दुनिया की जानी-मानी समाचार व शोध एजेंसी **रॉयटर्स (Reuters)** की खोजी रिपोर्ट में बहुराष्ट्रीय (Multinational) खाद्य कंपनियों की लॉबिंग और भारत में पैक्ड फूड प्रोडक्ट्स के मानकों को लेकर कई खुलासे हुए हैं।
इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
### 1. फ्रंट-ऑफ-पैक वॉर्निंग लेबल (Front-of-Pack Warning Labels) पर दबाव
* **नियम में ढील:** भारतीय खाद्य सुरक्षा regulator (FSSAI) पहले पैकेज्ड फूड (जैसे चिप्स, कोल्ड ड्रिंक्स आदि) के पैकेट के सामने लाल चेतावनी (Warning Labels) लगाने की योजना बना रहा था, जिससे ग्राहकों को उच्च शक्कर, नमक या वसा (fat) की जानकारी तुरंत मिल सके।
* **कारपोरेट लॉबिंग:** रॉयटर्स द्वारा की गई जांच में ऑडियो रिकॉर्डिंग्स और दस्तावेजों के हवाले से बताया गया कि कोक, पेप्सी और नेस्ले जैसी बड़ी कंपनियों और उनके ग्रुप्स ने इस कड़े नियम का विरोध किया और इसे लागू होने से रुकवाया।
* **दोहरा रवैया:** यही कंपनियां यूरोप और कई पश्चिमी देशों में स्वेच्छा से पैकेट के आगे पोषण और चेतावनी से जुड़े लेबल लगाती हैं, लेकिन भारत में वे इसका विरोध कर रही हैं।
### 2. एक ही ब्रांड, अलग-अलग रेसिपी (Double Standards in Ingredients)
* **भारत में ज्यादा शुगर/कैलोरी:** रिपोर्ट में उदाहरण दिया गया कि फैंटा (Fanta) का जो केन लंदन में बिकता है उसमें लगभग 63 कैलोरी होती है, जबकि वही साइज का केन भारत में बिकने पर उसमें तीन गुना तक ज्यादा शुगर और लगभग 185 कैलोरी होती है।
* लोकल नियमों, ग्राहकों के स्वाद और लागत का हवाला देकर कंपनियां भारत में अधिक शुगर और लो-क्वालिटी फॉर्मूला इस्तेमाल करती हैं।
### 3. भारतीय उपभोक्ताओं के लिए क्या संदेश है?
* **जागरूकता जरूरी है:** विदेशी या नामचीन ब्रांड्स का मतलब यह नहीं है कि वे स्वास्थ्य के लिहाज से पूरी तरह सुरक्षित हैं।
* **सामग्री की सूची जांचें:** पैकेट के पीछे लिखे न्यूट्रिशन टेबल (Nutrition Facts) को खुद पढ़ें—विशेषकर **एडेड शुगर (Added Sugar), सोडियम (Sodium), और ट्रांस फैट (Trans Fat)** की मात्रा जरूर देखें।
* **प्रोसेस्ड फूड से बचाव:** भारत में लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां (जैसे डायबिटीज, मोटापा और ब्लड प्रेशर) तेजी से बढ़ रही हैं। पैकेज्ड जंक फूड के अत्यधिक सेवन से बचना ही समझदारी है।
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