चीन में सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे को समझने के लिए **नस्लीय/जातीय समूहों (Ethnicities)** और **हुकोउ (Hukou) प्रणाली** के बीच के अंतर को समझना आवश्यक है। बाहरी दुनिया में अक्सर यह भ्रम रहता है कि चीन में 'जाति' (Caste) प्रथा नहीं है, लेकिन वहां प्रशासनिक स्तर पर एक ऐसा विभाजन लागू है जो वर्ग और अवसरों में गहरा भेदभाव पैदा करता है।
## 1. चीन में कितनी जातियाँ (नस्लीय समूह) हैं?
चीन आधिकारिक तौर पर **56 नस्लीय/जातीय समूहों (Ethnic Groups / 民族 - Mínzú)** को मान्यता देता है:
* **हान चीनी (Han Chinese):** यह चीन की सबसे बड़ी आबादी है, जो कुल जनसंख्या का लगभग **91% से 92%** हिस्सा बनाती है।
* **अल्पसंख्यक समूह (55 Minorities):** शेष 8% से 9% आबादी में 55 अन्य मान्यता प्राप्त अल्पसंख्यक समूह आते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
* **तिब्बती (Tibetans)**
* **उइगर (Uyghurs)**
* **हुई (Hui - मुस्लिम चीनी)**
* **झांग (Zhuang)**
* **मंचू (Manchu)**
* **मंगोल (Mongols)**
> **नोट:** भारत जैसी धार्मिक और सामाजिक 'जाति प्रथा' (Caste System) चीन में ऐतिहासिक रूप से नहीं रही है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर नस्लीय अल्पसंख्यकों के साथ सांस्कृतिक और राजनीतिक असमानता का व्यवहार किया जाता है।
>
## 2. हुकोउ (Hukou) सिस्टम क्या है और यह कैसे काम करता है?
**हुकोउ (戶口 / Hukou)** चीन की परिवार पंजीकरण प्रणाली (Household Registration System) है, जिसे 1958 में माओ त्से तुंग के शासनकाल के दौरान लागू किया गया था।
यह प्रणाली कागजों पर एक 'आवास प्रमाण पत्र' जैसी दिखती है, लेकिन व्यावहारिक रूप से यह **चीन का आधुनिक "प्रशासनिक जाति वर्ग" (Institutional Caste System)** बन चुकी है।
### यह कैसे काम करता है?
हुकोउ के तहत जन्म लेते ही नागरिक को दो में से एक श्रेणी में पंजीकृत किया जाता है:
1. **ग्रामीण हुकोउ (Rural Hukou)**
2. **शहरी हुकोउ (Urban Hukou)**
यह पंजीकरण जन्म के आधार पर तय होता है (माता-पिता के हुकोउ के अनुसार) और इसे बदलना बेहद कठिन होता है।
### हुकोउ प्रणाली के मुख्य प्रभाव:
* **सरकारी सुविधाओं का वितरण:**
* **शहरी हुकोउ धारक:** उन्हें बेहतर सरकारी स्कूल, विश्वस्तरीय अस्पताल, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार के अवसर मिलते हैं।
* **ग्रामीण हुकोउ धारक:** यदि वे काम की तलाश में शहरों में जाते हैं, तो भी उन्हें 'प्रवासी' (Migrant Worker) माना जाता है। वे शहर में रहने के बावजूद वहां के सरकारी अस्पतालों, बच्चों के अच्छे स्कूलों या पेंशन योजनाओं का लाभ नहीं उठा सकते।
* **द्वितीय श्रेणी का नागरिक (Second-Class Citizens):**
चीन के शहरों में लगभग 30 करोड़ ग्रामीण प्रवासी मजदूर रहते हैं। वे बुनियादी ढांचा और फैक्ट्रियां बनाते हैं, लेकिन हुकोउ के कारण उन्हें शहरों में स्थायी अधिकार नहीं मिलते। उनके बच्चों को शहरी सरकारी स्कूलों में दाखिला नहीं मिलता, जिससे उन्हें अपने बच्चों को गांवों में बुजुर्ग दादा-दादी के पास छोड़ना पड़ता है (जिन्हें *Left-behind children* कहा जाता है)।
* **सस्ती मजदूरी और नियंत्रण का साधन:**
हुकोउ प्रणाली सरकार को दो बड़े फायदे देती है:
1. शहरों में सस्ती मजदूरी की आपूर्ति बनी रहती है क्योंकि ग्रामीण प्रवासियों के पास मोलभाव करने के कानूनी अधिकार नहीं होते।
2. सरकार यह तय कर सकती है कि किस शहर में कितने लोग बस सकते हैं, जिससे आबादी की आवाजाही पर कड़ा नियंत्रण रहता है।
## 3. चीन का दावा बनाम जमीनी हकीकत
* **चीन का प्रचार:** अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चीन दावा करता है कि उसके देश में कोई 'जाति व्यवस्था' या वर्ग-भेद नहीं है और सभी नागरिक समान हैं।
* **दुनिया का नजरिया:** मानवाधिकार विशेषज्ञों और समाजशास्त्रियों का मानना है कि **हुकोउ प्रणाली ही चीन की जन्म-आधारित सामाजिक जाति व्यवस्था है।** फर्क सिर्फ इतना है कि यह धर्म या परंपरा पर आधारित न होकर पूरी तरह **कम्युनिस्ट पार्टी की नीति और राज्य नियंत्रण** पर आधारित है।
यद्यपि हाल के वर्षों में चीनी सरकार ने छोटे शहरों में हुकोउ नियमों में कुछ ढील देने की घोषणा की है, लेकिन बीजिंग और शंघाई जैसे बड़े और समृद्ध शहरों में यह प्रणाली आज भी उतनी ही सख्त और भेदभावपूर्ण है।
### प्राचीन चीन की चार-स्तरीय सामाजिक व्यवस्था निम्न प्रकार थी;
मध्यकालीन चीन का **"सबांग सामाजिक वर्गीकरण" (Four Occupations - 士农工商 - Shì Nóng Gōng Shāng)** दर्शाया गया है।
यह भारत की तरह धर्म या जन्म-आधारित छुआछूत वाली 'जाति प्रथा' नहीं थी, बल्कि कन्फ्यूशियस (Confucius) विचारधारा पर आधारित **व्यवसाय और सामाजिक योगदान (Social Status by Occupation)** के अनुसार तय किया गया एक सामाजिक ढांचा था।
इसमें राजा (Tianzi - "स्वर्ग का पुत्र") सबसे ऊपर होता था, और उसके नीचे समाज को मुख्य रूप से 4 वर्गों/स्तरों में बांटा गया था:
### 1. शी (Shi - 士): विद्वान, अधिकारी और कुलीन वर्ग
* **स्थान:** पिरामिड में पहला (सबसे ऊपर)
* **काम:** ये पढ़े-लिखे विद्वान, सिविल सेवक, प्रशासनिक अधिकारी और राजनीतिक सलाहकार होते थे।
* **यह वर्ग कैसे काम करता था:** चीन की प्रसिद्ध परीक्षा प्रणाली (Imperial Examinations) पास करके लोग इस वर्ग में शामिल होते थे। समाज में इन्हें सबसे ज्यादा सम्मान और अधिकार प्राप्त थे क्योंकि ये देश के प्रशासन और नैतिकता को संभालते थे।
### 2. नोंग (Nong - 农): किसान और खेतीहर
* **स्थान:** पिरामिड में दूसरा
* **काम:** फसलें उगाना, भोजन का उत्पादन करना और पशुपालन।
* **यह वर्ग कैसे काम करता था:** प्राचीन चीन में किसानों को व्यापारी और कारीगरों से भी **ऊंचा स्थान** दिया गया था। चीनी दर्शन के अनुसार, किसान भोजन पैदा करते हैं जो पूरे देश और राजा के अस्तित्व के लिए सबसे बुनियादी और जरूरी चीज है। हालांकि ये आर्थिक रूप से गरीब होते थे, लेकिन सामाजिक रूप से इनका स्थान सम्मानित था।
### 3. गोंग (Gong - 工): कारीगर और शिल्पकार
* **स्थान:** पिरामिड में तीसरा
* **काम:** बर्तन, हथियार, कपड़े, औजार, और अन्य सामान का निर्माण करना।
* **यह वर्ग कैसे काम करता था:** ये लोग कच्चे माल को उपयोगी वस्तुओं में बदलते थे। किसानों की तरह ये भी कुछ नया और उपयोगी बनाते थे, इसलिए इन्हें व्यापारियों से ऊपर लेकिन किसानों से नीचे माना जाता था।
### 4. शांग (Shang - 商): व्यापारी और सौदागर *(तस्वीर के निचले हिस्से में जो कटा हुआ है)*
* **स्थान:** पिरामिड में चौथा (सबसे नीचे)
* **काम:** सामान की खरीद-बिक्री करना, व्यापार करना और धन कमाना।
* **यह वर्ग कैसे काम करता था:** कन्फ्यूशियस सिद्धांत के अनुसार, व्यापारी खुद कोई नई चीज़ पैदा नहीं करते, बल्कि दूसरों के श्रम से मुनाफा कमाते हैं। इसलिए प्राचीन चीन में अमीर होने के बावजूद व्यापारियों को सामाजिक रूप से सबसे निचला स्थान दिया जाता था। उन पर कई सरकारी प्रतिबंध होते थे और उनके बच्चे प्रशासनिक परीक्षाएं (Shi बनने के लिए) नहीं दे सकते थे।
### यह व्यवस्था भारत की जाति व्यवस्था से कैसे अलग थी?
1. **जन्म आधारित नहीं:** यह प्रणाली जन्म से तय नहीं होती थी। अगर किसी किसान का बेटा पढ़ाई कर ले, तो वह परीक्षा पास करके 'शी' (Shi - अधिकारी) बन सकता था।
2. **पैसों से सामाजिक दर्जा तय नहीं होता था:** व्यापारी बेहद अमीर होते थे, फिर भी सामाजिक सम्मान में गरीब किसान से नीचे आते थे।
3. **आधुनिक चीन में स्थिति:** 20वीं सदी के बाद और कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के आने से यह प्राचीन 4-वर्ग प्रणाली खत्म हो चुकी है। अब इसकी जगह आधुनिक प्रशासनिक वर्गीकरण जैसे **हुकोउ (Hukou) प्रणाली** (शहरी बनाम ग्रामीण) ने ले ली है।
टिप्पणियाँ