- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
चीन की जिस "66 अरब पेड़ों वाली योजना" की उसे आधिकारिक तौर पर **"थ्री-नॉर्थ शेल्टरबेल्ट प्रोग्राम" (Three-North Shelterbelt Program)** कहा जाता है। इसे दुनिया भर में **"ग्रेट ग्रीन वॉल ऑफ चाइना" (Great Green Wall of China)** के नाम से भी जाना जाता है।
यह दुनिया का सबसे बड़ा मानव निर्मित पर्यावरण और वनीकरण (Reforestation) प्रोजेक्ट है। आइए इसके मुख्य बिंदुओं और इसकी वर्तमान स्थिति को आसान भाषा में समझते हैं:
## 1. इस योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
चीन का उत्तरी हिस्सा (जैसे गोबी और तकलामकान रेगिस्तान) तेजी से फैल रहा था, जिससे हर साल उपजाऊ जमीन रेत में बदल रही थी। इस वजह से बीजिंग जैसे बड़े शहरों में खतरनाक धूल भरे तूफान आते थे।
* **रेगिस्तान को रोकना:** इस योजना का मुख्य लक्ष्य रेगिस्तान के विस्तार (Desertification) को रोकना है।
* **सैंडब्रेक (Windbreak) बनाना:** पेड़ों और झाड़ियों की एक विशाल हरी दीवार बनाकर तेज हवाओं और धूल के तूफानों को रोकना।
## 2. योजना की शुरुआत और 66 अरब पेड़ों का आंकड़ा
* यह प्रोजेक्ट **1978** में शुरू किया गया था और इसे **2050** तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
* पिछले दशकों में इस मिशन के तहत **66 अरब से भी अधिक पेड़** लगाए जा चुके हैं।
* हालिया रिसर्च (2026 की रिपोर्टों के अनुसार) से पता चला है कि इन लगाए गए जंगलों का कैनोपी एरिया (पत्तियों का फैलाव) प्राकृतिक जंगलों की तुलना में 66% तेजी से बढ़ रहा है।
## 3. इस ग्रीन वॉल की कुछ खास तकनीकें (Green Tech)
शुरुआती दिनों (1978 से 2000 के बीच) में चीन को भारी असफलता मिली थी क्योंकि उन्होंने सिर्फ एक ही तरह के पेड़ (Monoculture) लगाए थे, जिनमें से 80% से ज्यादा पानी की कमी या बीमारी से मर गए। इसके बाद चीन ने अपनी रणनीति बदली और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया:
* **बायो-लेयरिंग (Bio-layering):** सीधे रेत में पेड़ लगाने के बजाय पहले घास और विशेष वनस्पतियों की एक जैविक परत बनाई जाती है, जो रेत को बांधकर रखती है।
* **ड्रोन और ऑटोमेशन:** दुर्गम रेगिस्तानी इलाकों में बीज छिड़कने और पेड़ लगाने के लिए आधुनिक मशीनों और ड्रोनों का उपयोग किया जा रहा है।
* **पशुपालन का एकीकरण (Animal Husbandry):** इकोसिस्टम को प्राकृतिक रूप देने के लिए जंगलों के साथ-साथ वहां नियंत्रित रूप से पशुओं को भी शामिल किया जा रहा है ताकि मिट्टी को प्राकृतिक खाद मिल सके।
## 4. इसके फायदे और चुनौतियाँ
| फायदे | चुनौतियाँ / चिंताएँ |
|---|---|
| **रेगिस्तान पर लगाम:** उत्तरी चीन में जंगलों का दायरा 5% से बढ़कर 14% से अधिक हो गया है। | **पानी का संकट:** रेगिस्तानी इलाकों में इन अरबों पेड़ों को जीवित रखने के लिए भूजल (Groundwater) का भारी इस्तेमाल हो रहा है, जिससे पानी का स्तर गिर रहा है। |
| **तूफानों में कमी:** बीजिंग और उसके आसपास के शहरों में धूल के तूफानों की तीव्रता बहुत कम हुई है। | **अस्थायी कार्बन सिंक:** वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव-निर्मित जंगल शुरू के 30-40 साल तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन लंबी अवधि के कार्बन स्टोरेज के लिए प्राकृतिक जंगल ही सबसे बेस्ट होते हैं। |
> **एक दिलचस्प बात:** चीन की इसी सफलता को देखते हुए **भारत** भी अपने पश्चिमी हिस्से (गुजरात से लेकर दिल्ली-हरियाणा तक) में अरावली पहाड़ियों के पास एक **'ग्रेट ग्रीन वॉल ऑफ इंडिया' (1400 किमी लंबी ग्रीन बेल्ट)** विकसित करने पर काम कर रहा है, ताकि थार रेगिस्तान के फैलाव को रोका जा सके।
>
क्या आप चीन के इस प्रोजेक्ट की किसी खास तकनीक या भारत की ग्रीन वॉल योजना के बारे में कुछ और विस्तार से जानना चाहते हैं?
- लिंक पाएं
- X
- ईमेल
- दूसरे ऐप
टिप्पणियाँ