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हरिद्वार का इतिहास और कालसी (हरिपुर/हरिप्रयाग) से इसकी तुलना का ऐतिहासिक सच:
हर की पैड़ी का निर्माण: रावण नहीं, राजा विक्रमादित्य
हर की पैड़ी का निर्माण रावण ने नहीं कराया था। ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसका निर्माण प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व (1st Century BCE) में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने अपने भाई भर्तृहरि की याद में कराया था। भर्तृहरि ने गंगा तट पर तपस्या की थी, जिसके बाद विक्रमादित्य ने इन सीढ़ियों (पैड़ियों) का निर्माण कराया।
कालसी/हरिपुर प्राचीनकाल में अधिक प्रसिद्ध क्यों था?
आपका अवलोकन ऐतिहासिक दृष्टि से बिल्कुल सटीक है। प्राचीनकाल में कालसी (जौनसार-बाबर क्षेत्र) एक महान व्यापारिक, धार्मिक और प्रशासनिक केंद्र था:
* अशोक का शिलालेख (257 ईसा पूर्व): सम्राट अशोक ने कालसी में अपना 14वाँ मुख्य शिलालेख स्थापित किया, जो प्रमाणित करता है कि यह क्षेत्र मौर्य साम्राज्य के तहत एक प्रमुख केंद्र था।
* बौद्ध धर्म का केंद्र: चीनी यात्री ह्वेन त्सांग (7वीं शताब्दी) के विवरण के अनुसार, कालसी और आसपास के क्षेत्र (शुद्धनगर/कालसी) में कई बौद्ध मठ (विहार) थे और सैकड़ों बौद्ध भिक्षु यहाँ साधना करते थे।
* यमुनोत्री यात्रा मार्ग: कालसी यमुना और टोंस नदी के संगम पर स्थित होने के कारण यमुनोत्री और केदारनाथ-बद्रीनाथ जाने वाले तीर्थयात्रियों का मुख्य केंद्र था।
हरिद्वार कब और कैसे आगे निकला? (ऐतिहासिक आंकड़े)
| समय/काल | ऐतिहासिक घटनाएँ व प्रसिद्धि का कारण |
|---|---|
| 300-200 BCE | हरिद्वार को 'मायापुरी' कहा जाता था, लेकिन कालसी के मुकाबले राजनीतिक महत्त्व कम था। |
| 1st Century BCE | राजा विक्रमादित्य द्वारा हर की पैड़ी का निर्माण; महाकुंभ की परंपरा का संस्थागत रूप लेना। |
| 634 CE | ह्वेन त्सांग ने हरिद्वार (मो-यू-लो / मयूरपुर) का दौरा किया और लिखा कि यहाँ गंगा स्नान के लिए हजारों श्रद्धालु आते थे। |
| 1398 CE | तैमूर लंग ने हरिद्वार पर आक्रमण किया, जो दर्शाता है कि 14वीं शताब्दी तक यह एक समृद्ध और प्रसिद्ध तीर्थ बन चुका था। |
| 16वीं-19वीं शताब्दी | अकबर के समय गंगाजल 'आब-ए-हयात' के रूप में आगरा/दिल्ली भेजा जाता था। 1854 में अपर गंगा नहर (Upper Ganges Canal) के निर्माण और 1881 में रेलवे लाइन बिछाने के बाद हरिद्वार वैश्विक तीर्थ स्थल बन गया। |
कालसी के पिछड़ने और हरिद्वार के प्रसिद्ध होने के मुख्य कारण
* भौगोलिक बदलाव: हरिद्वार वह स्थान है जहाँ गंगा मैदानी इलाकों में प्रवेश करती है। मैदानी इलाकों से जुड़ने के कारण यहाँ पहुंचना बेहद आसान था।
* कुंभ मेला और धार्मिक महत्त्व: कुंभ पर्व और गंगा स्नान के महात्म्य ने हरिद्वार को पूरे भारत के सनातन धर्मावलंबियों का केंद्र बना दिया।
* मार्गों का पुनर्गठन: ब्रिटिश काल में रेलवे और पक्की सड़कों के निर्माण ने हरिद्वार को सीधा दिल्ली और उत्तर भारत से जोड़ दिया, जबकि कालसी पहाड़ों की तलहटी में अलग-थलग पड़ गया।
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