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17 सितंबर 2026 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून जिले के कालसी स्थित हरिपुर में नवनिर्मित पूजा घाट का उद्घाटन किया और ऐतिहासिक प्रथम यमुना स्नान में भाग लिया।
यह पहल इस क्षेत्र के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
हरिपुर (कालसी) का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व
* यमुनोत्री का प्रवेश द्वार: प्राचीन काल में हरिपुर को यमुनोत्री धाम का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता था।
* हरी प्रयाग और दूसरा हरिद्वार: इसे पूर्व समय में 'हरी प्रयाग' नाम से जाना जाता था और अपनी पवित्रता व धार्मिक गतिविधियों के कारण इसे 'दूसरा हरिद्वार' भी कहा जाता था।
* व्यावसायिक और धार्मिक केंद्र: यह क्षेत्र प्राचीन भारत में एक प्रमुख व्यापारिक मार्ग और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध था।
बौद्ध और वैदिक परंपराओं का संगम
* अशोक का कालसी शिलालेख: इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व और प्रसिद्धि के कारण ही सम्राट अशोक ने कालसी में अपने प्रसिद्ध शिलालेख (Ashokan Rock Edict) का निर्माण कराया था।
* बौद्ध भिक्षुओं की तपोस्थली: ऐतिहासिक उल्लेखों के अनुसार, यहाँ लगभग 2,000 बौद्ध भिक्षु रहते थे, जो धार्मिक अध्ययन, पठन-पाठन और तपस्या में लीन रहते थे।
* बाड़वाला (विकास नगर) में अश्वमेध यज्ञ: हरिपुर के समीप स्थित बाड़वाला में प्राचीन भारतीय राजाओं द्वारा अश्वमेध यज्ञ कराए गए थे, जिसके पुरातात्विक अवशेष आज भी इस बात का प्रमाण हैं कि यह क्षेत्र राजनीतिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध था।
पर्यटन, रोजगार और भविष्य की योजनाएं
मुख्यमंत्री द्वारा घाट उद्घाटन और मां यमुना मूर्ति का भी अनावरण कर गया का मुख्य उद्देश्य कालसी-हरिपुर क्षेत्र को एक प्रमुख धार्मिक-पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करना है। इससे:
* पर्यटन को बढ़ावा: यमुनोत्री यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु अब हरिपुर में रुककर यमुना पूजन और दर्शन कर सकेंगे।
* रोजगार एवं स्वरोजगार: नए पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित होने से स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, होमस्टे, परिवहन और स्थानीय हस्तशिल्प/व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे।
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