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जौनसार-बावर क्षेत्र (उत्तराखंड) के आदिवासी समाज में पिनवे (या पिन्वे) एक बेहद पारंपरिक, स्वादिष्ट और ऊर्जा से भरपूर व्यंजन है। मंडावा (कोदा/रागी) और गेहूं के आटे के मेल से बनने वाली यह रेसिपी यहाँ के खान-पान की अनूठी पहचान है और यह जौनसार हिमाचल और जौनपुर उत्तराखंड में बहुत प्रसिद्ध और बड़े चाव से लोग कहते हैं!
इसे तैयार करने और परोसने का पारंपरिक तरीका इस प्रकार है:
सामग्री
* आटा: मंडावे (रागी) का आटा और गेहूं का आटा (बराबर मात्रा या स्वादानुसार)
* मोयन/चिकनाई: शुद्ध देसी घी
* मीठा: चीनी या चीनी का बूरा
* पानी और नमक: आवश्यकतानुसार
बनाने की विधि..
* आटा गूंथना: मंडावे और गेहूं के आटे को मिलाकर उसमें थोड़ा सा नमक और पानी डालकर अच्छी तरह गूंथ लिया जाता है।
* लोई और आकार: गूंथे हुए आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें बेल या हाथ से चपटा करके पारंपरिक तरीके से पकाया जाता है (कई जगहों पर इसे पूरी या कचौड़ी की तरह भी बनाया जाता है)।
* परोसने का तरीका: गरमा-गरम पिनवे को थाली में परोसा जाता है और इसके ऊपर से भरपूर मात्रा में शुद्ध देसी घी डाला जाता है। साथ ही, स्वाद को बढ़ाने के लिए इसमें चीनी या चीनी का बूरा मिलाया जाता है।
जौनसारी संस्कृति में यह व्यंजन न सिर्फ स्वाद के लिए बल्कि शरीर को गर्म रखने और भरपूर ऊर्जा देने के लिए जाना जाता है। इसे वहाँ के लोग बड़े चाव से एक पारंपरिक और पौष्टिक 'फास्ट फूड' या स्नैक के रूप में खाते हैं।
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