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मानसून के मौसम में पहाड़ी इलाकों (हिमाचल, उत्तराखंड और उत्तर-पूर्व) की वादियों में ठंडक बढ़ जाती है। ऐसे मौसम में पहाड़ों का पारंपरिक, न्यूट्रिशियस और गर्माहट देने वाला खाना खाने का अपना ही आनंद है।
मानसून में आपको पहाड़ों के ये 7 पारंपरिक व्यंजन जरूर ट्राई करने चाहिए:
| पहाड़ी भोजन | क्षेत्र | खासियत और क्यों खाएं? |
|---|---|---|
| **1. सिड्डू (Siddu)** | हिमाचल प्रदेश | स्टीम्ड (भाप में पका) गेहूं का पराठा, जिसमें अखरोट, खसखस या उड़द दाल की स्टफिंग होती है। इसे देसी घी के साथ खाया जाता है, जो शरीर को तुरंत गर्माहट देता है। |
| **2. गहत की दाल (Kulath Dal)** | उत्तराखंड | गहत (कुल्थी) की दाल तासीर में गर्म होती है। मानसून की ठंडक में इसका सूप जैसा रसा या फानू (पिसी दाल की करी) शरीर को वायरल और सर्दी से बचाता है। |
| **3. बब्ब्रू / भटूरे (Babru)** | हिमाचल प्रदेश | उड़द दाल की स्टफिंग वाले गहरे तले हुए कचौड़ी जैसे पूड़े। बारिश में गरमा-गरम चाय और इमली की चटनी के साथ यह बेहतरीन स्नैक है। |
| **4. भांग की चटनी** | उत्तराखंड | भुने हुए भांग के बीज (non-psychoactive), नीबू के रस, पुदीने और हरी मिर्च से बनी चटनी। यह पाचन दुरुस्त रखती है और हर पहाड़ी खाने का स्वाद बढ़ा देती है। |
| **5. मडुआ (रागी) की रोटी और झंगोरे की खीर** | उत्तराखंड | मडुआ (मिल्लेट) आयरन और फाइबर से भरपूर होता है। ठंडे मौसम में मडुआ की रोटी देसी घी के साथ और मिठास के लिए सांवा चावल (झंगोरा) की खीर मानसून के लिए बेस्ट है। |
| **6. थुकपा और मोमोज (Thukpa)** | सिक्किम / लद्दाख | सब्जियों और नूडल्स से भरा गरमा-गरम तीखा सूप (थुकपा)। बारिश में वादियों के बीच यह सूप शरीर को अंदर तक राहत पहुंचाता है। |
| **7. आलू के गुटके** | उत्तराखंड | उबले हुए पहाड़ी आलू, जिन्हें जख्या (पहाड़ी तड़का) और सरसों के तेल में क्रिस्पी फ्राई किया जाता है। इसे पहाड़ी रायते और कड़क अदरक चाय के साथ खाया जाता है। |
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