भारत में अभी भी पाच में से एक बेटी का बाल विवाह हो रहा हे ?


हाल ही में आई रिपोर्ट्स (जैसे राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण यानी NFHS और विभिन्न वैश्विक व राष्ट्रीय संगठन जैसे यूनिसेफ की रिपोर्ट) के अनुसार, भारत में अभी भी लगभग हर 5 में से 1 लड़की (यानी लगभग 20% से अधिक युवतियों) की शादी उनकी कानूनी उम्र यानी 18 वर्ष पूरी होने से पहले ही कर दी जाती है।

हालाँकि दशकों पहले की तुलना में देश में बाल विवाह के मामलों में गिरावट आई है (कभी यह दर 50% से ज्यादा थी), लेकिन स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है क्योंकि दुनिया की हर तीन 'बाल वधुओं' में से एक भारतीय होती है।

भारत के राज्यों में बाल विवाह की स्थिति को लेकर रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

1. सबसे खराब स्थिति वाले राज्य (उच्च दर)

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, देश के कुछ राज्यों में बाल विवाह की दर अभी भी राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है:

  • पश्चिम बंगाल, बिहार और त्रिपुरा: इन राज्यों में स्थिति सबसे गंभीर है, जहाँ 20 से 24 वर्ष की लगभग 40% या उससे अधिक युवतियों की शादी 18 साल से कम उम्र में हुई थी।
  • इसके अलावा झारखंड, असम, आंध्र प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना जैसे राज्यों में भी बाल विवाह के आंकड़े राष्ट्रीय औसत से ऊपर बने हुए हैं।

2. सबसे ज्यादा बाल वधुओं की संख्या वाले राज्य

चूंकि कुछ राज्यों की आबादी बहुत अधिक है, इसलिए वहां कम प्रतिशत होने पर भी बाल वधुओं की कुल संख्या बहुत ज्यादा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश की आधी से अधिक (लगभग 55%) बाल brides (बाल वधुएँ) अकेले इन पाँच राज्यों से हैं:

  • उत्तर प्रदेश
  • बिहार
  • पश्चिम बंगाल
  • महाराष्ट्र
  • मध्य प्रदेश

3. सबसे बेहतर स्थिति वाले राज्य

  • लक्षद्वीप, केरल, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में बाल विवाह की दर सबसे कम है, जहाँ यह दर नगण्य या बहुत ही न्यूनतम स्तर पर है।


बाल विवाह के मुख्य कारण (रिपोर्ट्स के अनुसार)

  • गरीबी: सबसे गरीब परिवारों की लड़कियों में बाल विवाह का जोखिम सबसे अधिक होता है (लगभग 40% से 50% गरीब परिवारों में)।
  • शिक्षा की कमी: जिन लड़कियों की शिक्षा छूट जाती है या जो स्कूल नहीं जा पातीं, उनमें बाल विवाह की संभावना अत्यधिक होती है।
  • ग्रामीण इलाके: शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में बाल विवाह की परंपरा और मामले आज भी ज्यादा दर्ज किए जाते हैं।

संक्षेप में कहें तो, हालाँकि देश में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता बढ़ी है और कानून (प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्ड मैरिज एक्ट) भी सख्त हैं, लेकिन सामाजिक कुप्रथाओं और आर्थिक लाचारी के कारण यह समस्या अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

क्या आप किसी विशेष राज्य के आंकड़ों के बारे में और अधिक विस्तार से जानना चाहते हैं?

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