाग द्वारा समूह को 1 साल पूरा होने के बाद Rs.100000 दिया जाता है अगर समूह प्रॉफिट में चलता है और उस पर समूह पर 1% ब्याज और जब वह किसी के साथ व्यापार करता है #समूह तो वह कोई भी इंटरेस्टे उस पर लगा सकता है जिसे वह प्रॉफिट में चला सके और फिर अगले 1 साल तक बहुत इंटरेस्ट बैंक के खाते में जमा करना पड़ता है और संबंधित व्यक्ति का ब्याज भी और 1 साल पूरे होने के बाद भी सरकार की नई योजना जैसे करीब Rs.300000 भी स्वयं सहायता समूह को मिलते हैं अगर स्वयं सहायता समूह अपना प्रॉफिट में व्यापार या स्वरोजगार चलाता है या ग्राम में ब्याज में किसी को देते हैं आदि, #उत्तरप्रदेश , #उत्तराखंड में स्वयं सहायता समूह काफी अच्छा व्यवसाय कर रहे हैं, स्वयं सहायता समूह ग्रामीण महिलाओं को चलाना एक सफलतम व्यवसाय भी है क्योंकि सरकार इसमें कुछ धन स्वयं सहायता समूह के मेंबर को फ्री में भी मिलता है व्यापार चलाने के लिए परंतु वह तभी मिलता है अगर समूह अपना व्यवसाय सही तरीके से या सफलतम चलाता चलाता है उसी के बाद आगे सरकार धन देती है 1% ब्याज पर जो कि समूह के 1 साल में चुकाना पड़ता है और बाकी पैसे स्वयं सहायता समूह के होते हैं बैंक में जमा होकर के जो कि स्वयं सहायता समूह के मेंबर आपस में मीटिंग करके वह पैसे आपस में बांट भी सकते हैं और अगर आपको व्यवसाय में लगाना चाहते हैं तो उसको व्यवसाय में भी लगा सकते हैं चाहे वह पूरा समूह लगाएं चाहे वह व्यक्तिगत मेंबर लगाएं और उसका इंटरेस्ट हो पूरे समूह को देना पड़ता है और वह बैंक में जाता है जिस तरीके से यह पूरी प्रक्रिया अच्छी तरीके से चलती है और समूह प्रॉफिट में चलता है और स्वयं सहायता समूह में समृद्धि भी आती है!
6- अगर समूह की महिलाओं में कोई विवाद होता है इसमें एन आर एल एम के अधिकारी या तो समूह को समाप्त कर देते हैं या फिर संबंधित महिला समूह से निकाल दी जाती है और उसके जगह पर दूसरी रखी जाती है!
7- स्वयं सहायता समूह में शुरुआत के समय प्रत्येक मेंबर साप्ताहिक Rs.25 का योगदान करके महीने के Rs.100 का योगदान करता है और साल में 12 सो रुपए का और इसमें Rs.100 का योगदान प्रत्येक मेंबर द्वारा ग्राम के स्वयं सहायता समूह को भी प्रत्येक मेंबर द्वारा दिए जाते हैं जोकि किसी मेंबर के हटने के बाद उसके पैसे वापस उसको मिल जाते हैं जबकि उसके जगह पर स्थापित नहीं महिला उसके जगह पर योगदान कर दिया और अपना व्यवसाय करती है समूह में!
8- समूह में जो बैंक द्वारा समूह को धन दिया जाता है उसमें समूह की ही मेंबर द्वारा उस पैसे को इस्तेमाल भी कराया सकता है अपने व्यवसाय में या कोई भी मेंबर उस धन का इस्तेमाल किसी भी व्यवसाय करने के लिए दे सकता है जो भी उसका विश्वासपात्र होगी जहां से उसका ब्याज उसको मिल सके समय पर महीने भर और बैंक का ब्याज भी समय पर जमा होता रहे और अपना इंटरेस्ट जो भी वह लगाती है संबंधित व्यक्ति विशेष पर जो उसके धन पर व्यवसाय कर रहा है वह इंटरेस्ट उस संबंधित महिला का होता है जो समूह का मेंबर है!
9- उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में नाबार्ड बैंक द्वारा पोषित स्वयं सहायता समूह को बहुत लाभ पहुंचाया है और स्वयं सदा समूह आत्मनिर्भर भी हुए हैं ग्रामीण से लेकर मैदानों में और मशरूम पालन, मछली पालन, कृषि व्यवसाय डेयरी उद्योग ,मुर्गी पालन, एलईडी बल्ब उत्पादन, शहद उत्पादन कुटीर उद्योग आदि की पहले समूह के मेंबर द्वारा ट्रेनिंग ली जाती है उसके बाद बैंक या नाबार्ड बैंक द्वारा पोषित बैंकों में धन डाला जाता है ट्रेनिंग लेने के बाद तब वह लोन या धन स्वयं सहायता समूह को दिया जाता है इस तरीके से यह प्रक्रिया चलाई जाती है स्वयं सहायता समूह को समृद्ध बनाने के लिए और #ग्रामीणमहिला, #शहरीमहिला सशक्तिकरण के लिए !
10- स्वयं सहायता समूह ग्राम अच्छा चलने के बाद स्वयं सहायता समूह में से कोई भी महिला सक्रिय महिला बन सकती है जिसमें वह महिला अन्य स्थान पर जाकर ट्रेनिंग देने के साथ अपनी एक्स्ट्रा इनकम भी कर सकती है ट्रेनिंग देने के बाद भुगतान ले सकती है और सरकार द्वारा भी महीने की सैलरी भी दी जाती है सक्रिय महिलाओं के लिए अगर काम अच्छे तरीके से करती है अन्यथा #सक्रियमहिला ट्रेनिंग देने पर उसका भुगतान भी ले सकती है आदि सुविधाएं है सक्रिय महिला बनने के लिए ! SponsorBy;
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