घोड़े का तापमान दौड़ते समय कैसे ठंडा होता है और घोड़े को कौनसी बीमारियाँ होती है अक्सर ?


दौड़ते समय घोड़े के शरीर का तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है। इसे नियंत्रित करने और डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) से बचाने के लिए घोड़े का शरीर एक खास प्राकृतिक प्रक्रिया का उपयोग करता है।

1. दौड़ते समय घोड़ा खुद को कैसे ठंडा रखता है?

घोड़े के ठंडे होने का मुख्य जरिया पसीना (Sweating) है। लगभग 70% गर्मी पसीने के वाष्पीकरण (Evaporation) के जरिए ही शरीर से बाहर निकलती है:

  • भारी मात्रा में पसीना निकलना: घोड़े की त्वचा पर इंसानों से भी ज्यादा पसीने की ग्रंथियां होती हैं। दौड़ते समय उसकी मांसपेशियां बहुत गर्मी पैदा करती हैं, जिसे बाहर निकालने के लिए शरीर तेजी से पसीना बहाता है।
  • लैथरिन प्रोटीन (Latherin): घोड़े के पसीने में लैथरिन नाम का एक विशेष प्रोटीन होता है। यह पसीने को घोड़े के मोटे बालों और त्वचा पर तेजी से फैला देता है (इसी कारण पसीना अक्सर सफेद झाग जैसा दिखता है)। इससे पसीना जल्दी भाप बनकर उड़ता है और शरीर तुरंत ठंडा होता है।
  • सांस लेने की गति बढ़ जाना (Panting): दौड़ते समय और रुकने के तुरंत बाद घोड़ा तेजी से सांस लेता है, जिससे उसके फेफड़ों के रास्ते से भी कुछ गर्मी बाहर निकलती है।

2. घोड़ों में अक्सर डिहाइड्रेशन क्यों होता है?

घोड़ों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) की समस्या बहुत आम है, इसके पीछे मुख्य वैज्ञानिक कारण निम्नलिखित हैं:

  1. अत्यधिक पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की हानि: घोड़े का पसीना सिर्फ पानी नहीं होता, उसमें इलेक्ट्रोलाइट्स (सोडियम, पोटेशियम, क्लोराइड और मैग्नीशियम) की मात्रा इंसानों के मुकाबले बहुत ज्यादा होती है। कड़ी मेहनत या गर्मी में एक घोड़ा 1 घंटे में 10 से 15 लीटर तक पसीना बहा सकता है।
  2. प्यास की भावना देर से जागना: इंसानों को जब डिहाइड्रेशन होता है, तो खून में नमक का सांद्रण (concentration) बढ़ता है और तुरंत प्यास लगती है। लेकिन घोड़ों के पसीने में नमक की मात्रा पहले से ही बहुत अधिक होती है। इस वजह से पसीना बहने के बाद भी उनके खून में नमक का संतुलन तुरंत नहीं बिगड़ता, जिससे उन्हें डिहाइड्रेट होने के बावजूद तुरंत प्यास का अहसास नहीं होता।
  3. एन्हाइड्रोसिस बीमारी (Anhidrosis): कई घोड़ों में एक बीमारी हो जाती है जिसे एन्हाइड्रोसिस (Anhidrosis या Non-sweating syndrome) कहते हैं। इसमें अधिक गर्मी या तनाव के कारण पसीने की ग्रंथियां काम करना बंद या कम कर देती हैं। पसीना न आने से घोड़ा अंदर से उबलने लगता है और गंभीर रूप से बीमार हो जाता है।
  4. पाचन तंत्र का बड़ा होना: घोड़े का पाचन तंत्र (आंतें) बहुत बड़ा होता है, जिसे सुचारू रूप से चलाने के लिए बहुत अधिक पानी की जरूरत होती है। पानी कम होने पर पाचन रुकने लगता है, जिससे उन्हें कोलिक (पेट दर्द/Colic) की जानलेवा समस्या भी हो सकती है। 

घोड़ों को डिहाइड्रेशन से कैसे बचाएं?

  • नमक और इलेक्ट्रोलाइट्स दें: साधारण पानी के साथ-साथ घोड़ों के आहार में नमक या इलेक्ट्रोलाइट पाउडर जरूर मिलाएं। इससे उन्हें समय पर प्यास लगेगी और शरीर में मिनरल्स बने रहेंगे।
  • दौड़ या वर्कआउट के बाद सही कूल-डाउन: दौड़ के तुरंत बाद घोड़े पर ठंडा पानी डालकर पसीना और पानी लकड़ी या खुरचनी (Sweat scraper) से तुरंत हटाएं।
  • ताजा और साफ पानी: काम करने के बाद जब घोड़ा थोड़ा सामान्य (Cool down) हो जाए, तो उसे पर्याप्त मात्रा में ताजा पानी पीने दें।

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