रामेश्वरम के पवित्र 22 गुप्त जल स्रोत ?

रामेश्वरम द्वीप पौराणिक कथाओं, अध्यात्म और प्राकृतिक चमत्कारों का एक अनूठा संगम है। यह द्वीप पूरी तरह से चारों ओर से खारे समुद्र से घिरा हुआ है, फिर भी यहाँ कई ऐसे गुप्त व पवित्र जल स्रोत (तीर्थम) हैं, जिनमें बिल्कुल मीठा, शुद्ध और औषधीय जल बहता है। पौराणिक शास्त्रों (जैसे स्कंद पुराण और सेतु पुराण) के अनुसार रामेश्वरम में कुल 64 तीर्थम हैं, जिनमें से 22 मुख्य जल कुंड रामनाथस्वामी मंदिर के परिसर के अंदर स्थित हैं। 1. समुद्र के बीच मीठे पानी का गुप्त चमत्कार: विल्लूंडी तीर्थम यह रामेश्वरम का सबसे विस्मयकारी और प्रसिद्ध गुप्त जल स्रोत है। * स्थान: रामेश्वरम मुख्य मंदिर से लगभग 7 किमी दूर समुद्र तट पर। * रहस्य: समुद्र के खारे पानी के ठीक बीच में एक छोटा सा मीठे पानी का कुआँ स्थित है। यहाँ जाने के लिए समुद्र के ऊपर एक पैदल पुल बनाया गया है। * पौराणिक कथा: मान्यता है कि जब माता सीता को अत्यधिक प्यास लगी, तो भगवान श्रीराम ने अपने धनुष-बाण (विल्लू) से धरती पर प्रहार किया था। बाण लगते ही समुद्र के बीच से मीठे पानी की धारा फूट पड़ी। 'विल्लूंडी' का अर्थ होता है — "बाण से बेधा गया स्थान"। 2. रामनाथस्वामी मंदिर के 22 पवित्र जल कुंड (22 Theerthams) मंदिर परिसर के भीतर स्थित ये 22 कुएँ या कुंड अपनी प्राकृतिक बनावट और पानी के गुणों के कारण रहस्यमयी माने जाते हैं। * 22 अलग-अलग स्वाद व तापमान: यद्यपि ये सभी कुएँ एक ही मंदिर परिसर में कुछ-कुछ दूरी पर स्थित हैं, फिर भी वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए यह कौतूहल का विषय है कि हर कुंड के पानी का स्वाद, घनत्व और तापमान एक-दूसरे से भिन्न है। * औषधीय गुण: इन कुओं के पानी में विभिन्न प्रकार के खनिज पाए जाते हैं, जिससे इनमें त्वचा रोग व अन्य शारीरिक बीमारियों को ठीक करने की क्षमता मानी जाती है। प्रमुख कुंड और उनकी मान्यताएँ: * कोडी तीर्थम (Kodi Theertham): इसे सभी 22 कुओं में सबसे पवित्र माना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने शिवलिंग के अभिषेक के लिए अपने बाण की नोक से यहाँ जल प्रकट किया था। * महालक्ष्मी तीर्थम: धन और समृद्धि प्रदान करने वाला पहला कुंड। * सावित्री, गायत्री व सरस्वती तीर्थम: ये तीन कुंड मनुष्य को दोषों, श्रापों और मानसिक विकारों से मुक्ति दिलाने वाले माने जाते हैं। * चक्र तीर्थम व शंख तीर्थम: पश्चाताप और आत्म-शुद्धि के प्रतीक जल स्रोत। 3. द्वीप पर स्थित अन्य प्रमुख गुप्त व पवित्र जल स्रोत | तीर्थम का नाम | स्थान / दूरी | पौराणिक महत्व व विशेषता | |---|---|---| | जटा तीर्थम (Jata Theertham) | धनुषकोडी मार्ग पर (लगभग 5 किमी) | रावण का वध करने के बाद भगवान श्रीराम ने अपने केश (जटाएँ) इसी जल कुंड में धोए थे। यह एक शांत तालाब के रूप में स्थित है। | | लक्ष्मण तीर्थम (Lakshmana Theertham) | मुख्य मंदिर से पश्चिम दिशा में | भगवान लक्ष्मण ने शिव पूजा अर्चना करने से पहले इस पवित्र तालाब का निर्माण कर इसमें स्नान किया था। | | एकांत राम तीर्थम (Ekanta Ram Theertham) | मंदिर के पास | मान्यता है कि लंका युद्ध की रणनीति बनाते समय श्रीराम ने इस शांत स्थान पर विश्राम किया था। यहाँ का कुआँ मीठे जल का स्रोत है। | | अग्नि तीर्थम (Agni Theertham) | रामनाथस्वामी मंदिर के पूर्व में स्थित समुद्र तट | यह समुद्र का ही भाग है, लेकिन इसे तीर्थम माना जाता है। माना जाता है कि माता सीता की अग्निपरीक्षा के बाद अग्निदेव ने अपने पाप धोने के लिए यहाँ स्नान किया था। | जल स्रोतों का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व भौगोलिक दृष्टि से रामेश्वरम एक मूंगा द्वीप (Coral Island) है। वैज्ञानिकों का मानना है कि द्वीप के निचले स्तर पर मौजूद प्राकृतिक चूना पत्थर (Limestone) और कोरल रीफ़ की परतें बारिश के पानी को फ़िल्टर करके शुद्ध मीठे पानी के एक्विफर (Aquifers) बना देती हैं, जिससे समुद्र से कुछ ही फीट की दूरी पर भी मीठा पानी मिलता है।

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