भारत का सेवा निर्यात ? क्या कहती है भारतीय रिजर्व बैंक की हालिया रिपोर्ट ?

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की रिपोर्टों और आंकड़ों के अनुसार भारत का **सेवा निर्यात (Services Export)** वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश की अर्थव्यवस्था का सबसे मजबूत और तेजी से बढ़ता स्तंभ बना हुआ है। RBI और वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के आधार पर सेवा निर्यात से जुड़ी मुख्य बातें: ## 1. रिकॉर्ड प्रदर्शन और ऐतिहासिक स्तर * **वित्त वर्ष 2025-26 की उपलब्धि:** वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल सेवा निर्यात बढ़कर **418 बिलियन (लगभग US 418.31 Billion)** के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया, जो पिछले वित्त वर्ष से करीब **7.9% से 8% की वृद्धि** दर्शाता है। * **व्यापार अधिशेष (Services Trade Surplus):** सेवाओं में भारत का शुद्ध अधिशेष (Surplus) वस्तुओं के व्यापार घाटे (Merchandise Trade Deficit) को संतुलित करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है। ## 2. विकास के प्रमुख चालक (Key Growth Drivers) RBI के आंकड़ों के मुताबिक, सेवा निर्यात की इस मजबूत रफ्तार के पीछे मुख्य रूप से दो क्षेत्र हैं: 1. **सॉफ्टवेयर और IT सेवाएं (Software Services):** आईटी (IT) और टेक सेवाओं की वैश्विक मांग लगातार बनी हुई है। 2. **बिजनेस और प्रोफेशनल सर्विसेज (GCCS / Business Services):** भारत में स्थापित **ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs)** का तेजी से विस्तार हुआ है। वित्तीय, परामर्श (Consulting), इंजीनियरिंग, शोध और ऑडिटिंग जैसी व्यावसायिक सेवाएं कुल सेवा निर्यात का लगभग **77% से 78%** हिस्सा कवर करती हैं। ## 3. वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति * **डिजिटल रूप से दी जाने वाली सेवाएं (Digitally Delivered Services):** डिजिटल सेवाओं के वैश्विक निर्यात में भारत **दुनिया में 5वें स्थान** पर बना हुआ है। * **कुल वाणिज्यिक सेवाएं:** विश्व के कुल वाणिज्यिक सेवा निर्यात (Global Commercial Services) में भारत की हिस्सेदारी बढ़कर **4.5% से अधिक** हो चुकी है। ## 4. चालू वित्त वर्ष (2026-27) की शुरुआत RBI द्वारा जारी चालू वित्त वर्ष के शुरुआती आंकड़ों (अप्रैल-जून 2026) के अनुसार, सेवा निर्यात में **6% से अधिक की वृद्धि** दर्ज की गई है और यह तीन महीनों में ही **$103 बिलियन** से अधिक हो चुका है। > **निष्कर्ष:** RBI की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि जहां वैश्विक मंदी और भू-राजनीतिक तनावों के कारण वस्तुओं के व्यापार (Goods Trade) में सुस्ती देखने को मिली है, वहीं भारत का **सेवा क्षेत्र (Services Sector)** देश के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit - CAD) को नियंत्रित रखने और जीडीपी को मजबूती देने में "सुरक्षा कवच" का काम कर रहा है। >

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