महान ग्रंथ महाभारत के अनुसार कुरुक्षेत्र के युद्ध का क्षेत्र केवल एक छोटा सा मैदान नहीं था, बल्कि यह एक बहुत विशाल धार्मिक और भौगोलिक क्षेत्र था। आइए आपके सभी सवालों के जवाब वैज्ञानिक और ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर जानते हैं:
### 1. 5 योजन कितना क्षेत्रफल होता है?
प्राचीन भारत में दूरी मापने के लिए 'योजन' इकाई का प्रयोग होता था।
* **1 योजन** का मान लगभग **8 मील (यानी करीब 12.8 किलोमीटर)** माना जाता है।
* महाभारत और पुराणों के अनुसार, युद्ध भूमि का मुख्य विस्तार **5 योजन** था।
अगर हम इसे आज की गणितीय गणना (लंबाई और चौड़ाई) में बदलें, तो 5 योजन का मतलब लगभग **40 मील (करीब 64 किलोमीटर)** का विस्तार होता है। इस पूरे क्षेत्र को प्राचीन काल में 'समंतपंचक' या 'कुरुक्षेत्र की वेदी' कहा जाता था।
### 2. महाभारत युद्ध कितने क्षेत्रफल में हुआ था और आज वह स्थान कहाँ है?
* **कहाँ है यह स्थान:** आज के समय में यह स्थान भारत के **हरियाणा राज्य का कुरुक्षेत्र जिला** और उसके आसपास का इलाका (जिसमें कैथल, करनाल, जींद और पानीपत के कुछ हिस्से शामिल हैं) है।
* **कुल क्षेत्रफल:** कुरुक्षेत्र की 48 कोस की सांस्कृतिक परिक्रमा के अनुसार, यह युद्ध और इससे जुड़े शिविरों का पूरा क्षेत्र लगभग **48 कोस (यानी करीब 150 किलोमीटर के दायरे)** में फैला हुआ था। मुख्य युद्ध भूमि ज्योतिसर और उसके आसपास के मैदान थे, लेकिन सेनाओं के शिविर, रसद और व्यूह रचना इसी पूरे 48 कोस के क्षेत्र में फैले हुए थे।
### 3. कुरुक्षेत्र के 4 यक्ष (रक्षक) के मंदिर
कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि की चारों दिशाओं में सीमा सुरक्षा के लिए चार यक्षों की नियुक्ति मानी गई थी। आज भी कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिक्रमा में इनके स्थान मौजूद हैं:
1. **तरंतुक यक्ष:** यह कुरुक्षेत्र की उत्तर-पूर्वी सीमा पर स्थित है (वर्तमान में सींख या तरावड़ी के पास)।
2. **अरंतुक यक्ष:** यह कुरुक्षेत्र शहर के पास (वर्तमान बीड़ पीपली/समीप) माना जाता है।
3. **मचक्रुक (कपिष्टल) यक्ष:** यह पश्चिमी सीमा पर है (वर्तमान में कैथल जिले के सीवन गांव में)।
4. **रत्नुक यक्ष:** यह कुरुक्षेत्र की दक्षिणी सीमा पर माना जाता है (जींद-करनाल मार्ग पर सिंघपुरा या खरल गांव के पास)।
### 4. परशुराम जी द्वारा बनाए गए तालाब (सरोवर)
यहाँ पर एक छोटा सा ऐतिहासिक सुधार (Correction) जरूरी है:
> पौराणिक कथाओं (महाभारत के आदिपर्व) के अनुसार, भगवान परशुराम जी ने यहाँ **8 नहीं, बल्कि 5 तालाब (सरोवर)** बनाए थे, जिन्हें **'समंतपंचक' (स्यूंत पंचक)** कहा जाता है।
>
* **कथा:** जब परशुराम जी ने पृथ्वी को क्षत्रिय-विहीन किया था, तब उन्होंने अपने पितरों के तर्पण के लिए कुरुक्षेत्र की इसी भूमि पर रक्त से भरे 5 सरोवर बनाए थे। बाद में पितरों के आशीर्वाद से वे सरोवर पवित्र जल में बदल गए।
* **आज की स्थिति:** आज इन्हें कुरुक्षेत्र के मुख्य **ब्रह्म सरोवर** और **सन्निहित सरोवर** के आस-पास के क्षेत्रों और धार्मिक कुंडों के रूप में जाना जाता है, जहाँ सूर्य ग्रहण के समय लाखों लोग स्नान करने आते हैं।
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