भारत में पूर्व प्रसिद्ध धर्म स्थल अब वर्तमान में कितने प्रसिद्ध हुए और अब भारतीय लोग कौन से नए प्रसिद्ध धर्म स्थलों की पूजा कर रहे हैं ?
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भारत में धार्मिक स्थलों और अध्यात्म को लेकर पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखा गया है समय बदलता है समय के साथ इतिहास भी बदलता है लेकिन पौराणिक अस्तित्व की शुद्धता सचे श्रद्धालुओं में ही रहती हे ।
पुराने प्रसिद्ध स्थल कहीं पीछे नहीं छूटे हैं, बल्कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर (कॉरिडोर, एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट्स) की वजह से वहां श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड तोड़ स्तर पर बढ़ गई है।
पर्यटन मंत्रालय और यात्रा प्लेटफॉर्म्स के आंकड़ों के अनुसार भारत में धार्मिक पर्यटन बहुत तेज़ी से बढ़ा है।
आंकड़े और बदलाव (शुरुआत कब से हुई?)
यह बड़ा बदलाव मुख्य रूप से 2021–2022 (कोविड महामारी के बाद) से शुरू हुआ और 2024-2025 तक अपने नए शिखर पर पहुंचा।
* घरेलू श्रद्धालुओं की संख्या: पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में धार्मिक यात्रा करने वाले घरेलू पर्यटकों की संख्या 2021 में करीब 67.7 करोड़ थी, जो 2022 से बढ़कर 140 करोड़ से अधिक हो गई।
* नया वर्ग (Gen-Z और Millennials): अब केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि 25-40 वर्ष के युवा और परिवार भी धार्मिक स्थलों की यात्रा बड़े पैमाने पर कर रहे हैं।
* आर्थिक योगदान: पर्यटन मंत्रालय की PRASHAD योजना और राज्य सरकारों के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वजह से यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में अरबों डॉलर का योगदान दे रहा है।
वर्तमान में सबसे प्रसिद्ध और नए उभरते धर्म स्थल
* अयोध्या राम मंदिर (उत्तर प्रदेश): जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा के बाद से अयोध्या भारत के सबसे बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में उभरा है। हर साल यहां करोड़ों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
* काशी विश्वनाथ - वाराणसी (उत्तर प्रदेश): 'काशी विश्वनाथ कॉरिडोर' बनने के बाद से यहां रिकॉर्ड तोड़ भीड़ आ रही है। वर्ष 2025 में काशी में करीब 7.2 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुंचे।
* खाटू श्याम जी (राजस्थान): हाल के वर्षों में खाटू श्याम जी मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में जबरदस्त उछाल देखा गया है।
* महाकालेश्वर - उज्जैन (मध्य प्रदेश): 'महाकाल लोक' कॉरिडोर बनने के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है।
* ओंकारेश्वर (मध्य प्रदेश) और तिरुचेंदूर (तमिलनाडु): ये स्थल भी नए उभरते हुए प्रमुख धार्मिक हॉटस्पॉट बने हैं।
क्या पुराने प्रसिद्ध स्थल पीछे छूट गए?
नहीं, पुराने तीर्थ स्थल पीछे नहीं छूटे हैं। तिरुपति बालाजी, माता वैष्णो देवी, स्वर्ण मंदिर (अमृतसर), जगन्नाथ पुरी, और उत्तराखंड के चार धाम (केदारनाथ, बद्रीनाथ) में भी पहले की तुलना में कई गुना अधिक लोग दर्शन करने पहुंच रहे हैं।
बदलाव सिर्फ इतना हुआ है कि पहले लोग कठिन यात्रा मानकर इन स्थानों पर जीवन में एक या दो बार जाते थे, जबकि अब बेहतर कनेक्टिविटी और 'स्पिरिचुअल टूरिज्म' के चलते लोग साल में कई बार इन स्थानों का रुख कर रहे हैं।
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