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उत्तराखंड सरकार ने पारंपरिक ज्ञान और शिल्पों पर व्यक्तिगत पेटेंट के बजाय जीआई टैग (Geographical Indication) और बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के तहत संरक्षण की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया है।
वर्ष 2023 से 2026 के बीच जौनसार-बाबर और आसपास के जनजातीय व पर्वतीय क्षेत्रों के उत्पादों की सुरक्षा और संवर्धन के लिए निम्नलिखित कार्य किए गए हैं:
- उत्तराखंड लाल चावल (Jaunsar-Purola Red Rice): जौनसार-बाबर और उत्तरकाशी क्षेत्र के पुरोला बेल्ट में उगाए जाने वाले इस जैविक लाल चावल को जीआई सुरक्षा दायरे में लाया गया है।
- कृषि उत्पाद (मंडुआ, झंगोरा, गहत, तूर दाल): जौनसार और गढ़वाल के पारंपरिक मोटे अनाजों और दालों को जीआई टैग प्रदान किया गया है।
- बिच्छू बूटी कपड़ा (Himalayan Nettle): जनजातीय क्षेत्रों द्वारा बनाए जाने वाले हिमालयन नेट्टल फाइबर के प्राकृतिक इन्सुलेशन वाले वस्त्रों को कानूनी संरक्षण दिया गया है।
- जीआई उत्पाद गैलरी (2026): जुलाई 2026 में हल्द्वानी (उत्तराखंड फॉरेस्ट ट्रेनिंग अकादमी) में राज्य की पहली जीआई उत्पाद गैलरी खोली गई, जहाँ जौनसार और अन्य जनजातीय क्षेत्रों के जीआई-प्रमाणित कृषि उत्पादों और हस्तशिल्प को संरक्षित और प्रदर्शित किया गया है।
- 2025–26 की नई जीआई फाइलें: राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (UCOST) के पेटेंट सूचना केंद्र (PIC) द्वारा राज्य के 20 से अधिक नए कृषि और हस्तशिल्प उत्पादों को जीआई श्रेणी में पंजीकृत कराने के लिए पेटेंट महानियंत्रक (CGPDTM) के पास फाइल प्रक्रिया संचालित की जा रही है।
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