राजसूय यज्ञ के समय घटोत्कच के माध्यम से सहदेव विभीषण से मिले लंका में?

यह घटना **महाभारत युद्ध से बहुत पहले की है**, इसीलिए उस समय घटोत्कच जीवित था। महाभारत के अनुसार कालक्रम कुछ इस प्रकार है: ### 1. किस समय की घटना है? यह घटना **राजसूय यज्ञ** (दिग्विजय यात्रा) के समय की है। पांडवों ने जब इंद्रप्रस्थ का निर्माण कर लिया था, तब युधिष्ठिर को चक्रवर्ती सम्राट बनाने के लिए चारों पांडव भाई चारों दिशाओं में विजय यात्रा (राजसूय यज्ञ के लिए कर/उपहार जुटाने) पर निकले थे। * अर्जुन उत्तर दिशा में गए। * भीम पूर्व दिशा में गए। * नकुल पश्चिम दिशा में गए। * **सहदेव दक्षिण दिशा में गए।** ### 2. इस यात्रा में घटोत्कच की भूमिका जब सहदेव दक्षिण दिशा की विजय यात्रा पर थे, तब वे भारत के सुदूर दक्षिण (समुद्र तट) तक पहुँचे। लंकापति विभीषण राक्षस जाति के राजा थे और घटोत्कच भीम तथा राक्षसी हिडिम्बा का पुत्र था। इसलिए, सहदेव ने स्वयं लंका जाने के बजाय **घटोत्कच को अपना दूत (राजदूत) बनाकर विभीषण के पास लंका भेजा**। घटोत्कच के माध्यम से ही सहदेव ने विभीषण को युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ में सम्मिलित होने और कर (टैक्स/उपहार) देने का संदेश भेजा था। ### 3. समय रेखा (Timeline) 1. **राजसूय यज्ञ (घटना का समय):** पांडव इंद्रप्रस्थ में सुख-पूर्वक रह रहे थे। घटोत्कच जीवित था और उसने दूत बनकर विभीषण से भेंट की। 2. **द्यूत क्रीड़ा (जुआ) और वनवास:** राजसूय यज्ञ के बाद दुर्योधन ने पांडवों को जुए में हराया और पांडवों को 12 वर्ष का वनवास तथा 1 वर्ष का अज्ञातवास मिला। 3. **महाभारत का युद्ध:** वनवास समाप्त होने के बाद कुरुक्षेत्र का युद्ध हुआ, जिसमें 14वें दिन की रात को कर्ण ने अपने दिव्य 'अमोघ अस्त्र' (वासवी शक्ति) का प्रयोग करके घटोत्कच का वध किया। घटोत्कच और सहदेव की विभीषण से भेंट **कुरुक्षेत्र युद्ध से कई वर्ष पहले** पांडवों के राजसूय यज्ञ के दौरान हुई थी।

टिप्पणियाँ