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देश के अन्य हिस्सों में चल रहे जिस फर्जीवाड़े और शिक्षा के गिरते स्तर की बात बेहद गंभीर और डराने वाला विषय है। स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में जहां एक गलत दवा किसी की जान ले सकती है, वहां **आर्ट्स (Arts) के छात्रों को अवैध तरीके से फार्मेसी की डिग्री देना, बिना अनुभव के दवाइयां बांटना और फर्जी डॉक्टरों का तैयार होना** समाज के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।
इन्हीं मेडिकल अपराधों, फर्जी दवाइयों के नेटवर्क और गलत प्रमाणीकरण (Wrong Certification) पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार और **फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI)** ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है — **फार्मेसी नेशनल एग्जिट एग्जाम (D.Pharm Exit Exam)।**
आइए समझते हैं कि यह नेशनल एग्जिट टेस्ट इस पूरे फर्जीवाड़े को कैसे रोकेगा:
### 1. फर्जी और अयोग्य 'फार्मासिस्टों' पर परमानेंट फुलस्टॉप
अब तक कई राज्यों में ऐसे फर्जी कॉलेज खुल गए थे जो सिर्फ पैसों के दम पर (बिना क्लास जाए या बिना साइंस बैकग्राउंड के) डिप्लोमा या डिग्री बांट रहे थे।
* **नया नियम:** अब कॉलेज से डिग्री या डिप्लोमा (D.Pharm) मिलने मात्र से कोई फार्मासिस्ट नहीं बन पाएगा।
* **रजिस्ट्रेशन के लिए टेस्ट जरूरी:** सरकारी या प्राइवेट लाइसेंस पाने के लिए और स्टेट फार्मेसी काउंसिल में 'रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट' के रूप में दर्ज होने के लिए इस **राष्ट्रीय एग्जिट टेस्ट** को पास करना अनिवार्य होगा। जो फर्जी तरीके से पढ़े हैं, वे इस परीक्षा को पास ही नहीं कर पाएंगे, जिससे फर्जी डिग्री धारक सीधे बाहर हो जाएंगे।
### 2. आर्ट्स (Arts) और कॉमर्स वालों के अवैध एडमिशन पर रोक
जैसा कि देहरादून का मामला, जहां नियमों को ताक पर रखकर आर्ट्स के छात्रों को फार्मासिस्ट बनाया जा रहा था:
* कानूनन फार्मेसी (D.Pharm/B.Pharm) में एडमिशन के लिए **12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) या मैथ्स (PCM)** होना अनिवार्य है।
* एग्जिट एग्जाम का सिलेबस पूरी तरह से कोर मेडिकल और फार्मास्यूटिकल साइंस पर आधारित होगा। ऐसे में अगर किसी कॉलेज ने मिलीभगत करके आर्ट्स के छात्र को डिग्री दे भी दी, तो वह नेशनल लेवल के इस एग्जाम को कभी क्रैक नहीं कर पाएगा। इससे ऐसे फर्जी कॉलेजों का धंधा अपने आप बंद हो जाएगा।
### 3. गलत दवाओं के वितरण और मेडिकल अपराधों में कमी
अक्सर गांवों और कस्बों में देखा जाता है कि मेडिकल स्टोर खोलने के बाद लोग खुद 'डॉक्टर' बन जाते हैं और बिना पर्चे (Prescription) के गंभीर दवाइयां, एंटीबायोटिक्स या नशीली दवाइयां बेचने लगते हैं।
* **क्वालिटी कंट्रोल:** जब कड़े एग्जाम से छनकर केवल योग्य और अनुभवी लोग ही फार्मासिस्ट बनेंगे, तो उन्हें दवाओं के सटीक कॉम्बिनेशन, उनके साइड-इफेक्ट्स और ड्रग कानूनों की गहरी समझ होगी।
* **फर्जी डॉक्टरों पर लगाम:** एक जिम्मेदार फार्मासिस्ट कभी भी डॉक्टर बनकर गलत इलाज या अवैध दवाइयों का उत्पादन/वितरण नहीं करेगा, जिससे मेडिकल अपराधों में भारी कमी आएगी।
### 4. दवाइयों के गलत प्रमाणीकरण (Wrong Certification) का खात्मा
दवा कंपनियों में दवाओं की मैन्युफैक्चरिंग और टेस्टिंग के लिए रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट (QC/QA) की जरूरत होती है। जब बिना योग्यता वाले लोग कागजों पर फार्मासिस्ट बनकर कंपनियों में साइन करते थे, तो मार्केट में घटिया और नकली दवाइयां सप्लाई होने का खतरा रहता था। एग्जिट एग्जाम से निकले असली प्रोफेशनल्स दवाओं की शुद्धता और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं करेंगे।
> **निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति:**
> सरकार द्वारा लागू किया गया यह **नेशनल एग्जिट टेस्ट** मेडिकल क्षेत्र के शुद्धिकरण के लिए बेहद जरूरी था। यह ठीक उसी तरह है जैसे वकीलों के लिए बार काउंसिल का एग्जाम (AIBI) या डॉक्टरों के लिए 'NEXT' एग्जाम होता है। इससे देहरादून जैसे देश भर के शिक्षा माफियाओं और फर्जी मेडिकल स्टोर चलाने वालों की कमर टूटेगी और देश के नागरिकों को सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।
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