सनातन धर्म में सभी 14 लोको का मेरुदण्ड किधर है और इसकी सटीक गणना ध्रुव तारे से कैसे करी जाती है और यह मेरुदण्ड किधर के समय में किस स्थान पर पड़ता है ?
सनातन धर्म के खगोल विज्ञान (Vedic Astronomy) और पुराणों (जैसे विष्णु पुराण, श्रीमद्भागवत पुराण) में ब्रह्मांड की संरचना को एक दिव्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया गया है। आपके तीनों प्रश्नों के सटीक और वैज्ञानिक-आध्यात्मिक उत्तर नीचे दिए गए हैं:
## 1. 14 लोकों का 'मेरुदण्ड' किधर है?
सनातन वास्तुकला और ब्रह्मांड विज्ञान में **'सुमेरु पर्वत' (Mount Meru)** को ब्रह्मांड का मेरुदण्ड (Spinal Cord या Axis) माना गया है।
* **ब्रह्मांडीय स्तर पर:** सुमेरु पर्वत कोई सामान्य मिट्टी का पहाड़ नहीं, बल्कि ब्रह्मांड की **केंद्रीय धुरी (Central Axis)** है। इसके ऊपर की ओर 7 ऊर्ध्व लोक (भूः, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः, सत्यम्) और नीचे की ओर 7 अधो लोक (अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल, रसातल, पाताल) स्थित हैं। यह ठीक वैसे ही है जैसे हमारे शरीर में रीढ़ की हड्डी (मेरुदण्ड) होती है और उसी पर सभी चक्र स्थित होते हैं।
## 2. ध्रुव तारे से इसकी सटीक गणना कैसे होती है?
श्रीमद्भागवत पुराण के पांचवें स्कंध में ब्रह्मांड को **'शिंशुमार चक्र' (तारा-मंडल का एक विशेष स्वरूप)** कहा गया है। ध्रुव तारा इस पूरे ब्रह्मांडीय पहिए का केंद्र बिंदु (Pivot) है।
* **खगोलीय गणना (Astro-Mathematical Calculation):**
ध्रुव तारा (Pole Star) सुमेरु पर्वत (ब्रह्मांडीय मेरुदण्ड) के ठीक ऊपर, उसके शीर्ष बिंदु पर स्थित है। अदृश्य रूप से, सभी ग्रह, नक्षत्र और सौरमंडल **'वात-रस्सी' (Gaseous or Gravitational Ropes)** के माध्यम से ध्रुव तारे से बंधे हुए हैं।
* **प्रदक्षिणा और केंद्र:** चूंकि ध्रुव तारा ब्रह्मांडीय अक्ष (Axis) के बिल्कुल शीर्ष पर स्थिर है, इसलिए पृथ्वी से देखने पर पूरा आकाश और सभी नक्षत्र इसके चारों ओर घूमते हुए दिखाई देते हैं। गणितीय रूप से, ध्रुव तारे की कोणीय ऊंचाई (Angular Elevation) से किसी भी स्थान का अक्षांश (Latitude) निकाला जाता है। इसी ध्रुवीय अक्ष को केंद्र मानकर वैदिक गणितज्ञ सूर्य की गति, संक्रांति और 14 लोकों की दूरियों (योजन में) की गणना करते थे।
## 3. यह मेरुदण्ड किस स्थान और किस समय के क्षेत्र (Time Zone) में पड़ता है?
भूगोलीय और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, इस मेरुदण्ड (सुमेरु) की स्थिति को पृथ्वी और समय के सापेक्ष इस प्रकार समझा जाता है:
| श्रेणी | सटीक स्थान / विवरण |
|---|---|
| **भौगोलिक स्थान** | सुमेरु पर्वत का पृथ्वी पर केंद्र **उत्तरी ध्रुव (North Pole)** को माना जाता है। पुराणों के अनुसार, यह जम्बूद्वीप के केंद्र में है। आधुनिक विज्ञान में भी उत्तरी ध्रुव पृथ्वी की घूर्णन धुरी (Axis of Rotation) का शीर्ष है। |
| **समय क्षेत्र (Time Zone)** | उत्तरी ध्रुव पर कोई एक विशिष्ट टाइम जोन लागू नहीं होता, क्योंकि वहाँ दुनिया की सभी देशांतर रेखाएं (Longitude Lines) आकर मिल जाती हैं। तकनीकी रूप से इसे **UTC+00:00 (Greenwich Mean Time)** या **'इंटरनेशनल डेट लाइन'** का उद्गम मान सकते हैं। |
| **समय की अनूठी गणना** | सुमेरु (उत्तरी ध्रुव) पर **6 महीने का दिन और 6 महीने की रात** होती है। मानवीय गणना के अनुसार, जब सूर्य उत्तरायण (मकर संक्रांति से) होता है, तो सुमेरु पर दिन की शुरुआत होती है। पुराणों के अनुसार, पृथ्वी का 1 वर्ष देवताओं (जो मेरु पर रहते हैं) के 1 दिन-रात के बराबर होता है। |
> **अध्यात्म और विज्ञान का मेल:**
> 'यथा पिण्डे तथा ब्रह्माण्डे' के सिद्धांत के अनुसार, जो ब्रह्मांड में है वही हमारे शरीर में है। ब्रह्मांड का मेरुदण्ड सुमेरु पर्वत है जो ध्रुव तारे (परम चेतना) से जुड़ा है, और मनुष्य के शरीर का मेरुदण्ड उसकी रीढ़ की हड्डी है, जिसका शीर्ष 'सहस्रार चक्र' (मस्तिष्क) है।
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