अंग प्रत्यारोपण क्षेत्र में हो रही है वृद्धि ?

भारत में अंग प्रत्यारोपण (Organ Transplantation) के क्षेत्र में हाल के वर्षों में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली है। 2025 में भारत ने पहली बार एक ही वर्ष में **20,000 से अधिक अंग प्रत्यारोपण** (20,138) का रिकॉर्ड आंकड़ा पार किया है। 2013 में यह संख्या 5,000 से भी कम थी, जो इस क्षेत्र में चौगुनी से अधिक वृद्धि को दर्शाती है। भारत कुल अंग प्रत्यारोपण के मामले में वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर और जीवित दाता (Living Donor) प्रत्यारोपण में दुनिया में पहले स्थान पर बना हुआ है। ### वृद्धि के प्रमुख कारण * **संस्थागत ढांचा और NOTTO:** राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO), ROTTO और SOTTO के नेटवर्क ने देशभर में अंगों के आवंटन और ट्रैकिंग को पारदर्शी और त्वरित बनाया है। * **डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-प्रत्यारोपण:** आधार-आधारित डिजिटल रजिस्ट्रेशन पोर्टल (e-Transplant) के ज़रिए लाखों नागरिकों ने मृत्यु के बाद अंगदान का संकल्प लिया है। * **ग्रीन कॉरिडोर (Green Corridor):** शहरों में अंगों को अस्पताल तक कम समय में पहुँचाने के लिए ट्रैफ़िक-मुफ़्त विशेष कॉरिडोर और हवाई परिवहन व्यवस्था कारगर साबित हुई है। * **मृतक अंगदान में उछाल:** 'कैडवेरिक' या मृतक दाता प्रत्यारोपण में 2013 के 837 की तुलना में 2025 तक चार गुना से अधिक की वृद्धि (3,526) हुई है। * **राज्यों की पहल:** तमिलनाडु जैसे राज्यों द्वारा अंगदाताओं को राजकीय सम्मान प्रदान करने और नीतिगत प्रोत्साहन देने से जन-जागरूकता में भारी बढ़ोतरी हुई है। ### प्रमुख चुनौतियाँ और आगे की राह * **मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर:** रिकॉर्ड वृद्धि के बावजूद, भारत में अंग विफलता (विशेषकर किडनी और लिवर failure) के मरीजों की तुलना में उपलब्ध अंगों की उपलब्धता बहुत कम है। * **इलाज का खर्च:** अधिकांश प्रत्यारोपण निजी अस्पतालों में होते हैं, जिससे यह सामान्य वर्ग के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण बना रहता है। * **जागरूकता की आवश्यकता:** ग्रामीण और छोटे शहरों में अभी भी मृतक अंगदान को लेकर हिचकिचाहट और भ्रांतियां मौजूद हैं।

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