इंडोनेशिया के कोरोवाई (Korowai) जनजाति का इतिहास ?

**इतिहास और प्राचीनता** * **हजारों साल पुराना इतिहास:** कोरोवाई जनजाति न्यू गिनी द्वीप के मूल निवासियों (Melanesians) का हिस्सा है। इस क्षेत्र में मानव आबादी का इतिहास 40,000 से 50,000 वर्ष पुराना माना जाता है। * **1974 तक बाहरी दुनिया से अंजान:** यह जनजाति सदियों तक बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटी रही। मार्च 1974 में पहली बार पश्चिमी शोधकर्ताओं और मिशनरियों ने इनसे संपर्क किया था। उस समय तक वे पाषाण युग (Stone Age) जैसी जीवनशैली जी रहे थे और पत्थरों व हड्डियों के औजारों का उपयोग करते थे। * **आबादी:** इनकी कुल जनसंख्या लगभग 3,000 से 4,000 के आसपास है। **40 से 50 मीटर ऊँचे घरों की सच्चाई** * **सामान्य घर बनाम ऊँचे घर:** कोरोवाई परिवार आमतौर पर 8 से 15 मीटर (25 से 50 फीट) ऊँचे ट्री-हाउस में रहते हैं। * **40-50 मीटर वाले घर:** 40 से 50 मीटर ऊँचे घर बहुत दुर्लभ और विशेष होते हैं। इन्हें आमतौर पर युवा पुरुषों द्वारा अपनी कुशलता दिखाने, कबीले में प्रतिष्ठा बढ़ाने या किसी बड़े उत्सव के लिए बनाया जाता था। * **बनाने का तरीका:** ये घर बरगद या सागो के विशाल पेड़ों के ऊपरी हिस्से पर लकड़ी, बांस, रतन की बेलों और सागो ताड़ के पत्तों से बिना किसी कील/हथौड़े के बनाए जाते हैं। **आज आधुनिक दुनिया में जीवन यापन** वर्तमान समय में कोरोवाई जनजाति के जीवन में बड़े बदलाव आए हैं: * **गाँवों में बसावट:** इंडोनेशियाई सरकार और मिशनरियों के प्रयासों से अधिकांश कोरोवाई लोग अब जंगलों के ट्री-हाउस छोड़कर नदियों के किनारे बसे सरकारी गाँवों (जैसे Yaniruma, Mabül) में रहने लगे हैं। * **पारंपरिक और आधुनिक अर्थशास्त्र:** * जो लोग अभी भी गहरे जंगलों में रहते हैं, वे शिकारी-संग्राहक (Hunter-Gatherers) हैं। उनका मुख्य भोजन 'सागो' (Sago) का गूदा, जंगली सुअर, पक्षी और कीड़े हैं। * जो लोग गाँवों के पास आ चुके हैं, वे अब कपड़ों का इस्तेमाल करते हैं, दुकानें चलाते हैं और रुपयों का लेनदेन समझते हैं। * **टूरिज्म और काम:** कई युवा कोरोवाई अब जंगलों में आने वाले विदेशी पर्यटकों और डॉक्यूमेंट्री टीमों के लिए गाइड या पोर्टर (सामान उठाने वाले) के रूप में काम करके पैसे कमाते हैं। * **शिक्षा:** नई पीढ़ी के बच्चे अब प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं और कुछ छात्र शहरों में उच्च शिक्षा भी ले रहे हैं।

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