समाज के लिए लायक बनो समाज होने को ही पूछता है उनको ही बोलने की जगह देता है आज समाज बदल रहा है ?

आज इन बातों ने बहुत कम शब्दों में आज के 21वीं सदी के समाज की सबसे बड़ी विडंबना को सामने रख दिया है। यह बिल्कुल सच है कि **"समाज उगते सूरज को सलाम करता है। "** जो समाज के लिए 'लायक' है, जिसके पास कोई पद, पैसा या प्रभाव है, समाज उसी की सुनता है और उसे ही मंच देता है। लेकिन आज इस व्यवस्था में एक बहुत बड़ा विरोधाभास पैदा हो गया है, जिसे आपने तीन मुख्य बिंदुओं में समेटा है: ### 1. एआई (AI) का जमाना और रोजगार का संकट एक तरफ हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिकता के दौर में जी रहे हैं, जहां मशीनें इंसानों का काम कर रही हैं। दूसरी तरफ, हमारे लाखों डिग्रियां लिए युवा रोजगार के लिए भटक रहे हैं। यह एक ऐसा समाज बन गया है जहां तकनीक तो आगे बढ़ रही है, लेकिन युवाओं का भविष्य धुंधला हो रहा है। पढ़ाई और असल बाजार की जरूरत के बीच एक बहुत बड़ी खाई बन चुकी है। ### 2. 'अनुभव' और 'सही दिशा' की कमी आज सूचना (Information) का सैलाब है। सोशल मीडिया पर हर कोई ज्ञान दे रहा है, लेकिन **सच्चे अनुभव (Experience) और समाज को सही दिशा देने वाले मार्गदर्शकों (Mentors) की भारी कमी है।** युवा पीढ़ी को यह बताने वाला कोई नहीं है कि केवल पैसा कमाना या रील बनाना ही सफलता नहीं है, बल्कि समाज के प्रति आपकी क्या जिम्मेदारी है। ### 3. 'लायक' बनने की नई परिभाषा आज समाज जिसे 'लायक' समझकर बोलने की जगह दे रहा है, कई बार वे लोग समाज को खोखला कर रहे हैं (जैसे सतही सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स)। वहीं, जो लोग सच में जमीन पर रहकर समाज को कुछ दे सकते हैं, उन्हें पीछे धकेल दिया जाता है। ## समाज को आगे बढ़ाने के लिए अब क्या जरूरी है? अगर 21वीं सदी के इस समाज को बदलना है और युवाओं को बेरोजगार से 'रोजगार देने वाला' या 'योग्य' बनाना है, तो कुछ बुनियादी बदलाव करने होंगे: * **डिग्री नहीं, हुनर (Skills) की पूजा हो:** शिक्षा व्यवस्था को केवल रटने वाली डिग्रियों से निकालकर व्यावहारिक ज्ञान और एआई (AI) के दौर में टिकने वाले हुनर (जैसे कोडिंग, क्रिटिकल थिंकिंग, समस्या का समाधान ढूंढना) की तरफ मुड़ना होगा। * **अनुभवी लोगों का आगे आना:** समाज के बुजुर्गों और अनुभवी लोगों को केवल घर पर बैठने के बजाय युवाओं का हाथ थामना होगा। उन्हें अपनी असफलताओं और सफलताओं से सीख देकर सही रास्ता दिखाना होगा। * **युवाओं को 'उपभोक्ता' से 'सर्जक' बनना होगा:** युवाओं को सिर्फ रील देखने वाला (Consumer) बनने के बजाय समाज की समस्याओं को हल करने वाला (Creator/Problem Solver) बनना होगा। जो समाज की समस्या हल करेगा, समाज उसकी कद्र करने के लिए मजबूर हो जाएगा। > **"लायक बनने का मतलब सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि खुद को इस काबिल बनाना है कि जब आप समाज के बीच खड़े हों, तो आपकी बातों में गहराई और आपके काम में समाज का हित दिखे।"** > यह बदलाव रातों-रात नहीं आएगा, लेकिन इस पर बात करना और युवाओं को सही दिशा देना ही पहला कदम है। आपके अनुसार, हमारे युवाओं को इस एआई के दौर में दिशाहीन होने से बचाने के लिए सबसे पहला बदलाव कहां से शुरू होना चाहिए—परिवार से, स्कूल-कॉलेजों से या हमारी सरकारों की नीतियों से?

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