ईरान की लगभग 3,000 साल पुरानी इस प्रसिद्ध और अद्भुत तकनीक को **'क़नात' (Qanat)** या फारसी में **'कारिज़' (Kariz)** कहा जाता है।
रेगिस्तानी और भीषण गर्मी वाले इलाक़ों में बिना पानी के वाष्पीकरण (Evaporation) के, मीलों दूर तक पानी पहुँचाने के लिए यह तकनीक प्राचीन इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना है। यूनेस्को (UNESCO) ने इसे **विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site)** में भी शामिल किया है।
## क़नात (Qanat) काम कैसे करती है?
यह पूरी तरह से **गुरुत्वाकर्षण (Gravity)** के सिद्धांत पर काम करती है, यानी इसमें पानी बहने के लिए किसी पंप या बिजली की ज़रूरत नहीं होती।
1. **मदर वेल (Mother Well):** सबसे पहले पहाड़ों या ऊँचे इलाक़ों की तलहटी में एक मुख्य कुआं (Mother Well) खोदा जाता है, जहाँ भूमिगत जल (Aquifer) मौजूद होता है।
2. **भूमिगत सुरंग (Underground Tunnel):** इस कुएं से मैदानी इलाक़ों की ओर नीचे की ढलान पर ज़मीन के भीतर ही एक सुरंग खोदी जाती है।
3. **वर्टिकल शाफ्ट (Vertical Shafts):** सुरंग की खुदाई, हवा के आवागमन (Ventilation) और सफ़ाई के लिए ज़मीन के ऊपर से नीचे सुरंग तक जगह-जगह सीधे कुएं (Shafts) बनाए जाते हैं। ऊपर से देखने पर यह ज़मीन पर छेदों की एक कतार की तरह दिखाई देते हैं।
4. **मज़हर (Outlet):** सुरंग का अंतिम हिस्सा ज़मीन की सतह पर आकर खुलता है, जिसे 'मज़हर' कहा जाता है। यहीं से पानी सिंचाई और पीने के उपयोग के लिए उपलब्ध होता है।
## इस तकनीक के बड़े फायदे
* **वाष्पीकरण से बचाव:** ज़मीन के नीचे ठंडी सुरंगों में बहने के कारण रेगिस्तानी गर्मी में भी पानी भाप बनकर नहीं उड़ता।
* **प्राकृतिक एयर-कंडीशनिंग:** सुरंगों के अंदर बहने वाले ठंडे पानी और हवा का उपयोग ऊपर बने भवनों (विंडकैचर/बादगीर) को ठंडा रखने के लिए भी किया जाता था।
* **सतत जल प्रबंधन:** इसमें उतना ही पानी बहकर बाहर आता है जितना जलभृत (Aquifer) में रिचार्ज होता है, जिससे भूजल का दोहन सीमित और टिकाऊ रहता है।
> **दिलचस्प बात:** ईरान में खोदी गई इन सुरंगों की कुल लंबाई लाखों किलोमीटर में फैली हुई है। यह तकनीक सिर्फ़ ईरान तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि रेशम मार्ग (Silk Road) और व्यापार के ज़रिए अफ़ग़ानिस्तान, ओमान (जहाँ इसे 'फलज' कहते हैं), उत्तरी अफ्रीका और भारत के कुछ हिस्सों (जैसे बीदर और बुरहानपुर की 'करेज' प्रणाली) तक पहुँची।
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