भारतीय ग्रामीण महिलाएं शहरी महिलाओं से आगे जन्म के तुरंत बाद स्तनपान कराने में ?

राष्ट्रीय स्तर के स्वास्थ्य सर्वेक्षणों (जैसे **NFHS - National Family Health Survey**) के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि **शहरी महिलाओं की तुलना में भारतीय ग्रामीण महिलाएं बच्चे के जन्म के तुरंत बाद (एक घंटे के भीतर) स्तनपान कराने में आगे हैं।** इसे चिकित्सा विज्ञान की भाषा में **"अर्ली इनीशिएशन ऑफ ब्रेस्टफीडिंग" (Early Initiation of Breastfeeding)** कहा जाता है। ग्रामीण महिलाओं के इस मामले में आगे होने के पीछे कई सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यावहारिक कारण हैं: ### 1. प्रसव का तरीका (Normal Delivery vs. C-Section) * **ग्रामीण क्षेत्र:** गांवों में आज भी सामान्य प्रसव (Normal Delivery) की दर शहरों से अधिक है। सामान्य प्रसव के तुरंत बाद मां शारीरिक रूप से बच्चे को दूध पिलाने की स्थिति में होती है। * **शहरी क्षेत्र:** शहरों में सिजेरियन प्रसव (C-Section या बड़ा ऑपरेशन) की दर बहुत अधिक है। ऑपरेशन के बाद मां को होश आने में, दर्द कम होने में और रिकवरी में कुछ घंटे लग जाते हैं, जिससे स्तनपान में देरी होती है। ### 2. संयुक्त परिवार और बुजुर्गों का मार्गदर्शन * ग्रामीण इलाकों में आज भी संयुक्त परिवार (Joint Families) की व्यवस्था मजबूत है। घर की बड़ी-बुजुर्ग महिलाएं (दादी, नानी, चाची) जन्म के तुरंत बाद मां को बच्चे को दूध पिलाने के लिए प्रेरित और जागरूक करती हैं। ### 3. आशा (ASHA) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का नेटवर्क * भारत सरकार के ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत **आशा वर्कर्स (ASHA workers)** और **आंगनवाड़ी कार्यकर्ता** ग्रामीण गर्भवती महिलाओं को लगातार काउंसलिंग देती हैं। वे प्रसव के समय अस्पताल में मौजूद रहकर यह सुनिश्चित करती हैं कि बच्चे को जन्म के तुरंत बाद 'पहला गाढ़ा पीला दूध' (कॉलस्ट्रम) मिले, जिसे बच्चे का पहला टीका भी कहा जाता है। ### 4. शहरी जीवनशैली और विज्ञापनों का प्रभाव * शहरों में कामकाजी महिलाओं (Working Mothers) की संख्या अधिक है, और प्रसव के बाद काम पर लौटने की जल्दी या तनाव के कारण भी इसमें कमी देखी जाती है। * इसके अलावा, शहरों में 'इन्फेंट फॉर्मूला' (डिब्बे का दूध) और कमर्शियल बेबी फूड का प्रचार-प्रसार बहुत अधिक है, जिससे कई बार शहरी माताएं भ्रमित हो जाती हैं या फॉर्मूला मिल्क को एक आसान विकल्प मान लेती हैं। > **एक चिंताजनक पहलू:** > हालांकि ग्रामीण महिलाएं 'शुरुआती स्तनपान' में आगे हैं, लेकिन दोनों ही क्षेत्रों (ग्रामीण और शहरी) में जन्म के तुरंत बाद स्तनपान का कुल प्रतिशत अभी भी 100% से काफी दूर (लगभग 40% से 50% के बीच) है। अंधविश्वासों (जैसे: पहला दूध अपवित्र समझना या बच्चे को पहले शहद/घुट्टी चटाना) के कारण आज भी कई जगहों पर इसमें देरी होती है, जिसे दूर करने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। >

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